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इस मिठाई का नाम सुनते ही आ जाता है मुंह में पानी, विदेशों में भी प्रसिद्ध है अल्मो़ड़ा की यह खास मिठाई

सांस्कृतिक नगर अल्मोड़ा अपनी अनूठी संस्कृति के लिए प्रसिद्ध है. अल्मोड़ा बाल मिठाई के लिए देश-विदेशो में प्रसिद्ध है. बाल मिठाई की कई खूबियों के कारण यहां देश विदेश से कई पर्यटक इसकी मिठास का आनन्द लेने  हर वर्ष सैकडो की संख्या में अल्मोड़़ा आते हैं.

इस मिठाई का नाम सुनते ही आ जाता है मुंह में पानी, विदेशों में भी प्रसिद्ध है अल्मो़ड़ा की यह खास मिठाई

उत्तर प्रदेश/ अल्मोड़ा: दीपावली का त्योहार मिठाईयों के बिना आधुरा होता हैं. एसे में अल्मोड़ा की बाल मिठाई को हम कैसे भुल सकते हैं. बाल मिठाई देश विदेशो में प्रसिद्ध है. माना जाता है की पर्यटक नगरी अल्मोड़ा में आए और बाल मिठाई का जायका न ले तो कुछ अधूरा सा रहता है. इसकी खास बात यह है कि यह बाल मिठाई स्थानीय गांवों से आने वाले शुद्ध खोया से बनती है. जिसका स्वाद भी लाजबाब होता है. इसको बनाने वाले बताते है कि यहां के खोये से बनी बाल मिठाई को अगर एक माह तक भी रख दे तो यह खराब नहीं होती. त्यौहारों के मौके पर अल्मोड़ा में बाल मिठाई की खपत कई गुना बढ़ जाती है. जिससे दुकानदारों के यहां मिठाईयां खरीदने वालों की भारी भीड़ जमा रहती है. शुद्ध खोये से बनायी जाने वाली अल्मो़ड़ा की बाल मिठाई का नाम सुनते ही मुहं में पानी आ जाता है. 

मिठाई बनाने के लिए खोया, चीनी, खसखस और पानी की आवश्यकता होती है. बाल मिठाई बनाने के लिए सर्वप्रथम खोया जिसे मावा या स्थानीय भाषा में कुन्दा भी कहा जाता है उसे एक कड़ाई में डाल कर उसमें चीनी मिलाई जाती है. और उसे चूल्हे पर रखकर लगभग 30 से 45 मिनट तक बराबर फेटा जाता है. उसके बाद इसका रंग सफेद से बदलकर चाकलेट के रंग का हो जाता है जिसे फिर एक ट्रे में ठन्डा होने के लिए रख दिया जाता है. ठन्डा होने के बाद उसे चाकू की मदद से काट कर छोटे छोटे पीस बना दिए जातें है. फिर बनाई जाती है एक दूसरी कड़ाई में चीनी की चासनी. जिसे चूल्हें में इतनी देर तक रखा जाता है कि हाथ से देखने पर उसमें गोलिया सी बनने लग जाए. एक अलग कड़ाई में फिर 250 ग्राम पोस्ते के दानों को डाल कर भूना जाता है. जिसके बाद पहले बनाई गई चासनी एवं भुने हुए पोस्ते को आपस में मिलाकर बाल मिठाई में लगने वाले दाने बनाये जाते जिन्हें बाल दाने कहा जाता है. अंतिम चरण में पहले बनाए गये चाकलेटी रंग के छोटे छोटे पीस को फिर चासनी में भिगाकर उनमें पोस्ते के दाने लगाए जाते है. इस बाल मिठाई में स्वाद को पोस्ता से बने बाल दाने बड़ाते हैं. इस तैयार हुई बाल मिठाई को सजाकर ट्रे में रख दिया जाता है. यह देखने में जितना सुन्दर लगता है उससे ज्यादा इसका स्वादिष्ट होता है.

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दुकानदार के अनुसार जिस तरह बनारस की साड़िया, आगरा के पेठे प्रसिद्ध है उसी तरह अल्मोड़ा की बाल मिठाई प्रसिद्ध है। इस मिठाई को सर्वप्रथम अल्मोड़ा में ही बनाया गया था जो आज उसकी पहचान है उन्होने बताया कि इस बाल मिठाई को लेने दूर दूर से लोग आते है. पर्यटक अल्मोड़ा आने पर अवश्य इसका स्वाद लेते है. वहीं स्थानीय लोग भी कही अपने रिस्तेदारों के यहां मिलने जाते है तो भी वह अल्मोड़ा की सौगात बाल मिठाई को लेकर जाते है. शादी बरातों और तीज त्यौहारों में भी बाल मिठाई का खूब प्रचलन है. जहां भारतीय महानगरों में भी विशेष अवसरों पर इसकी मांग होती है वहीं विदेशों में भी इसे भेजा जाता है.