UP:सरकारी अस्पतालों में बड़ी लापरवाही, बिना एक्सपायरी हुए ही कूड़ेदान में फेंकी जा रही दवाइयां

जौनपुर और गोंडा जिले से दवाइयों को कूड़े के ढेर में फेंके जाने का मामला सामने आया है.

UP:सरकारी अस्पतालों में बड़ी लापरवाही, बिना एक्सपायरी हुए ही कूड़ेदान में फेंकी जा रही दवाइयां
कूड़ेदान में फेंकी जा रही दवाइयां

लखनऊ: प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए मुफ्त में गरीबों का इलाज कर रही है. वहीं दूसरी तरफ लापरवाह अधिकारी और कर्मचारी 3 साल बाद एक्सपायरी होने वाली दवा को कूड़े के ढेर में फेंक रहे हैं. प्रदेश के जौनपुर और गोंडा जिले से दवाइयों को फेंके जाने का मामला सामने आया है.

जौनपुर जिले के सुइथाकला सीएचसी में बच्चों को गम्भीर रोगों से बचाने वाली दवाइयां झाड़ में फेंकी पाई गई हैं. बच्चों को एनीमिया रोग से बचाने के लिए प्राथमिक स्कूलों और आंगनबाड़ी सेंटरों पर फोलिक एसिड नाम की दवा उपलब्ध करवाई जाती है. लेकिन सोशल मीडिया पर इन दवाओं को फेंके जाने का वीडियो वायरल हो रहा है.जब यह मामला स्वास्थ्य विभाग तक पहुंचा तो, हड़कंप मच गया.

मुख्य चिकित्साधिकारी रामजी पाण्डेय ने अपने विभाग का बचाव करते हुए सारा ठीकरा शिक्षा विभाग और आगंनबाड़ी पर फोड़ दिया. उन्होंने कहा कि जहां पर दवाएं मिली है वहां पर चल रहे अस्पताल को बंद करके नये भवन में स्थातंरित कर दिया गया है. उन्होंने कहा कि यह दवाएं मेरे विभाग द्वारा प्राथमिक स्कूलों और आंगनबाड़ी केन्द्रों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को खिलाने के लिए बांटी जाती है. हो सकता उस समय किसी आंगनबाड़ी सेंटर की दवाएं छूट गई हो. फिलहाल पूरे मामले की जांच की जा रही है.

जौनपुर जिले की तरह गोंडा में भी दवाइयों को फेंके जाने का मामला सामने आया है. हलधरमऊ समुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर मुख्य चिकित्सा अधीक्षक की लापरवाही के चलते इंजेक्शन और कई प्रकार की दवाएं कूड़े के ढेर में फेंकी गई हैं. साथ ही खसरा से संबंधित पत्र भी कूड़े के ढेर में मिले हैं.

गोंडा में इस पूरे मामले पर स्वास्थ्य विभाग का कोई अधिकारी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है. लेकिन इस मामले के सामने आने के बाद अधिकारी और कर्मचारियों की असंवेदनशीलता और लापरवाही उजागर हो रही है.

( गोंडा से अंबकेश्वर, जौनपुर से अजीत सिंह की रिपोर्ट)