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केंद्रीय नेृतत्व से मंजूरी के बाद ही होगा विपक्षी नेताओं का BJP में प्रवेश: अजय भट्ट

एक तरफ उत्तराखंड में पार्टियां पंचायत चुनाव की तैयारी कर रही हैं तो दूसरी ओर कांग्रेस में एक और टूट का खतरा मंडरा रहा है. 

केंद्रीय नेृतत्व से मंजूरी के बाद ही होगा विपक्षी नेताओं का BJP में प्रवेश: अजय भट्ट
बीजेपी का लक्ष्य उत्तराखंड में 11 लाख नए सदस्य बनाने का है.

देहरादून: उत्तराखंड में पंचायत चुनाव से पहले कांग्रेस एक बार फिर बिखर सकती है. विपक्ष के नेताओं के बीजेपी से संपर्क में होने के दावे के बाद उत्तराखंड में फिर से राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं. बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने कहा है कि जम्मू कश्मीर में धारा 370 हटाए जाने के बाद प्रदेश में चल रहे सदस्यता अभियान में और तेजी आ गई. बीजेपी ने दावा किया है कि कांग्रेस के कई नेता बीजेपी ज्वाइन कर सकते हैं लेकिन पार्टी आला नेताओं से इजाजत लेकर ही आगे बढ़ेगी.

उत्तराखंड बीजेपी एक बार फिर कांग्रेस पार्टी में सेंध लगाने की तैयारी में है. उत्तराखंड में अपने सदस्यता अभियान में तेजी लाने के निर्देश देते हुए पार्टी पद्रेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने सभी विधायकों को अपने क्षेत्र में एक हफ्ते का समय देने का निर्देश दिया है लेकिन इससे भी महत्वपूर्ण उत्तराखंड बीजेपी का ये दावा है कि कांग्रेस के नेता बीजेपी की सदस्यता लेने के लिए उत्सुक हैं. भट्ट का कहना है कि जम्मू कश्मीर में धारा 370 खत्म होने के बाद उत्तराखंड में पार्टी की सदस्यता लेने वाले लोगों की संख्या तेजी से बढ़ गई है. भट्ट ने ये भी कहा कि उत्तराखंड कांग्रेस के कई नेता भी बीजेपी के संपर्क में हैं लेकिन पार्टी आलाकमान से मंजूरी के बाद ही इन नेताओं को पार्टी की सदस्यता दिलवाएगी.

बीजेपी का इन दिनों सदस्यता अभियान चल रहा है. पार्टी पूरे प्रदेश में नए सदस्य बना रही है. पार्टी का दावा है कि पिछले करीब डेढ़ महीने में पार्टी ने 8 लाख से ज्यादा नए सदस्य बना लिए हैं. बीजेपी का लक्ष्य उत्तराखंड में 11 लाख नए सदस्य बनाने का है. पार्टी के उत्तराखंड में सदस्यता प्रमुख और महामंत्री खजान दास कहते हैं हम 20 अगस्त तक 11 लाख नए सदस्य बनाकर टारगेट से ज्यादा हासिल कर लेंगें.

इधर, बीजेपी के दावे के बीच कांग्रेस में खलबली मच गई है पार्टी के दिग्गज नेताओं की बैचेनी भी बढ़ गई है. एक तरफ उत्तराखंड में पार्टियां पंचायत चुनाव की तैयारी कर रही हैं तो दूसरी ओर कांग्रेस में एक और टूट का खतरा मंडरा रहा है. 2016 में भी कांग्रेस के कई मंत्री और विधायकों ने बीजेपी का दामन थाम लिया था. इसके बाद कांग्रेस, उत्तराखंड में काफी कमजोर हो गई. इसका नतीजा ये हुआ कि बीजेपी ने 2017 का विधानसभा चुनाव और 2019 का लोकसभा चुनाव बड़े अंतर से जीत लिया. कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष किशोर उपाध्याय कहते हैं कि बीजेपी के दावे में कोई सच्चाई नहीं है. उनकी तोड़-फोड़ की ये परंपरा ठीक भी नहीं है. बीजेपी ने 2016 में पार्टी तोड़ी थी और अगर अब फिर से वो ये सब कर रहे हैं तो ये निंदनीय है.

उत्तराखंड में अक्टूबर- नंवबर तक पंचायत चुनाव होने हैं. बीजेपी जानती है कि कांग्रेस का जनाधार ग्रामीण क्षेत्रों में मजबूत है. साथ ही दो बच्चों का कानून लागू हो जाने से बीजेपी के सामने चुनौती पेश आ सकती है. ऐसे में अगर कांग्रेस के कुछ और दिग्गजों को अपने पाले में मिला लेती है तो पंचायत चुनाव की राह आसान हो जाएगी. फिलहाल ये देखना है कि कौन कांग्रेसी दिग्गज बीजेपी की तरफ रुख करता है.