राफेल डील: मायावती बोलीं, 'झूठ बोलकर गुमराह करने के लिए पीएम मोदी मांगे माफी'

14 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की शुरुआती आपत्तियों (गोपनीयता, विशेषाधिकार, राष्ट्रीय सुरक्षा) पर आदेश सुरक्षित रख लिया था. 

राफेल डील: मायावती बोलीं, 'झूठ बोलकर गुमराह करने के लिए पीएम मोदी मांगे माफी'
बसपा सुप्रीमो मायावती ने ट्वीट कर बीजेपी पर निशाना साधा.

नई दिल्ली: राफेल डील मामले में केंद्र की मोदी सरकार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की उस आपत्ति को खारिज कर दिया है, जिसमें गोपनीय दस्तावेजों के आधार पर पुनर्विचार खारिज करने की मांग की गई थी. कोर्ट के आदेश के बसपा सुप्रीमो मायावती ने ट्वीट कर कहा कि संसद के भीतर व बाहर बार-बार झूठ बोलकर देश को गुमराह करने के लिए पीएम मोदी माफी मांगे व रक्षा मंत्री इस्तीफा दें.

ये किया ट्वीट
मायावती ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तुरंत बाद अपने ट्विटर अकाउंट पर एक ट्वीट किया, उन्होंने लिखा, राष्ट्रीय सुरक्षा की आड़ में राफेल रक्षा सौदे में भारी गड़बड़ी/भ्रष्टाचार को छिपाने की पीएम मोदी सरकार की कोशिश विफल. सुप्रीम कोर्ट में बीजेपी सरकार पूरी तरह घिरी है. संसद के भीतर व बाहर बार-बार झूठ बोलकर देश को गुमराह करने के लिए पीएम मोदी माफी मांगे व रक्षा मंत्री इस्तीफा दें. 

 

14 मार्च को आदेश रखा था सुरक्षित
14 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की शुरुआती आपत्तियों (गोपनीयता, विशेषाधिकार, राष्ट्रीय सुरक्षा) पर आदेश सुरक्षित रख लिया था. इससे पहले केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में नया हलफनामा दाखिल कर कहा था कि केंद्र सरकार की बिना मंजूरी के संवेदनशील दस्तावेजों की फोटोकॉपी की गई. इन दस्तावेजों की अनाधिकृत फोटो कॉपी के जरिए की गई चोरी ने देश की सुरक्षा, सम्प्रभुता और दूसरे देशों के साथ दोस्ताना सम्बधों को बुरी तरह प्रभावित किया है. केंद्र ने कहा था कि पुनर्विचार याचिका के साथ सलग्न दस्तावेज एयरक्राफ्ट की युद्ध क्षमता से जुड़े है.

इन्होंने लगाई है याचिका
दरअसल याचिकाकर्ता पूर्व केन्द्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा, अरूण शौरी और वकील प्रशांत भूषण ने राफ़ेल डील में धांधली साबित करने के लिए सबूतों के तौर पर रफाल डील से जुड़े कई दस्तावेजों की फोटोकॉपी सुप्रीमकोर्ट में चीफ जस्टिस के सामने दायर पुनर्विचार याचिका में लगाई. 

याचिकाकर्ता ने क्या कहा
याचिकाकर्ता का कहना है कि किसी धांधली व भ्रष्टाचार को उजागर करने के लिए कोई कागज किसी भी तरीके से हासिल कर उसे कोर्ट के सामने रखा जाता है, तो भ्रष्टाचार साबित करने की मांग को देखते हुए अदालत को उनपर भी गौर करना चाहिए साथ ही याचिकाकर्ताओं ने कहा कि किसी विभाग में धांधली पकड़वाने के लिए गोपनीय तरीके से सबूत देने वाले विहसल ब्लोवर की पहचान और सबूत जुटाने का तरीका कानून में पूछने का अधिकार किसी के पास नहीं है, उदाहरण के तौर पर कोयला घोटाला, 2G घोटाला और सीबीआई के पूर्व निदेशक रंजीत कुमार के डायरी केस का हवाला दिया. याचिकाकर्ता ने कहा कि इन मामलों में भी सुप्रीम कोर्ट ने इसी तरह अदालत में पेश किए गए कागजातों को मानते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कोयला घोटाले में, टू जी घोटाले में जांच का आदेश देकर भ्रष्टाचारियों पर कारवाई की और रंजीत कुमार के खिलाफ जांत का आदेश दिया था, जिसकी जांच चल रही है, इसी तरह रफाल डील मामले में भी सुप्रीम कोर्ट पुनर्विचार याचिका के साथ लगे कागजों को सबूत मानते हुए आगे सुनवाई करें.

इनपुट- महेश शर्मा