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Lucknow News: राजधानी लखनऊ के बंथरा स्थित प्रसाद इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (Prasad Institute of Medical Sciences) के एमबीबीएस (MBBS) छात्रों का गुस्सा बुधवार को सातवें आसमान पर पहुंच गया. कॉलेज प्रशासन के तानाशाही रवैये और बदइंतजामी से परेशान सैकड़ों मेडिकल छात्रों ने सड़क पर उतरकर जोरदार प्रदर्शन किया और लखनऊ-कानपुर हाईवे को पूरी तरह जाम कर दिया. छात्रों के इस अचानक कदम से हाईवे पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा.
'हॉस्टल नहीं, जेल है कॉलेज' छात्रों ने लगाए आजादी के नारे
प्रदर्शन कर रहे छात्रों का आरोप है कि लाखों रुपये फीस वसूलने के बाद भी उन्हें कॉलेज परिसर में बंधक जैसी स्थिति में रखा जाता है. छात्रों ने कहा कि उन्हें परिसर से बाहर जाने की अनुमति नहीं मिलती. गंभीर पारिवारिक समस्याओं या जरूरी काम होने के बावजूद उन्हें घर जाने से रोका जाता है. इस मानसिक प्रताड़ना के विरोध में छात्रों ने 'हमें चाहिए आजादी' के नारे लगाते हुए सड़क पर धरना शुरू कर दिया.
सुविधाओं के नाम पर मिल रहा 'नरक'
छात्रों ने कॉलेज के हॉस्टल और मैनेजमेंट पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं, मेस में मिलने वाले खाने की गुणवत्ता बेहद खराब है और पीने के पानी की भी ठीक व्यवस्था नहीं है.नियमों के मुताबिक हॉस्टल के एक कमरे में केवल दो छात्रों को रखने का प्रावधान है, लेकिन यहाँ एक-एक कमरे में तीन-तीन छात्रों को ठंसा गया है. भारी-भरकम फीस देने के बावजूद इस भीषण गर्मी में छात्र बदहाल रहने को मजबूर हैं. पूरे परिसर और हॉस्टल में गंदगी का अंबार लगा रहता है.
'भविष्य बर्बाद करने की धमकी' और बदसलूकी का आरोप
छात्रों का यह भी कहना है कि जब भी वे इन समस्याओं के खिलाफ आवाज उठाते हैं, तो कॉलेज के कर्मचारी और मैनेजमेंट उनका करियर और भविष्य बर्बाद करने की धमकी देते हैं. इसके अलावा, छात्रों ने कॉलेज के डीन रतन श्रीवास्तव पर छात्राओं के साथ अभद्र और अमर्यादित भाषा का प्रयोग करने का बेहद गंभीर आरोप लगाया है.
प्रिंसिपल को बुलाने पर अड़े छात्र
हाईवे जाम और हंगामे की सूचना मिलते ही बंथरा थाना पुलिस और एसीपी कृष्णा नगर अभिषेक कुमार पाण्डेय भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे. अधिकारियों ने आक्रोशित छात्रों को समझाने-बुझाने और हाईवे से हटाने का काफी प्रयास किया. प्रदर्शनकारी छात्रों ने दोटूक कहा कि जब तक कॉलेज के जिम्मेदार एचआर (HR) और प्रिंसिपल खुद मौके पर आकर उनकी समस्याओं के समाधान का लिखित आश्वासन नहीं देते, तब तक वे अपना धरना और प्रदर्शन समाप्त नहीं करेंगे. अंतिम समाचार मिलने तक मौके पर तनाव और गतिरोध की स्थिति बनी हुई थी.