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हापुड़: गढ़मुक्तेश्वर में चलाया जा रहा है 'मेरी गंगा-मेरी डॉल्फिन' अभियान

डॉल्फिन की गिनती के दौरान गंगा में वन विभाग के अधिकारी भी टीम के साथ मौजुद थे. वही, टीम का गढ़ ब्रजघाट पर जोरदार स्वागत किया गया. 

हापुड़: गढ़मुक्तेश्वर में चलाया जा रहा है 'मेरी गंगा-मेरी डॉल्फिन' अभियान
इस बार डॉल्फिन की गिनती बिजनौर के बैराज वॉइ घाट के पीछे से शुरू की गई और नरोरा में खत्म होगी.

हापुड़: उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले की तीर्थनगरी गढ़मुक्तेश्वर ब्रजघाट गंगा में डॉल्फिन की गिनती का अभियान चलाया जा रहा है. इस अभियान का नाम 'मेरी गंगा-मेरी डॉल्फिन रखा गया है. इस अभियान के तहत मानव मित्र डॉल्फिन की गिनती करने ब्रिटेन की डॉक्टर गिल ब्रोलिक अपनी टीम के साथ पहुंची.

डॉल्फिन की गिनती के दौरान गंगा में वन विभाग के अधिकारी भी टीम के साथ मौजुद थे. वही, टीम का गढ़ ब्रजघाट पर जोरदार स्वागत किया गया. आपको बता दें कि जानकारी के अनुसार पूरे विश्व मे मात्र 3500 डॉल्फिन शेष बची है. जिसमें से 80 प्रतिशत भारत में पाई जाती हैं. साल में एक बार डब्ल्यूडब्ल्यूएफ और वन विभाग के द्वारा डॉल्फिन की गिनती की जाती है.

इस बार डॉल्फिन की गिनती बिजनौर के बैराज वॉइ घाट के पीछे से शुरू की गई और नरोरा में खत्म होगी. डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की टीम 15 अक्टूबर तक डॉल्फिन की गिनती करेंगी. वहीं, हापुड़ में डॉल्फिन की गिनती करती हुई टीम अपनी मंजिल के लिए आगे रवाना हो गई. डॉल्फिन की गिनती करने आई टीम के लिए वन विभाग द्वारा सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई थीं.