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रायबरेली न्यूज/सैयद हुसैन अख्तर: उत्तर प्रदेश के बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग से जुड़े लाखों शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वाराणसी से प्रदेशव्यापी कैशलेस चिकित्सा योजना का औपचारिक शुभारंभ किया. इस योजना के तहत राज्य के शिक्षकों और कर्मचारियों को अब गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए निजी अस्पतालों में 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा उपलब्ध कराया जाएगा.
रायबरेली में भव्य कार्यक्रम का आयोजन
इस योजना के क्रियान्वयन के उपलक्ष्य में रायबरेली के गोपाल सरस्वती विद्या मंदिर स्कूल में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया. इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री डॉ. मनोज कुमार पांडे मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए. उन्होंने अपने हाथों से लाभार्थियों को इस योजना के डमी डॉक्यूमेंट वितरित किए। इस दौरान शिक्षक संघ के पदाधिकारी और विभाग के अनेक अधिकारी मौजूद रहे.
क्या है यह योजना?
इस योजना का मुख्य उद्देश्य शिक्षा जगत से जुड़े कर्मचारियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करना है. अब तक सरकारी कर्मचारी इलाज के लिए पैसे खर्च करके बाद में प्रतिपूर्ति का इंतजार करते थे, जिससे उन्हें काफी आर्थिक परेशानी होती थी. 5 लाख रुपये की इस सुविधा के साथ, अब उन्हें किसी भी सूचीबद्ध निजी अस्पताल में भर्ती होने पर जेब से पैसे खर्च करने की जरूरत नहीं होगी, बल्कि इलाज का पूरा खर्च सरकार वहन करेगी.
राम मंदिर मुद्दे पर मंत्री की दो टूक
कार्यक्रम के दौरान कैबिनेट मंत्री डॉ. मनोज कुमार पांडे ने राम मंदिर से जुड़े विवादों पर भी खुलकर अपनी बात रखी. उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा, कलयुग के मारीच को देखकर सतयुग के मारीच भी शर्मसार होकर भाग जाते.
मंदिर निर्माण से जुड़े आरोपों पर उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एसआईटी (SIT) गठित कर दी है. उन्होंने विश्वास दिलाया कि जांच के बाद "दूध का दूध और पानी का पानी" हो जाएगा और जो भी दोषी होगा, उस पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी. चंपत राय के बयान पर पूछे गए सवाल के जवाब में मंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में सभी को अपनी बात कहने का अधिकार है और इस पूरे मामले पर देश की जनता अपनी नजरें बनाए हुए है और वह खुद ही इसकी सच्चाई को परख रही है.
शिक्षा जगत में खुशी की लहर
सरकार के इस कदम से शिक्षा विभाग के कर्मचारियों में खुशी का माहौल है. शिक्षकों ने इसे एक ऐतिहासिक फैसला बताते हुए कहा कि इससे न केवल उनका मनोबल बढ़ेगा, बल्कि स्वास्थ्य के प्रति उनकी चिंताएं भी काफी हद तक कम होंगी.