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प्रयागराज के आशित सांई को मां सरस्वती का आशीर्वाद, 7 साल की उम्र में इसलिए कमा रहे नाम

आशित सांई 2 साल पहले अपने रिश्तेदार के घर एक कार्यक्रम में गया था, कि वहीं पर एक प्यानो रखा हुआ था और जैसे ही आशित ने उसे देखा तो वो प्यानो को बजाने लगा.

प्रयागराज के आशित सांई को मां सरस्वती का आशीर्वाद, 7 साल की उम्र में इसलिए कमा रहे नाम
Zee News

प्रयागराज: कहते हैं हुनर एक ऐसा छुपा रहस्य होता है जिसको बहुत ही कम लोग ढूंढ पाते हैं. यह भगवान के द्वारा दिया हुआ ऐसा उपहार होता है जो हर किसी के पास होता है जिन्होंने अपने हुनर को पहचान लिया वो एक मिसाल बन जाते हैं. इसी कहावत को सच कर दिखाया है प्रयागराज के रहने वाले 7 साल के आशित सांई ने. आशित सांई की उंगलियों में मां सरस्वती का वास है, जिस उम्र में बच्चे ठीक से बोल भी नहीं पाते उस उम्र में आशित सांई पियानो हारमोनियम तबला समेत कई इंस्ट्रूमेंट को इतने सुर में बजाता है कि लोग हैरत में पड़ जाते हैं. 

यही नहीं इस छोटे कलाकार की कहानी भी बेहद दिलचस्प है. आशित सांई 2 साल पहले अपने रिश्तेदार के घर एक कार्यक्रम में गया था, कि वहीं पर एक प्यानो रखा हुआ था और जैसे ही आशित ने उसे देखा तो वो प्यानो को बजाने लगा. पहली बार ही प्यानो पर उंगली रखे आशित ने कार्यक्रम में मौजूद सभी लोगों को आश्चर्यचकित किया. आशित के पिता को हैरानी ये हुई कि इससे पहले आशित ने कभी भी प्यानो को देखा तक नहीं था और ना ही किसी से कुछ सीखा था. 

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पूत के पांव पालने में ही दिख जाते हैं 
आशित के पिता का कहना है कि उसी दिन के बाद से उनको एहसास हो गया कि उनके बच्चे के अंदर यह खास कला छुपी हुई है जिसके बाद उन्होंने आशित के लिए कई इंस्ट्रूमेंट खरीदे और इसी कला को निखारने की कोशिश में जुट गए. आज आशित की उम्र 7 साल है बीते 2 सालों में आशित ने संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार व यूपी सरकार द्वारा आयोजित कई प्रोग्राम के अलावा कई अन्य मंचों को भी साझा करते हुए अपने नाम कई अवार्ड हासिल किया है. यहां गौर करने की बात यह है की आशित की उम्र बेहद कम है. आशित इस उम्र में भले ही ठीक से बोल नहीं पा रहा है लेकिन उसकी उंगलियों का जादू सर चढ़कर बोल रहा है. 

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आशित ने पिछले पांच साल से नहीं देखा टीवी 
आशित के पिता रेलवे में फोर्थ ग्रेड एम्पलाई हैं जबकि मां हाउसवाइफ हैं. आशित के पिता का कहना है कि उन्होंने पिछले 5 सालों से टीवी को बंद कर रखा है जबकि मोबाइल को भी बच्चों के हाथों से दूर रखा है. उनका कहना है कि हर बच्चे के अंदर कोई ना कोई कला जरूर छुपी रहती है बस उसको तराशने की जरूरत है. आज के बदलते परिवेश में बच्चों के लिए टेलीविजन और मोबाइल दोनों ही घातक है इसलिए इन दोनों चीजों से बच्चों को दूर रखें. आशित के पिता अपने बेटे की इस कला से बेहद खुश हैं उनका कहना है कि सुबह 4:30 बजे उठकर हमारे साथ सैर करने जाता है और उसके बाद आकर के अभ्यास करता है और फिर स्कूल जाता है. वहीं छोटे कलाकार आशित सांई का कहना है कि वह पढ़ाई के साथ साथ अपनी इस कला को प्रोफेशन बनाना चाहता है और बड़ा होकर के एक बड़ा म्यूजिक डायरेक्टर बनना चाहता है.