झूठा हलफनामा दाखिल करने पर चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव HC में तलब

राज्य के चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव रजनीश दुबे और मोतीलाल नेहरू मेडिकल कालेज, प्रयागराज के प्रधानाचार्य डाक्टर एस.पी. सिंह को गुरुवार को 29 जनवरी को अदालत में पेश होने के लिए कहा है.

झूठा हलफनामा दाखिल करने पर चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव HC में तलब
फाइल फोटो

प्रयागराज: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अदालत में झूठा हलफनामा दाखिल करने के लिए राज्य के चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव रजनीश दुबे और मोतीलाल नेहरू मेडिकल कालेज, प्रयागराज के प्रधानाचार्य डाक्टर एस.पी. सिंह को गुरुवार को 29 जनवरी को अदालत में पेश होने के लिए कहा है. पूर्व में दाखिल हलफनामा में मेडिकल कालेज में ट्रामा सेंटर के संचालन के संबंध में दिए गए उनके स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं होने पर अदालत ने इन दोनों अधिकारियों को तलब किया है.

न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और न्यायमूर्ति अजित कुमार की पीठ ने स्नेह लता सिंह और अन्य द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर यह आदेश पारित किया. याचिकाकर्ताओं ने राज्य में सरकारी अस्पतालों में दयनीय स्थिति होने का आरोप लगाया है.

पीठ ने न केवल इन दोनों अधिकारियों को तलब किया, बल्कि नौ मार्च, 2018 को दिए गए अदालत के आदेश के अनुपालन में उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव द्वारा अनुपालन हलफनामा दाखिल नहीं करने पर भी नाखुशी जाहिर की.

अदालत ने कहा कि मुख्य सचिव को अनुपालन हलफनामा दाखिल करना था, लेकिन यह हलफनामा सचिव (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग) द्वारा दाखिल किया गया. अदालत ने मुख्य सचिव को हलफनामा दाखिल करने के लिए और दो सप्ताह की मोहलत दी और विफल रहने पर उन्हें सुनवाई की अगली तारीख पर अदालत में पेश होना होगा.

इससे पूर्व, नौ मार्च, 2018 को अदालत ने सरकारी अस्पतालों में स्थिति सुधारने के लिए कई निर्देश पारित किए थे. अदालत ने राज्य में सरकारी अस्पतालों में मेडिकल, पैरा मेडिकल और अन्य कर्मचारियों के रिक्त पदों को भरने का निर्देश दिया था और अस्पतालों में कुप्रबंधन, उपलब्ध कराए गए कोष एवं इनके खर्चों के संबंध में भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) से अंकेक्षण कराने को भी कहा था.

पूर्व के आदेश में अदालत ने महानिदेशक सतर्कता को राज्य सरकार के उन चिकित्सा अधिकारियों का पता लगाने का भी निर्देश दिया था जो निजी प्रैक्टिस में लिप्त हैं, अपने अस्पताल और नर्सिंग होम चला रहे हैं. अदालत ने ऐसे अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने को भी कहा था. मुख्य सचिव को इन निर्देशों का अनुपालन कराने को कहा गया था.