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नोएडा में पोंजी स्कीम के नाम पर बड़ी 'हेरा-फेरी', हर महीने 10% रिटर्न के नाम पर ठग लिए करोड़ों

2016 में इससे काफी संख्या में लोग जुड़ने लगे थे. जालसाजों ने पोंजी स्कीम के माध्यम से लोगों को ज्यादा से ज्यादा जोड़कर अच्छा मुनाफा मिलने का लालच दिया था.

नोएडा में पोंजी स्कीम के नाम पर बड़ी 'हेरा-फेरी', हर महीने 10% रिटर्न के नाम पर ठग लिए करोड़ों

पवन त्रिपाठी/नोएडाः नोएडा में पोंजी स्कीम के नाम पर 100 करोड़ से अधिक रुपये की ठगी का एक मामला सामने आया है. ठगी के शिकार पीड़ित ने सेक्टर-20 थाने में मामला अपने साथ हुई ठगी का मामला दर्ज कराया है. पीड़ित का आरोप है कि जालसाज लोगों को लुभावने ऑफर्स का लालच देते थे और फिर निशाना बनाते थे. फॉरेक्स ट्रेडिंग के नाम पर जालसाज हर महीने 4 से 10 प्रतिशत तक के रिटर्न का झांसा देते थे. पीड़ित व्यक्ति दिल्ली के एक अस्पताल में अनिल कुमार कार्यरत हैं, जहां उनके स्टाफ के एक व्यक्ति ने उन्हें इस फ्रॉड कंपनी में निवेश करने की सलाह दी थी.

आरोप है कि पीड़ित के साथ अस्पताल में ही नर्सिंग असिस्टेंट का काम करने वाले राजेश ने 2016 में फॉरेक्स ट्रेडिंग में निवेश कराने वाली कंपनी न्यू एरा वेल्थ मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड के बारे में बताया था. इस कंपनी का नोएडा सेक्टर-18 के चौखानी स्क्वायर में ऑफिस था. कंपनी को महेंद्र वर्मा और सुशील वर्मा नाम के दो भाइयों ने जून 2014 में शुरू किया था. 

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2016 में इससे काफी संख्या में लोग जुड़ने लगे थे. जालसाजों ने पोंजी स्कीम के माध्यम से लोगों को ज्यादा से ज्यादा जोड़कर अच्छा मुनाफा मिलने का लालच दिया था. इसके बाद दो साल में कई स्कीम के जरिये परिवार के लोगों से पैसे लेकर कुल 55 लाख रुपये तक लगा दिए. इसमें से केवल 2018 तक केवल डेढ़ लाख रुपये तक ही रिटर्न मिले. एक व्यक्ति ने 45 लाख रुपये का भी निवेश किया है. इसके बाद दिसंबर 2018 से ही कंपनी के सभी लोग भाग निकले. अब ऑफिस भी बंद है. उसके बाद से जालसाज रुपये लौटाने का झांसा देकर लगातार समय मांग रहे थे. 

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कई महीने बीतने के बाद अब सेक्टर-20 थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है. ठगी के शिकार हुए पीड़ितों का आरोप है कि इस पूरे फर्जीवाड़े में दोनों भाई महेंद्र वर्मा व सुशील वर्मा के साथ इनके पिता चरण सिंह, अस्पताल का पूर्व कर्मी राजेश के अलावा मंजू व अन्य चार लोग भी शामिल हैं. इन लोगों ने कुछ साल में 100 करोड़ से ज्यादा की ठगी के अलावा हवाला कारोबार से भी जुड़े हैं. इन लोगों ने फॉरेक्स ट्रेडिंग के नाम पर एक वेबसाइट भी बनाई थी जो एक साल से ज्यादा समय से बंद है.