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देवबंद ने मुस्लिम महिलाओं के खिलाफ जारी किया नया फतवा, बोला- गैर मर्दों से चूड़ी पहनना हराम

दारुल उलूम ने सवाल का जवाब देते हुए कहा है कि नामहरम मर्द का अजनबी औरतों को चूड़ी पहनाना नाजायज और गुनाह है

देवबंद ने मुस्लिम महिलाओं के खिलाफ जारी किया नया फतवा, बोला- गैर मर्दों से चूड़ी पहनना हराम
गैर मर्दों से चूड़ियां पहनने को दारुल उलूम देवबंद से जारी हुए ताजे फतवे में नाजायज और सख्त गुनाह करार दिया गया है (प्रतीकात्मक तस्वीर)

देवबंद: चूड़ियां सुहागन महिलाओं की पहचान मानी जाती हैं. महिलाओं को नए-नए डिजायनों की चूड़ियां पहनने का शौक भी काफी होता है. लेकिन, महिलाओं द्वारा बाजारों में जाकर नामहरम (जिन से खून का रिश्ता न हो) मर्दों से चूड़ियां पहनने को दारुल उलूम देवबंद से जारी हुए ताजे फतवे में नाजायज और सख्त गुनाह करार दिया गया है. फतवे के मुताबिक इस्लाम में गैर मर्दों से चूड़ी पहनना हराम माना गया है. बताया गया है कि इस्लाम चूड़ियां पहनने से मना नहीं करता लेकिन यह तरीका नाजायज है, चूड़ियां पहनने के और भी तरीके हैं.

देवबंद में रहने वाले उठाया था सवाल
जानकारी के मुताबिक देवबंद के ही मोहल्ला बड़जियाउलहक निवासी एक व्यक्ति ने दारुल उलूम के इफ्ता विभाग से लिखित सवाल में पूछा था कि हमारे यहां आमतौर पर चूड़ियां बेंचने व पहनाने का काम मनिहार बिरादरी से संबंध रखने वाले लोग करते हैं. औरतों को चूडियां पहनने के लिए घर से निकलना पड़ता है और अपने हाथ गैर मर्दों के हाथों में देने पड़ते हैं. क्या इस तरह घर से निकलकर या घर में रहकर औरतों का गैर मर्दों से चूड़ी पहनना जायज है.

देवबंद के मुफ्तियों की खंडपीठ ने दिया जवाब
दारुल उलूम देवबंद के मुफ्तियों की खंडपीठ ने जवाब संख्या 473/द में पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए कहा है कि नामहरम मर्द का अजनबी औरतों को चूड़ी पहनाना नाजायज और गुनाह है. औरतों का नामहरम मर्दों से चूड़ी पहनने के लिए बाहर निकलना भी मना है. और नामहरम मर्दों से चूड़ियां पहनना नाजायज व सख्त गुनाह है. ऐसे गुनाह से बचना और तौबा करना वाजिब है.

मुस्लिम औरतें बदलें अपनी आदत
तंजीम अब्नाए दारुल उलूम के अध्यक्ष मुफ्ती यादे इलाही कासमी ने दारुल उलूम द्वारा जारी फतवे को पूरी तरह सही बताते हुए कहा, "इस्लाम ने औरतों को गैर मर्दों से पर्दा करने का हुक्म दिया है. इसलिए मुसलमान औरतों को चाहिए कि या तो वह चूड़ियां किसी औरत के हाथ से ही पहनें या फिर अपने हाथों से चूड़ियां पहनने की आदत डालें."

मुस्लिम महिलाओं को शरीयत का ध्यान रखना चाहिए
दारुल उलूम देवबंद के फतवे पर मुफ्ती तारिक कासमी मदरसा जामिया हुसैनीया ने कहा, "कुरान और हदीस की रोशनी में दारुल उलूम ने फतवा दिया है. इस्लाम के अंदर किसी अजनबी औरत को अजनबी मर्द के सामने बेपर्दा होना या एक दूसरे को छूना गलत है. चूड़ियों के मामले में औरतें अजनबी मर्दों की दुकानों पर चूड़ियां खरीदने जाती हैं. उनको हाथों में चूड़ियां पहनने के लिए अपने हाथ को गैर मर्द के हाथों में देना पड़ता है. जिस वजह से उनके हाथों पर गैर मर्द के हाथ लगते हैं. यह गलत है, इससे मुस्लिम महिलाओं को बचना चाहिए. इस्लाम के अंदर यह नाजायज है. इस्लाम में चूड़ियां पहनने के और भी तरीके हैं. इस्लाम चूड़ियां पहनने से मना नहीं करता. औरतें चूड़ियां खरीद कर, अपने घर आकर, खुद पहनें या किसी महिला से पहनें. मुस्लिम महिलाओं को शरीयत का ध्यान रखना चाहिए." 

गैर मर्द के हाथ में हाथ देकर चूड़ियां पहनना सही नहीं
आपको बता दें कि मुफ्ती अहमद गोड ने दारुल उलूम देवबंद से यह फतवा लिया है. उन्होंने दारुल उलूम देवबंद को लिखित में सवाल किए थे कि मनिहार चूड़ियां पहनाने का काम करते हैं, औरतों को गैर मर्द के हाथ में हाथ देना पड़ता है इससे बेपर्दगी होती है, क्या यह सही है. इस पर हदीस और कुरान की रोशनी में फतवा जारी कर बताया गया था कि गैर मर्द के हाथ में हाथ देकर चूड़ियां पहनना सही नहीं है. यह इस्लाम में जायज नहीं है. मुस्लिम महिलाएं चूड़ियां पहनती हैं तो उनको चूड़ियां खरीद कर अपने आप पहननी चाहिए या फिर किसी महिला से चूड़ियां पहननी चाहिए.