नोएडा: अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन को नहीं ट्रांसफर होगा सुपरटेक केपटाउन सोसायटी के मैनेजमेंट का काम

बिल्डर को कहा गया था कि सुपरटेक केपटाउन हाउसिंग सोसायटी का रख-रखाव, मैनेजमेंट और तमाम दूसरे कामकाज अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन को 1 सितंबर तक स्थानांतरित कर दिए जाएं. लेकिन अब अदालत ने सोसायटी में यथास्थिति बनाए रखने का आदेश पारित किया है.

नोएडा: अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन को नहीं ट्रांसफर होगा सुपरटेक केपटाउन सोसायटी के मैनेजमेंट का काम
सुपरटेक केपटाउन सोसायटी में AOA को कार्यभार देने के मुद्दे पर कई महीनों से घमासान चल रहा है.

गौतमबुद्ध नगर: नोएडा की सबसे बड़ी हाउसिंग सोसायटी सुपरटेक केपटाउन में अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन (AOA) से जुड़ा विवाद गहराता जा रहा है. नोएडा की मुख्य कार्यपालक अधिकारी रितु माहेश्वरी के आदेश पर सुपरटेक बिल्डर का मैनेजमेंट जिला न्यायालय से स्थगन आदेश ले आया है. दरअसल, मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने 27 अगस्त को एक आदेश जारी किया था, जिसमें बिल्डर को कहा गया था कि सुपरटेक केपटाउन हाउसिंग सोसायटी का रख-रखाव, मैनेजमेंट और तमाम दूसरे कामकाज अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन को 1 सितंबर तक स्थानांतरित कर दिए जाएं. लेकिन अब अदालत ने सोसायटी में यथास्थिति बनाए रखने का आदेश पारित किया है.

बता दें कि सुपरटेक केपटाउन सोसायटी में AOA को कार्यभार देने के मुद्दे पर कई महीनों से घमासान चल रहा है. सोसाइटी में निर्वाचित AOA के प्रतिनिधि मामले को लेकर नोएडा विकास प्राधिकरण की CEO रितु माहेश्वरी के सामने गए थे. उत्तर प्रदेश अपार्टमेंट एक्ट के तहत याचिका पर सुनवाई करते हुए रितु माहेश्वरी ने 27 अगस्त को अपना फैसला दिया था. रितु माहेश्वरी ने अपने आदेश में कहा था कि बिल्डर सोसायटी का पूरा कामकाज 1 सितंबर से अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन को सौंप दें. साथ ही अभी तक सोसायटी में रहने वाले आवंटियों से विकास कार्यों के नाम पर वसूली गई धनराशि को एसोसिएशन के बैंक खाते में ट्रांसफर किया जाए.

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आदेश में कहा गया कि सोसाइटी में बेसमेंट पार्किंग और दूसरी सुविधाओं की देखरेख एसोसिएशन करेगी. बिल्डर ने आवंटी से जितने भी चार्ज वसूल किए हैं, वह सब एसोसिएशन के खाते में ट्रांसफर किए जाएंगे. नोएडा की सीईओ ने वॉटर कनेक्शन और विकास प्राधिकरण से जुड़ी मूलभूत सुविधाओं के लिए वसूले गए शुल्क प्राधिकरण के संबंधित विभागों में जमा करने का आदेश बिल्डर को दिया था. लेकिन अब इस आदेश के खिलाफ डिस्ट्रिक्ट सिविल कोर्ट ने स्थगन आदेश दिया है. सोसायटी में यथास्थिति बनाए रखने की बात कही है. बिल्डर की ओर से कोर्ट का आदेश नोएडा विकास प्राधिकरण और अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों को भेज दिया गया है.

बता दें कि सोसाइटी की अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन का कार्यकाल पूरा हो चुका है. इस एसोसिएशन को अब सोसायटी प्रबंधन का अधिकार नहीं है. अभी इस मामले में अदालत सुनवाई कर अंतिम आदेश जारी करेगी.

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