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मुस्लिमों को 'बीफ' खाना बंद कर देना चाहिए, इस्‍लाम में भी यह 'हराम' है: वसीम रिजवी

इसके साथ ही वसीम रिजवी ने यह भी कहा, ''इंद्रेश कुमार का बयान अहम है...किसी समुदाय ने यदि किसी को मां का दर्जा दिया है तो आप उसकी हत्‍या नहीं कर सकते.''    

मुस्लिमों को 'बीफ' खाना बंद कर देना चाहिए, इस्‍लाम में भी यह 'हराम' है: वसीम रिजवी
वसीम रिजवी शिया वक्‍फ बोर्ड के चेयरमैन हैं.(फोटो: ANI)

नई दिल्‍ली: अलवर में गो-तस्‍करी के शक में भीड़ द्वारा कथित रूप से पिटाई के कारण एक शख्‍स रकबर खान(28) की मौत होने के बाद मॉब लिंचिंग पर संसद से लेकर सड़क तक इस मुद्दे पर बहस हो रही है. इसी कड़ी में आरएसएसस नेता इंद्रेश कुमार ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि अगर देश के लोग बीफ खाना बंद कर दें तो देश में मॉब लिंचिंग की घटनाएं रुक जाएंगी. शिया वक्‍फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी ने भी इंद्रेश कुमार के बयान का समर्थन करते हुए कहा है, ''मुस्लिमों को बीफ खाना बंद कर देना चाहिए. गो-हत्‍या बंद होनी चाहिए. इस्‍लाम में भी गाय का मीट 'हराम' है. आप मॉब लिंचिंग को रोक नहीं सकते क्‍योंकि हर जगह सुरक्षा के बंदोबस्‍त नहीं किए जा सकते. लिहाजा ऐसा कानून बनाना चाहिए जिससे गो-हत्‍या करने वाले को सख्‍त से सख्‍त सजा मिले.''

इसके साथ ही वसीम रिजवी ने यह भी कहा, ''इंद्रेश कुमार का बयान अहम है. किसी की धार्मिक भावनाओं को आहत नहीं करना चाहिए. यदि गाय की हत्‍या के संबंध में कानून बन जाएगा तो मॉब लिंचिंग रुक जाएगी. किसी समुदाय ने यदि किसी को मां का दर्जा दिया है तो आप उसकी हत्‍या नहीं कर सकते.'' उल्‍लेखनीय है कि आरएसएस के संगठन राष्ट्रीय मुस्लिम मंच के संरक्षक इंद्रेश कुमार ने यह भी कहा, 'देश में मॉब लिंचिंग का स्वागत नहीं किया जा सकता है, लेकिन लोग गाय का मीट खाना बंद कर दें तो इस तरह के अपराधों पर लगाम लग सकती है.'

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इससे पहले इंद्रेश कुमार ने कहा, ''किसी भी भीड़ की हिंसा, वो आपके घर की, मोहल्‍ले की, जाति की, पार्टी की हो, वो कभी अभिनंदनीय नहीं हो सकती. परंतु, दुनिया के जितने भी धर्म हैं, उनके किसी ने धर्मस्‍थल पर बता दो कि गाय का वध होता है.'' इसके साथ ही उन्‍होंने जोड़ा, ''ईसा (जीएसएस) धरती पर गौशाला में आए, इसलिए वहां गाय को मां बोलते हैं. मक्‍का-मदीना में गाय का वध अपराध मानते हैं. क्‍या हम संकल्‍प नहीं कर सकते कि धरा, मानवता को इस पास से मुक्‍त करें. अगर मुक्‍त हो जाएं तो आपकी समस्‍या (मॉब लिंचिंग) का हल हो जाएगा.''

संसद में उठा मुद्दा
इस बीच मॉब लिंचिंग का मुद्दा मंगलवार को राज्यसभा में उठा और तृणमूल सहित विभिन्न दलों के सदस्यों ने ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए एक कानून बनाए जाने की मांग की. शून्यकाल में तृणमूल कांग्रेस की शांता क्षेत्री ने यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि इस सरकार के सत्ता में आने के बाद से भीड़ द्वारा पीट-पीटकर मार डालने की घटनाओं में करीब 88 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं और यह सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. शांता ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने भी इस मुद्दे पर कहा है कि यह ठीक नहीं है और सरकार को इस पर रोक लगाने के लिए एक कानून लाना चाहिए.

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उन्होंने सरकार से जानना चाहा कि ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए और कानून बनाने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं. विभिन्न दलों के सदस्यों ने शांता क्षेत्री के इस मुद्दे से स्वयं को संबद्ध किया और सरकार से इस मुद्दे का शीघ्र समाधान निकालने की मांग की. सभापति एम वेंकैया नायडू ने उम्मीद जताई कि सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से लेगी. केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने लोकसभा में इस मुद्दे पर कहा कि, इस बारे में गंभीरता से सोच रहे हैं. यह हालिया शुरू नहीं हुआ, बल्कि वर्षों से लिंचिंग की घटनाएं हो रही हैं. मैंने यह पहले भी कहा है कि 1984 में लिंचिंग की सबसे बड़ी घटना हुई थी.