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मां की मौत के सदमे से गई बेटे की जान, मुखाग्नि देने के बाद कह दिया दुनिया को अलविदा

मुरादाबाद की बिलारी तहसील क्षेत्र के ग्राम अमरपुर काशी मार्ग के खाता गांव में करीब 84 वर्षीय वृद्धा मां को मुखाग्नि देने के बाद उनका एकमात्र बेटा विजेंद्र भी अचानक नीचे गिर पड़ा और कुछ ही देर बाद उसकी भी मौत हो गई. 

मां की मौत के सदमे से गई बेटे की जान, मुखाग्नि देने के बाद कह दिया दुनिया को अलविदा
(सांकेतिक तस्वीर)

दीपचंद्र जोशी, मुरादाबादः मुरादाबाद की बिलारी तहसील क्षेत्र के ग्राम अमरपुर काशी मार्ग के खाता गांव में करीब 84 वर्षीय वृद्धा मां को मुखाग्नि देने के बाद उनका एकमात्र बेटा विजेंद्र भी अचानक नीचे गिर पड़ा और कुछ ही देर बाद उसकी भी मौत हो गई. लोगों के मुताबिक, बेटा मां की मौत का सदमा बर्दाश्त नहीं कर सका, जिसके चलते उसकी मौत हो गई. मिली जानकारी के मुताबिक अपनी मां  को मुखाग्नि देने के बाद बेटा मां की चिता के पास गिर गया और गिरते ही उसे खून की उल्टी होने लगी, इससे पहले कि लोग किसी चिकित्सक को दिखाते, उसकी मौत हो गई.

मां की चिता के बराबर में ही श्मशान में ही उसकी  चिता तैयार की गई. धार्मिक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद मां की चिता के बराबर में उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया. जिसके बाद उसे उसके बेटे जगत सिंह ने मुखाग्नि दी. दो चिताओं को एक साथ जलते देख उपस्थित लोगों की आंखें नम हो गईं. विजेंद्र की मौत के बाद गांव में मातम पसरा है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया है.

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जानकारी के अनुसार करीब 84 वर्षीय रामकली के पति रतन लाल का करीब 48 वर्ष पहले निधन हो गया था. उनकी एकमात्र संतान विजेंदर था. उसकी आयु उस समय लगभग 7 वर्ष की थी. रामकली ने उसे बड़ी मुसीबतों से पाल पोस कर बड़ा किया. मां बेटे में बहुत ही प्रेम था. बेटा मां पर जान कुर्बान करने को तैयार रहता था, लेकिन रामकली को कभी परेशानी नहीं होने दी, दोनों का प्रेम भाव गांव में एक मिसाल बना हुआ था.

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बताते हैं कि विजेंदर जब तक खाना नहीं खाता था, तब तक मां भोजन नहीं करती थी. विजेंदर के तीन बेटे हैं जगत सिंह, आशाराम और मेघनाथ. मां की मौत के बाद जैसे ही विजेंद्र ने अपनी मां को मुखाग्नि दी वह एकदम नीचे गिर पड़ा. श्मशान में पहले से ही काफी भीड़ थी. विजेंदर की मौत की खबर गांव पहुंची तो बड़ी संख्या में महिलाएं पुरुष और बच्चे श्मशान पहुंच गए. विजेंदर की अचानक मौत से सभी को दुख है.