ये हैं UP की 'मलाला', अब तक 2500 से ज्यादा महिलाओं को कर चुकी हैं शिक्षित

2015 में जिलाधिकारी जौनपुर ने महिला साक्षरता और सुरक्षा के लिए मुन्नी बेगम को ‘मैं भी मलाला हूं’ पुरस्कार से नवाजा था.

ये हैं UP की 'मलाला', अब तक 2500 से ज्यादा महिलाओं को कर चुकी हैं शिक्षित

जौनपुर: पढ़ने-लिखने की कोई उम्र नही होती, इस बात की मिसाल बनी हैं जौनपुर की मुन्नी बेगम. मुन्नी बेगम वो नाम है, जो आज किसी परिचय का मोहताज नही है. उन्हें कभी स्कूल जाने मौका नहीं दिया गया, बावजूद इसके मुन्नी आज कई अन्य औरतों को शिक्षित करने का काम कर रही हैं. दरअसल, 12 साल की छोटी सी उम्र में ही उनकी शादी रामनाथ हटिया गांव में कर दी गई थी. उनके पति गुजरात में नौकरी करते थे. अपने पति तक अपनी बात पहुंचाने के लिए उन्हें खत का सहारा लेना पड़ता था. अनपढ़ होने के कारण न तो मुन्नी खत पढ़ पाती थी और न ही उसके जवाब में खत लिख पाती थीं. जिसके लिए मुन्नी को दूसरे व्यक्ति से खत लिखवाना और पढ़वाना पड़ता था. इन सबके चलते मुन्नी अपने दिल की बात नही लिख पाती थी.  

इसके बाद मुन्नी ने पढ़ने-लिखने का फैसला लिया और घर के बाहर पड़े मिट्टी और कोयले से बच्चों की फेकी गई रफ कॉपियों पर अभ्यास करना शुरू कर दिया. यहीं से उनकी पढ़ाई-लिखाई का सिलसिला शुरू हो गया. इसके बाद प्राइमरी फिर जूनियर हाई स्कूल में प्रवेश लेकर आगे की शिक्षा शुरू की. वह सिर्फ इतने पर ही नहीं रुकीं, उन्होंने 1997 में हाईस्कूल, 1999 मे इण्टरमीडिएट, 2004 में बीए, 2017 में एमए की परीक्षा पास की.

पति की बीमारी के बाद 1994 में जब घर चलाना मुश्किल हो गया तो, मुन्नी बेगम ने महाराजगंज स्थित एक प्राइवेट स्कूल में 500 रुपये महीने की तनख्वाह पर पढ़ाना शुरू कर दिया. उस वक्त उनका परिवार एक झोपड़ी में रहता था और बमुश्किल एक वक्त की रोटी ही परिवार को नसीब हो पाती थी. साल 2000 के त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में उनका भाग्य थोड़ा चमका और वो अपना दल के समर्थन से वार्ड नंबर 27 से जिला पंचायत सदस्य चुनी गईं और उनकी सामाजिक सक्रियता काफी बढ़ गई.

मुन्नी बेगम के द्वारा अब तक लगभग 2500 से ज्यादा महिलाएं शिक्षित हो चुकी है. उन्हें 2015 में जिलाधिकारी जौनपुर भानुचंद्र गोस्वामी ने महिला साक्षरता और सुरक्षा के लिए ‘मैं भी मलाला हूं’ पुरस्कार से नवाजा गया. साथ ही महिला सशक्तिकरण और साक्षरता अभियान के लिए उनकी ओर से किये जा रहे कार्यों के आधार पर 2018 में उपराष्ट्रपति ने इन्हें ‘एग्जांपल’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया.