राष्ट्रमंडल संसदीय संघ भारत क्षेत्र का 7वां सम्मेलन आज से, ओम बिरला करेंगे उद्घाटन

उत्तर प्रदेश विधान सभा में आयोजित इस सम्मेलन के समापन सत्र को 17 जनवरी 2020 को उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल में संबोधित करेंगी. इस अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, उत्तर प्रदेश विधान सभा के अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित, उत्तर प्रदेश विधानमंडल के वर्तमान और पूर्व सदस्य और अन्य विशिष्टजन भी उपस्थित रहेंगे.

राष्ट्रमंडल संसदीय संघ भारत क्षेत्र का 7वां सम्मेलन आज से, ओम बिरला करेंगे उद्घाटन
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला लखनऊ में करेंगे उद्घाटन.

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में विधान सभा के मुख्य कक्ष में 16 जनवरी 2020 को दिन में 11 बजे लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला राष्ट्रमंडल संसदीय संघ भारत क्षेत्र के सातवें सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे. मध्य प्रदेश के राज्यपाल लालजी टंडन उद्घाटन सत्र में विशिष्ट सभा को संबोधित करेंगे. सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी शामिल होंगे.

उत्तर प्रदेश विधान सभा में आयोजित इस सम्मेलन के समापन सत्र को 17 जनवरी 2020 को उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल में संबोधित करेंगी. इस अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, उत्तर प्रदेश विधान सभा के अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित, उत्तर प्रदेश विधानमंडल के वर्तमान और पूर्व सदस्य और अन्य विशिष्टजन भी उपस्थित रहेंगे.

दो दिनों तक चलने वाले इस सम्मेलन के दौरान बजट प्रस्तावों की संवीक्षा के लिए जनप्रतिनिधियों की क्षमता बढ़ाने और जन प्रतिनिधियों का ध्यान विधायी कार्यों की ओर बढ़ाने जैसे दोनों विषयों पर चर्चा की जाएगी. राज्य सभा के उपसभापति हरिवंश पहले विषय पर चर्चा के दौरान मुख्य भाषण देंगे, जबकि केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी दूसरे विषय पर मुख्य भाषण देंगे.

पहला विषय अर्थात् 'बजट प्रस्तावों की संवीक्षा के लिए जनप्रतिनिधियों की क्षमता बढ़ाना' की बात करें तो विधानमंडलों द्वारा बजट प्रस्तावों की जांच किए जाने की जरूरत पर समय-समय पर बल दिया गया है. बजट सरकार का सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक नीति का साधन होता है और इसमें सरकार की प्राथमिकताओं का व्यापक ब्योरा होता है. जनता के प्रतिनिधि निकाय होने के नाते देश के विधानमंडल यह सुनिश्चित करने के लिए सही मायने में संवैधानिक संस्थाएं हैं कि बजट में देश की जरूरतों और लोगों की अपेक्षाओं तथा उपलब्ध संसाधनों के बीच सही तालमेल हो.
 
इसके अलावा, बजट प्रक्रिया में प्रभावी विधायी भागीदारी से रक्षोपाय सुनिश्चित होते हैं, जो पारदर्शी और जवाबदेह शासन के लिए जरूरी हैं और जो जन सेवाएं अच्छे ढंग से उपलब्ध कराना भी सुनिश्चित करते हैं. विधानमंडल बजट से जुड़े निर्णयों में संतुलित मत और सुझाव देने में भी मदद करते हैं और इस प्रकार कठिन बजट प्रक्रिया के संबंध में व्यापक सहमति बनाने के लिए एक मंच प्रदान करते हैं.

सम्मेलन में जिस दूसरे विषय अर्थात 'जन प्रतिनिधियों का ध्यान विधायी कार्यों की ओर बढ़ाना' पर विचार किया जाना है, वह भी आज के समय में बहुत प्रासंगिक है. ऐसा महसूस किया गया है कि जनप्रतिनिधियों की क्षमता बढ़ाना और विधायी कार्यों की ओर उनका ध्यान बढ़ाना, संसदीय लोकतन्त्र की सफलता के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. 

पहली बार जनप्रतिनिधि के रूप में निर्वाचित हुए सदस्यों को संसदीय प्रक्रियाओं, पद्धतियों, परिपाटियों, आचरण और परम्पराओं से परिचित कराने के लिए विधायी जानकारी दिया जाना बहुत जरूरी है. पारित किए जाने वाले क़ानूनों के बारे में ब्रीफिंग सत्र विधायी कार्यों की ओर जनप्रतिनिधियों का ध्यान बढ़ाने के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं. 

निरंतर बदल रही लोक नीति के सामने आने वाली चुनौतियों का सामना करने की जनप्रतिनिधियों की योग्यता बहुत हद तक आधिकारिक और विश्वसनीय जानकारी की उपलब्धता पर निर्भर करती है. जानकार और सशक्त जनप्रतिनिधि अपने निर्वाचनक्षेत्रों की जरूरतों और लोगों की इच्छाओं से अधिक परिचित होते हैं और विधानमंडलों में ये मामले उठाकर इनका समाधान कर सकते हैं. राष्ट्रमंडल संसदीय संघ (सीपीए) की उन राष्ट्रमंडल देशों के विधानमंडलों में 180 से अधिक शाखाएं  हैं, जहां संसदीय लोकतंत्र है. ये सभी शाखाएं भौगौलिक रूप से नौ राष्ट्रमंडल क्षेत्रों में बंटी हैं.

सीपीए भारत क्षेत्र, जो पहले सीपीए एशिया क्षेत्र का भाग था वो 7 सितंबर 2004 से एक स्वतंत्र क्षेत्र बन गया है. सीपीए भारत क्षेत्र में भारत केंद्र शाखा (भारत की संसद) और 30 राज्य/संघ राज्य क्षेत्र शाखाएं हैं. सीपीए भारत क्षेत्र के ऐसे सम्मेलनों का आयोजन दो वर्ष में एक बार किया जाता है. इसका छठा सम्मेलन वर्ष 2017 में पटना में हुआ था. सीपीए भारत क्षेत्र के सातवें सम्मेलन में लगभग 100 प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है और सीपीए के ऑस्ट्रेलिया क्षेत्र और साउथ ईस्ट एशिया क्षेत्र के क्षेत्रीय प्रतिनिधि भी सीपीए भारत क्षेत्र सम्मेलन में भाग लेंगे. ये एक बड़ा आयोजन है जो लोकतांत्रिक देशों की विधायी प्रक्रिया को मजबूत बनाएगा.

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