सांस्कृतिक केंद्र के निदेशक की कुर्सी को लेकर तकरार, निवर्तमान डायरेक्टर पद छोड़ने को नहीं हैं तैयार

सात राज्यों में लोक कला और संस्कृति के संवर्धन के लिए संगम नगरी में स्थापित उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र( North Central Zone Cultural Centre)  के निदेशक की कुर्सी को तकरार शुरू हो गया है.

सांस्कृतिक केंद्र के निदेशक की कुर्सी को लेकर तकरार, निवर्तमान डायरेक्टर पद छोड़ने को नहीं हैं तैयार
NCZCC फाइल फोटो

मो. गुफरान\प्रयागराज: सात राज्यों में लोक कला और संस्कृति के संवर्धन के लिए संगम नगरी में स्थापित उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र( North Central Zone Cultural Centre)  के निदेशक की कुर्सी को तकरार शुरू हो गया है. राजभवन से आदेश मिलने के बाद जहां डीएम प्रयागराज ने केंद्र का चार्ज ले लिया है, तो वहीं दूसरी ओर निवर्तमान डायरेक्टर ने केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय से दो साल के एक्सटेंशन मिलने का दावा कर खुद को डायरेक्टर और साजिश का शिकार बताया है.

कुर्सी को लेकर तकरार
प्रयागराज में देश के सबसे बड़े सांस्कृतिक केंद्र उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के निदेशक पद को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. दरअसल सोमवार की रात राज्यभवन से पत्र मिलने के बाद डीएम प्रयागराज भानु चंद गोस्वामी जब निदेशक का चार्ज लेने केंद्र पहुंचे तो डायरेक्टर इंद्रजीत सिंह ग्रोवर ने उन्हें चार्ज देने से इंकार कर दिया.बाद में पुलिस की मदद से डीएम ने केंद्र के डायरेक्टर का अतिरिक्त चार्ज ले लिया, डीएम के चार्ज लेने के बाद भी पूर्व डायरेक्टर इंद्रजीत सिंह ग्रोवर ने दावा किया की वो ही संस्था के डायरेक्टर है.

"नियमों की अनदेखी के मामले आए सामने"
डीएम ने चार्ज लेने के बाद मेला प्राधिकरण में तैनात विशेष कार्याधिकारी संत कुमार श्रीवास्तव को संस्कृति केंद्र की ज़िम्मेदारी सौंपी है. संत कुमार श्रीवास्तव वित्तीय मामलों के जानकार माने जाते हैं, प्रभार संभालने के बाद उन्होंने कहा कि उन्हें संस्थान में प्राथमिक तौर पर नियमों की अनदेखी के कुछ मामले मिले है, वो नियमों का अध्ययन कर जांच में लगे है कि संस्थान में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है या नहीं. उनका ये भी कहना है की पूर्व डायरेक्टर जो भी दावा करें लेकिन प्रदेश की राज्यपाल केंद्र की चेयरपर्सन है और उनके आदेश पर ही डीएम प्रयागराज ने संस्थान का चार्ज लिया है.

पूर्व डायरेक्टर कोर्ट में चुनौती देने की दी धमकी 
इंद्रजीत ग्रोवर ने एक प्रेस कॉन्फ्रेन्स कर मीडिया के सामने अपनी बात रखी और कहा कि उन्हें साजिश का शिकार बनाया गया है. बीते कुछ महीनों में उन्होंने केंद्र में कई बार शिल्प मेलों और हुनर हार्ट आयोजित करने का प्रयास किया लेकिन डीएम प्रयागराज ने कोरोना के नाम पर उन्हें कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति नहीं दी. जबकि सूबे के कई जिलों में शिल्प मेलों और महोत्सव का आयोजन हो रहा था. उन्होंने कहा कि 17 दिसंबर 2017 को जबसे उन्होंने केंद्र के निदेशक का पदभार ग्रहण किया. उन्होंने संस्था से जुड़े कलाकारों और शिल्पकारों के कल्याण के लिए काम करना शुरू किया, लेकिन संस्था के अंदर और बाहर कुछ ऐसे लोग थे जिन्हें उनका काम अखरने लगा और उसी के चलते उनके खिलाफ माहौल बनाकर साजिश रचकर उन्हें बलि का बकरा बनाया गया. उनका कहना है कि केंद्र में डायरेक्टर की नियुक्ति का अधिकार संस्कृति और पर्यटन मंत्रालय के पास है ऐसे में राज्यभवन से जारी पत्र में डीएम को चार्ज देना उनकी समझ से परे है, वो इस मामले को कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रहे है.

फिलहाल पूरे मामले में जिस तरह से डायरेक्टर को हटाया गया वो अपने आप मे ये साबित करने के लिए काफी है कि यहां सब कुछ ठीक नहीं था.चर्चा है कि केंद्र में बीते सालों में कई तरह की अनियमितता और भ्रष्टाचार रहा है, एक डायरेक्टर के तौर पर ग्रोवर ने कई नियमों को अपने हिसाब से परिभाषित किया. जिसके चलते वो विवाद में बने रहे और फिर अचानक हुई ये कर्रवाई उसकी प्रतिक्रिया हो सकती है. देखना होगा कि केंद्र से जुड़े वित्तीय और अन्य मामलों की जांच कर रहे प्रशासनिक और प्रभारी अधिकारियों को यहां कुछ गड़बड़झाला मिलती है या फिर कर्रवाई सिर्फ डायरेक्टर को हटाने तक ही सीमित रहती है. 

बता दें की इस केंद्र की स्थापना के लिए 1985 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने घोषणा की थी. वर्ष 1986 में सर्किट हाउस के पास केंद्र बनाया गया. देश में कुल सात सांस्कृतिक केंद्र संचालित हैं. प्रयागराज स्थित केंद्र के कार्यक्षेत्र में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड,दिल्ली ,राजस्थान, मध्य प्रदेश, हरियाणा, एवं बिहार शामिल हैं.

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