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आज दोपहर BJP की सदस्यता ले सकते हैं नीरज शेखर, अमित शाह से हुई मुलाकात

पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के बेटे नीरज और सपा प्रमुख अखिलेश यादव के बीच हालिया लोकसभा चुनाव के दौरान राजनीतिक खटास पैदा हो गई थी.

आज दोपहर BJP की सदस्यता ले सकते हैं नीरज शेखर, अमित शाह से हुई मुलाकात
देर रात नीरज शेखर ने गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की.

नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव में मिली करारी मात और बहुजन समाज पार्टी से मिले धोखे के बाद समाजवादी पार्टी (सपा) अभी उबर भी नहीं पाई कि बलिया से सांसद नीरज शेखर ने राज्यसभा और सपा से इस्तीफा देकर अखिलेश की पार्टी को बड़ा झटका दिया है. सूत्रों के मुताबिक, आज दोपहर 12.30 बजे नीरज शेखर बीजेपी में शामिल हो सकते हैं. 

सूत्रों के अनुसार, समाजवादी पार्टी के इस्तीफा दें चुके सांसद नीरज शेखर सोमवार देर रात अमित शाह, महासचिव भूपेन्द्र यादव, सांसद निशिकांत दूबे और अनिल बलूनी से मिले. अमित शाह की बैठक के बाद नीरज शेखर के बीजेपी में शामिल होने का रास्ता साफ हो गया है और ये कयास लगाए जा रहे हैं कि मंगलवार (16 जुलाई) को वह बीजेपी की सदस्यता ले सकते हैं.

आपको बता दें कि पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के बेटे नीरज और सपा प्रमुख अखिलेश यादव के बीच हालिया लोकसभा चुनाव के दौरान राजनीतिक खटास पैदा हो गई थी. राज्यसभा के सभापति एम. वेंकैया नायडू ने सोमवार को नीरज शेखर का इस्तीफा मंजूर कर लिया गया. सदन में उनका कार्यकाल नवंबर 2020 तक था. 

दरअसल, लोकसभा चुनाव के दौरान नीरज शेखर बलिया संसदीय सीट से चुनाव लड़ना चाहते थे, इसके लिए उन्होंने टिकट की मांग की थी. पार्टी नेतृत्व ने उन्हें आश्वस्त भी किया था, लेकिन आखिरी वक्त तक भरोसा देकर अचानक उनकी जगह सदानंद पण्डेय को बलिया से उम्मीदवार बनाकर चुनाव मैदान में उतार दिया गया. इसके बाद से उनकी नाराजगी बढ़ती गई.

चंद्रशेखर के निधन के बाद नीरज शेखर ने पहली बार बलिया से ही चुनाव लड़ा था. साल 2007 में बलिया संसदीय सीट पर हुए उपचुनाव में भारी मतों के अंतर से जीतकर नीरज शेखर संसद पहुंचे थे. चंद्रशेखर की विरासत संभाल रहे नीरज ने अपने राजनीतिक तेवरों के चलते ही 2009 के आम चुनाव में भी बाजी मारी और 2014 तक संसद में रहे.

2014 की मोदी लहर में वह बीजेपी के भरत सिंह से चुनाव हार गए थे. इसके बाद सपा ने उन्हें 2014 में राज्यसभा के रास्ते संसद पहुंचा दिया था. तथ्य यह है कि बलिया संसदीय सीट से लगातार चंद्रशेखर चुनाव जीतते रहे. वह कभी सपा के सदस्य नहीं थे, लेकिन तत्कालीन सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव उनके खिलाफ कभी अपना प्रत्याशी नहीं उतारते थे.