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राज्यसभा चुनाव : BSP को झटका, मुख्तार अंसारी के वोट डालने पर कोर्ट ने लगाई रोक

संख्याबल के आधार पर सपा के हिस्से में एक सीट आ रही है और मायावती भी कांग्रेस-सपा की बैसाखी पर राज्यसभा में एक कुर्सी बनाए रखने की कवायद में जुटी हुई हैं. 

राज्यसभा चुनाव : BSP को झटका, मुख्तार अंसारी के वोट डालने पर कोर्ट ने लगाई रोक
हत्या के मामले में जेल में बंद विधायक राज्यसभा में वोट नहीं डाल पाएंगे (फाइल फोटो)

नई दिल्ली : शुक्रवार को राज्यसभा की 58 सीटों पर होने जा रहे चुनाव बेहद दिलचस्प होते जा रहे हैं. खासकर उत्तर प्रदेश में 10 सीटों पर तो खूब घमासान मचा हुआ है. पहले यहां बीजेपी के खाते में 8 सीटें आ रही थीं. संख्याबल के आधार पर सपा के हिस्से में एक सीट आ रही है और मायावती भी कांग्रेस-सपा की बैसाखी पर राज्यसभा में एक कुर्सी बनाए रखने की कवायद में जुटी हुई हैं. लेकिन मायावती की कोशिशों को लगातार झटके लग रहे हैं. जेल में बंद बीएसपी के बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी के राज्यसभा चुनाव में वोट देने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है. 

बीएसपी को नुकसान
स्थानीय कोर्ट ने 20 मार्च को मुख्तार अंसारी को वोट डालने की इजाजत दी थी. इस पर राज्य की योगी सरकार ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. हाईकोर्ट ने सरकार के पक्ष में फैसला सुनाते हुए मुख्तार अंसारी के वोट डालने पर रोक लगा दी है. अंसारी एक हत्या के मामले में जेल की सजा काट रहे हैं. इसके अलावा समाजवादी पार्टी के जेल में बंद विधायक हरिओम यादव के वोट डालने पर भी स्थानीय प्रशासन ने रोक लगा दी है.

इस तरह मायावती को सीधे-सीधे दो वोटों का नुकसान होता दिखाई दे रहा है. इसके अलावा सपा छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए सपा सांसद नरेश अग्रवाल ने कहा था कि उनके विधायक बेटे नितिन अग्रवाल बीजेपी के पक्ष में वोट डालेंगे. 21 मार्च, बुधवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा बुलाए भोज में नितिन अग्रवाल भी शामिल हुए थे. दूसरी तरफ निषाद पार्टी के महासचिव और ज्ञानपुर से विधायक विजय मिश्र ने बीजेपी को वोट देने की बात कही है.

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कोर्ट के इस कदम से बीजेपी के 9वें उम्मीदवार और बीएसपी के उम्मीदवार के बीच पेंच फंस गया है. बीएसपी ने अपने पूर्व विधायक भीमराव अंबेडकर को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया है. इतना ही नहीं राज्यसभा में समर्थन के लिए मायावती ने समाजलवादी पार्टी से एक करार भी किया है. इसी करार की बदौलत यूपी में लोकसभा की दो सीटों पर हुए उपचुनाव में सपा ने जीत हासिल की थी. 

क्या है वोटों का गणित
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा में एक उम्मीदवार को जिताने के लिए 37 विधायकों का समर्थन जरूरत है. प्रदेश की 403 सदस्यीय सपा के पास 47 सदस्य हैं. उसके पास अपनी उम्मीदवार जया बच्चन को चुनाव जिताने के बाद भी तकनीकी रूप से 10 वोट बच जाएंगे. बसपा के पास 19 वोट हैं जबकि कांग्रेस के पास सात और राष्ट्रीय लोकदल के पास एक वोट है. ऐसे में इन दलों का गठबंधन ही 10वें सदस्य को राज्यसभा भेज सकता है, मगर जरा सी भी गड़बड़ी सारा गणित बिगाड़ सकती है.

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जोड़तोड़ का खेल
बहरहाल, 324 विधायकों के संख्याबल के आधार पर आठ सीटें आराम से जीत सकने वाली भाजपा ने 10 सीटों के लिए 9 प्रत्याशी उतारे हैं, जो विपक्ष के लिए चिंता का सबब है, क्योंकि अगर ‘क्रास वोटिंग‘ हुई तो विपक्ष के लिए मुसीबत होगी. बीजेपी के आठ प्रत्‍याशियों के जीतने के बाद भी पार्टी के पास 28 वोट बच रहे हैं. ऐसे में पार्टी को अपने प्रत्‍याशी को जिताने के लिए नौ वोटों की दरकार है. इसलिए सत्‍ता पक्ष और विपक्ष के बीच जोड़-तोड़ का गेम शुरू हो चुका है.  

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बिगड़ सकता है BSP का खेल
बीएसपी के 19, कांग्रेस के 7 और आरएलडी के एक विधायक हैं. सबको जोड़ने पर 35 वोट होते हैं. इसमें अगर राजा भैया और विनोद सरोज का वोट जोड़ दें तो आंकड़ा 37 तक पहुंच जाता है. इस हिसाब से तो बीएसपी के उम्मीदवार भीमराव अंबेडकर की जीत तय है. लेकिन मुख्तार अंसारी वोट नहीं डालेंगे. नितिन अग्रवाल (सपा) बीजेपी के पाले में चले गए हैं. और सपा के एक अन्य विधायक के जेल में होने के कारण वह भी वोट नहीं डाल पाएंगे. इस तरह मायावती को सीधे-सीधे तीन वोटों का नुकसान हो रहा है. 

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ये हैं उम्‍मीदवार
बीजेपी ने राज्यसभा चुनाव के लिए वित्त मंत्री अरुण जेटली, डॉ. अशोक बाजपेयी, विजयपाल सिंह तोमर, सकलदीप राजभर, कांता कर्दम, डॉ. अनिल जैन, जीवीएल नरसिम्हा राव, अनिल कुमार अग्रवाल और हरनाथ सिंह यादव को अपना उम्मीदवार घोषित किया है. सपा ने जया बच्चन, जबकि बसपा ने भीमराव अंबेडकर को प्रत्याशी बनाया है.