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यहां औरंगजेब के जमाने से लग रहा है गधों का ऐतिहासिक मेला, पढ़िए पूरी खबर

चित्रकूट नगर पंचायत द्वारा हर साल दीपावली के मौके पर गधा मेले का आयोजन मंदाकिनी नदी के किनारे पड़े मैदान में किया जाता है. 

यहां औरंगजेब के जमाने से लग रहा है गधों का ऐतिहासिक मेला, पढ़िए पूरी खबर
नगर पंचायत चित्रकूट को गधा मेले से हर वर्ष लाखों का राजस्व मिलता है.

ओंकार सिंह/चित्रकूट: आपने मेले तो बहुत देखे और सुने होंगे. लेकिन, गधों का मेला शायद ही कहीं देखा हो. लेकिन, धार्मिक नगरी चित्रकूट में गधों का ऐतिहासिक मेला लगता है. दीपावली के दूसरे दिन चित्रकूट में गधों का ये मेला औरंगजेब के जमाने से लगता चला आ रहा है. यहां दूर-दूर से गधों के व्यापारी अपने पशु लेकर आते हैं. हालांकि, अब इस ऐतिहासिक मेले की लगातार अनदेखी किये जाने से जानवरों का यह मेला सिमटता जा रहा है.

चित्रकूट में दीपावली के दूसरे दिन लगने वाले गधा बाजार में हजारों की संख्या में गधों और खच्चरों का मेला लगाता है. इसकी बाकायदा नगर पंचायत व्यवस्था करता है. मेले में  देश के कोने-कोने से गधा व्यापारी अपने पशुओं के साथ आते हैं. गधों के इस​ऐतिहासिक मेले में लाखों का व्यापार होता है. कहा जाता है कि इस मेले की परंपरा मुगल बादशाह औरंगजेब ने शुरू की थी. औरंगजेब ने चित्रकूट के इसी मेले से अपनी सेना के बेड़े में गधों और खच्चरों को शामिल किया था. 

चित्रकूट में लगने वाले गधा बाजार में आने वाले व्यापारियों को कभी घाटा तो कभी मुनाफा लगता है. व्यापारियों की मानें, तो गधों की यहां पर अच्छी खासी कीमत मिलती है. चित्रकूट नगर पंचायत द्वारा हर साल दीपावली के मौके पर गधा मेले का आयोजन मंदाकिनी नदी के किनारे पड़े मैदान में किया जाता है. इसके एवज में गधा व्यापारियों से बाकायदा राजस्व वसूला जाता है. नगर पंचायत चित्रकूट को गधा मेले से हर वर्ष लाखों का राजस्व मिलता है. वहीं, मंदाकिनी नदी के तट पर लगने वाले इस ऐतिहासिक गधा मेले मे कम होती व्यापारियों की संख्या से अब इस मेले का अस्तित्व खतरे में दिखाई दे रहा है. यदि गधा मेले की अनदेखी इसी तरह से की जाती रही, तो यहां मेला खत्म होने में बहुत समय नहीं लगेगा.