योगी आदित्यनाथ के इस आदेश से विधान परिषद चुनाव पर दिखेगा असर

प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक आदेश जारी किया है, जिसके बाद जेलों में बंद माननीय विधायक अब विधानसभा सत्र के दौरान सदन की कार्यवाही में हिस्सा नहीं ले पाएंगे. 

योगी आदित्यनाथ के इस आदेश से विधान परिषद चुनाव पर दिखेगा असर
यूपी सरकार के शासनादेश के मुताबिक, जेलों में बंद माननीय विधायक अब विधानसभा सत्र के दौरान सदन की कार्यवाही में हिस्सा नहीं ले पाएंगे. (फाइल फोटो)

लखनऊ: प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक आदेश जारी किया है, जिसके बाद जेलों में बंद माननीय विधायक अब विधानसभा सत्र के दौरान सदन की कार्यवाही में हिस्सा नहीं ले पाएंगे. दरअसल, योगी सरकार ने एक शासनादेश जारी कर सभी जिले के अभियोजन अधिकारियों को कहा है कि, अगर कोई विधायक जेल में बंद है और सदन की कार्यवाही में हिस्सा लेने को लेकर अप्लीकेशन दायर करता है तो इस तरह के अप्लीकेशन पर विधिक प्रतिरोध (लीगल डिफेंस) लगाए जाएं. सरकार के इस शासनादेश के जारी होने के बाद विपक्ष हमलावर हो गया है. इस शासनादेश को लेकर समाजवादी पार्टी ने कहा कि यह एक राजनीतिक साजिश है.

सपा ने कहा विपक्षी विधायकों को रोकने की साजिश
समाजवादी MLC राजपाल कश्यप ने कहा कि जिस तरह से राज्यसभा चुनावों में एसपी और बीएसपी के विधायकों को वोट डालने से रोका गया, उसी तरह की साजिश अब विधान परिषद चुनावों में विपक्षी दलों के जनप्रतिनिधियों को रोकने के लिए किया है. विपक्षी दल के जनप्रतिनिधि वोट में शामिल ना हो पाएं, इसलिए सरकार ने इस तरह का आदेश जारी किया है. वही, बीजेपी का कहना है कि सरकार के इस कदम का तो सभी को स्वागत करना चाहिए. समाजवादी पार्टी के MLC ने इस शासनादेश को लेकर कहा कि चुनाव से पहले बीजेपी ज्यादातर विपक्षी जनप्रतिनिधियों को जेल में डलवा देगी. शासनादेश पहले ही लागू किया जा चुका है. ऐसे में जेल जाने के बाद ज्यादातर विपक्षी जनप्रतिनिधि वोट नहीं कर पाएंगे. सपा ने कहा कि बीजेपी विपक्षी विधायकों को वोट डालने के अधिकार से रोकने की कोशिश कर रही है.

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13 विधान परिषद सीटों पर होने वाले हैं चुनाव
बता दें, आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की 13 सीटों पर चुनाव होने हैं. 5 मई को 12 विधान परिषद सदस्यों का कार्यकाल पूरा होने वाला है, जबकि एक सीट पहले से खाली है. 12 में से समाजवादी के 7 सदस्यों का कार्यकाल पूरा हो रहा है. इन 7 सदस्यों में खुद अखिलेश यादव और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम शामिल हैं. इनके अलावा बहुजन समाज पार्टी के विजय प्रताप सिंह और सुनील कुमार चित्तौड़ का कार्यकाल पूरा हो रहा है. बीजेपी के दो मोहसिन रजा और महेंद्र कुमार का भी कार्यकाल पूरा हो रहा है.

38 सदस्य विधायकों द्वारा चुने जाते हैं
उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की कुल 100 सीटें हैं, जिनमें से विधानसभा सदस्यों द्वार 38 सदस्य चुने जाते हैं. 36 विधान परिषद सदस्यों का चयन स्थानीय निकाय द्वारा होती है. 8 सदस्यों का चयन शिक्षकों द्वारा और 8 सदस्यों का चयन स्नातकों द्वारा होता है. 10 MLC मनोनीत किए जाते हैं. जिन 12 विधान परिषद सदस्यों का चयन विधायकों द्वारा होगा उनमें हर किसी को 31 वोटों की जरूरत होगी. 

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राज्यसभा की तरह विधान परिषद चुनाव में भी एक सीट के लिए होगी जंग
बीजेपी गठबंधन के पास कुल 324 विधायक हैं. अन्य छोटे दलों के साथ समर्थन के बाद यह आंकड़ा 331 तक पहुंचेगा. 10 विधान परिषद सदस्यों का चुना जाना तो तय है. बीजेपी 11वें सदस्य के लिए पुरजोर कोशिश करेगी. बात अगर सपा, बसपा और कांग्रेस की करें तो दो सीटें आसानी से जीत लेगी. इसके अलावा इनके पास 9 वोट बचेंगे. ऐसे में सपा, बसपा और कांग्रेस मिलकर तीसरे सदस्य के लिए कोशिश करेंगे. ऐसा होने पर यह चुनाव भी राज्यसभा चुनाव की तरह दिलचस्प हो जाएगा.