कोरोना से 100 दिन लंबी जंग: ऑक्सीजन लेवल 30 से भी नीचे था, लेकिन नहीं मानी हार, अब कर रहीं घरवापसी

अर्चना देवी के बेटे पुनीत ने बताया कि जब उसने 21 अप्रैल को अपनी मां को लाला लाजपत राय मेडिकल कॉलेज में एडमिट कराया तो उनका ऑक्सीजन सैचुरेशन 30% था. फेफड़े बुरी तरह से संक्रमित हो चुके थे. सांस लेने में भारी दिक्कत थी...

कोरोना से 100 दिन लंबी जंग: ऑक्सीजन लेवल 30 से भी नीचे था, लेकिन नहीं मानी हार, अब कर रहीं घरवापसी

मेरठ: यूपी के मेरठ से एक अजीब लेकिन खुश कर देने वाला मामला सामने आ रहा. यहां पर लालालाजपत राय मेडिकल कॉलेज में एक महिला 100 से ज्यादा दिन तक कोरोनावायरस से ग्रसित रही. लेकिन अब आखिरकार इस जंग में उसने कोरोना को मात दे ही दी. मरीज अर्चना देवी करीब 3 महीने बाद डिस्चार्ज होकर घरवापसी कर रही है. उनके बच्चों की खुशी का ठिकाना नहीं है.

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डायरेक्ट ICU में किया गया था भर्ती
मेरठ की रहने वाली अर्चना देवी कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बाद 21 अप्रैल को अस्पताल में भर्ती हुई थीं. बेहोशी की हालत में अर्चना देवी को अस्पताल में भर्ती कराया गया. तब उनकी हालत बेहद गंभीर थी. ऐसे में अर्चना देवी को तत्काल रूप से आईसीयू में एडिमिट किया गया. डॉक्टरों की देखरेख में इलाज शुरु हुआ, लेकिन कभी हालत में सुधार आ रहा था तो कभी तबीयत फिर खराब हो रही थी. ऐसे में 100 दिन तक वह अस्पताल में भर्ती रहीम और अब उनको डिस्चार्ज किया गया.

ऑक्सीजन सैचुरेशन 30% था, जब हुईं एडमिट
अर्चना देवी के बेटे पुनीत ने बताया कि जब उसने 21 अप्रैल को अपनी मां को लाला लाजपत राय मेडिकल कॉलेज में एडमिट कराया तो उनका ऑक्सीजन सैचुरेशन 30% था. फेफड़े बुरी तरह से संक्रमित हो चुके थे. सांस लेने में भारी दिक्कत थी. इसलिए उन्हें ढाई महीने तक बाईपैप पर रखा गया. कोविड प्रोटोकॉल के तहत इलाज भी किया गया, जिसके बाद धीरे-धीरे उनकी तबीयत में सुधार हुआ.

स्थिति बुरी थी, लेकिन हिम्मत नहीं हारी
बेटे पुनीत कुमार ने बताया कि वॉर्ड में आने वाले लगभग हर मरीज की कुछ हफ्तों में मौत हो रही थी. एक समय ऐसा भी आया जब अस्पताल में ऑक्सीजन नहीं थी, लेकिन फिर भी हमने हिम्मत नहीं हारी और हम डटे रहे. पुनीत ने बताया कि किस तरीके से ये सब किया, किस हालात में अर्चना देवी को मवाना से मेरठ अस्पताल लाया गया. अर्चना का ऑक्सीजन लेवल 30 से भी कम था. उनकी धड़कनें तेज चल रही थीं और बुखार भी था. वह बेहोश हो रही थीं. पुनीत खुद एक पैरामेडिकल स्टूडेंट भी रह चुके हैं. 

नर्सिंग स्टाफ न होने की वजह से खुद करनी थी देखभाल
इस दौरान अस्पताल में उनकी माताजी को भर्ती कराया गया था. उस समय अस्पताल में एक भी नर्सिंग स्टाफ मौजूद नहीं था. डॉक्टर ने साफ तौर पर कहा कि आप ऑक्सीजन, बेड सब कुछ ले लीजिए, लेकिन आपको खुद देखरेख करनी होगी. डॉक्टर्स लगातार पुनीत से संपर्क में रहे और व्हाट्सएप के जरिए डॉक्टरों ने उनको दवाइयां बताईं. पुनीत ने पूरी मेहनत से दवाइयां समय पर दीं और डॉक्टर के किये अनुसार उनकी लगातार एक्सरसाइज करवाई. इसका नतीजा यह रहा कि 100 दिन बाद उनकी मां बिल्कुल ठीक हो गईं हैं और अब घर आ रही हैं. बस अभी थोड़ी खांसी की दिक्कत है. वह भी जल्द दूर हो जाएगी.

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