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मुरादाबाद की हवा हुई 'जहरीली', खतरनाक स्तर पर पहुंचा एयर क्वालिटी इंडेक्स

पीतल नगरी के नाम से दुनिया में मशहूर मुरादाबाद आजकल प्रदूषण की मार से जूझ रहा है. एयर क्वालिटी इंडेक्स के आंकड़ों पर गौर करें तो मुरादाबाद देश के पांच सबसे प्रदूषित शहरों में बना हुआ है.

मुरादाबाद की हवा हुई 'जहरीली', खतरनाक स्तर पर पहुंचा एयर क्वालिटी इंडेक्स
(फाइल फोटो)

मुरादाबादः पीतल नगरी के नाम से दुनिया में मशहूर मुरादाबाद आजकल प्रदूषण की मार से जूझ रहा है. एयर क्वालिटी इंडेक्स के आंकड़ों पर गौर करें तो मुरादाबाद देश के पांच सबसे प्रदूषित शहरों में बना हुआ है और यहां प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्तर को पार कर चुका है. दशहरे के बाद से वायु प्रदूषण के बढ़ने का जो सिलसिला जारी हुआ है. वह दीपावली के बाद कई गुना ज्यादा हो गया है. मुरादाबाद के जिला अस्पताल के आंकड़ों के मुताबिक प्रदूषण से बीमार होने के चलते अस्थमा और फेफड़ों के रोगों की तादाद 20 फीसदी बढ़ गई है.

एयर क्वालिटी इंडेक्स के आंकड़ों के मुताबिक मुरादाबाद आये दिन देश के पांच से 10 सबसे प्रदूषित शहरों में एक रहता है. दीपावली के दूसरे दिन प्रदूषित हवा के मामले में यह शहर देश में पहले नंबर पर था. एयर क्वालिटी इंडेक्स में 400 से ज्यादा का आंकड़ा मनुष्य के लिए स्वास्थ्य के लिए खतरनाक माना जाता है और मुरादाबाद इस आंकड़े को पार कर चुका है. खराब हवा का असर अब आम लोगों पर भी नजर आने लगा है. जिला अस्पताल में हर रोज 3000 से ज्यादा मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं.

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मौसम में बदलाव और प्रदूषण की दोहरी मार ने जहां अस्थमा, दमा, फेफड़ों, की बीमारी और सांस लेने की दिक्कत लोगों को महसूस हो रही है. वहीं छोटे बच्चे भी बड़ी तादाद में बीमार हो रहे हैं. जिला अस्पताल के आंकड़ों के मुताबिक सामान्य दिनों के मुकाबले दीपावली के बाद 20 से 30 फीसदी मरीज बढ़ गए हैं. प्रदूषण की मार से बीमार मरीजों की तादाद इसमें 80 फ़ीसदी से ज्यादा है. बच्चों को जहां खराब वायु से सांस लेने में दिक्कत और एलर्जी की समस्या हो रही है.

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वहीं बुजुर्गों में पहले से मौजूद बीमारियों के लक्षण ज्यादा तेजी से उबर रहे हैं.एयर क्वालिटी इंडेक्स के आंकड़ों के बाद अस्पताल प्रशासन ने सीनियर डॉक्टरों की ड्यूटी को आपातकालीन सेवाओं की ड्यूटी में लगाया गया है. ओपीडी में इलाज के लिए आने वाले मरीजों के अतिरिक्त जिला अस्पताल में सैकड़ों मरीज भर्ती हैं. जबकि निजी अस्पतालों में भी तादाद बढ़ी है.