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यूरोपियन सांसदों के कश्‍मीर जाने पर प्रियंका गांधी को ऐतराज, मायावती ने भी उठाए सवाल

यूरोपियन संघ के सांसदों के आज कश्‍मीर दौरे के मद्देनजर विपक्षी नेताओं ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं.

यूरोपियन सांसदों के कश्‍मीर जाने पर प्रियंका गांधी को ऐतराज, मायावती ने भी उठाए सवाल

नई दिल्‍ली: यूरोपियन संघ के सांसदों के आज कश्‍मीर दौरे के मद्देनजर विपक्षी नेताओं ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं. विपक्षी नेताओं ने कहा कि भारतीय सांसदों को तो श्रीनगर हवाई अड्डे से ही वापस कर दिया जा रहा है लेकिन विदेशी प्रतिनिधिमंडल को वहां इजाजत दी जा रही है. कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने ट्वीट कर कहा, ''कश्मीर में यूरोपियन सांसदों को सैर-सपाटा और हस्तक्षेप की इजाजत लेकिन भारतीय सांसदों और नेताओं को पहुंचते ही हवाई अड्डे से वापस भेजा गया! बड़ा अनोखा राष्ट्रवाद है यह.''

इसी तरह बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा, ''जम्मू-कश्मीर में संविधान की धारा 370 को समाप्त करने के उपरान्त वहां की वर्तमान स्थिति के आकलन के लिए यूरोपीय यूनियन के सांसदों को जम्‍मू-कश्‍मीर भेजने से पहले भारत सरकार अगर अपने देश के खासकर विपक्षी पार्टियों के सांसदों को वहां जाने की अनुमति दे देती तो यह ज्यादा बेहतर होता.''
 
AIMIM नेता असदुद्दीन ओवैसी ने भी तंज कसते हुए कहा कि विदेश मंत्रालय ने शानदार चयन किया है. ऐसे लोगों को वहां जाने दिया जा रहा है जो इस्‍लामोफोबिया बीमारी से ग्रस्‍त हैं. ऐसे लोग मुस्लिम बहुल राज्‍य में जा रहे हैं. उन्‍होंने शायराना अंदाज में ये भी कहा, ''गैरों पे करम अपनों पे सितम, ऐ जान-ए-वफा ये जुल्‍म ना कर...रहने दे अभी थोड़ा सा धर्म...''

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राहुल गांधी ने साधा निशाना
इससे पहले कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि भारतीय सांसदों को रोकने और विदेशी नेताओं को वहां जाने की अनुमति देने में 'कुछ न कुछ बहुत गलत है.' उन्होंने ट्वीट कर कहा, 'यूरोप से आए सांसदों का जम्मू-कश्मीर का दौरा करने के लिए स्वागत है जबकि भारतीय सांसदों के प्रवेश पर पाबंदी लगा दी जाती है. कुछ न कुछ ऐसा है जो बहुत गलत है.'

उल्‍लेखनीय है कि यूरोपीय संघ (ईयू) का 27 सदस्यीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल कश्‍मीर पहुंच गया है. उससे पहले सोमवार को प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल से मुलाकात की. यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब अमेरिका व कई अन्य देशों में कश्मीर को दिए गए विशेष राज्य के दर्जे को समाप्त करने के बाद वहां के हालात पर चिंता जताई जा रही है. यह अनुच्छेद 370 के रद्द होने के बाद किसी विदेशी दल का पहला कश्मीर दौरा होगा.

नई दिल्ली स्थित यूरोपीय संघ की शाखा ने कहा है कि 'यह उसका कोई आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल नहीं है.'

मोदी ने प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों से मुलाकात के दौरान पाकिस्तान की तरफ स्पष्ट इशारा करते हुए कहा कि उन देशों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने की जरूरत है, जो आतंकवाद को राज्य की नीति के तौर पर इस्तेमाल करते हैं. माना जा रहा है कि मोदी ने यह बात कर टीम के कश्मीर दौरे की 'टोन' तय कर दी है.

मोदी ने उम्मीद जताई कि सदस्य क्षेत्र की एक 'बेहतर समझ' और वहां के लिए सरकार की विकास की नीतियों की 'एक स्पष्ट तस्वीर' हासिल कर सकेंगे. डोभाल ने प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों की सोमवार दोपहर के भोज पर मेजबानी की. उन्होंने पाकिस्तान की तरफ से होने वाले सीमा पार आतंकवाद और अनुच्छेद 370 रद्द किए जाने के बाद के संवैधानिक बदलावों पर बात की.

प्रतिनिधिमंडल में यूके, फ्रांस, इटली, पोलैंड, जर्मनी के सदस्य हैं, जिन्होंने उपराष्ट्रपति एम.वेंकैया नायडू से भी मुलाकात की. ईयू प्रतिनिधिमंडल का कश्मीर दौरा भारत द्वारा कश्मीर को लेकर पाकिस्तान द्वारा की जा रही नकारात्मक बातों की काट पेश करने का प्रयास माना जा रहा है.