अयोध्या निर्णय के खिलाफ पीस पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की क्यूरेटिव पिटीशन, दिया ये तर्क

अयोध्या निर्णय के खिलाफ पीस पार्टी के अध्यक्ष मोहम्मद अयूब ने सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव पिटीशन दायर किया है. पिटीशन में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में फैसला आस्था के आधार पर लिया था न कि मेरिट के आधार पर.

अयोध्या निर्णय के खिलाफ पीस पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की क्यूरेटिव पिटीशन, दिया ये तर्क
पीस पार्टी के अध्यक्ष मोहम्मद अयूब की फाइल फोटो.

लखनऊ: अयोध्या विवाद पर फैसले के खिलाफ पीस पार्टी ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव पिटीशन दायर किया. पीस पार्टी के अध्यक्ष डॉक्टर मोहम्मद अयूब ने अपने इस पिटीशन में कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या विवाद में फैसला आस्था के आधार पर दिया था, मेरिट के आधार पर नहीं.

इससे पहले मामले में दायर सभी पुनर्विचार याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था. गौरतलब है 9 नवंबर, 2019 को अयोध्या विवाद में सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की संवैधानिक पीठ ने सर्वसम्मति से राम मंदिर के पक्ष में फैसला दिया था.

सुप्रीम कोर्ट की इस 5 जजों वाली संवैधानिक पीठ में तत्कालीन चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के अलावा वर्तमान चीफ जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस अब्दुल नजीर शामिल थे. 

सुप्रीम कोर्ट ने विवादित जमीन का मालिकाना हक राम जन्मभूमि न्यास को दिया था. जबकि सरकार को आदेश दिया था कि वह मुस्लिम पक्ष को अयोध्या में ही किसी महत्वपूर्ण स्थान जगह 5 एकड़ जमीन मुहैया कराए.

क्या है क्यूरेटिव पिटीशन?
क्यूरेटिव पिटीशन (उपचार याचिका), पुनर्विचार (रिव्यू) याचिका से थोड़ा अलग होता है. इसमें याचिकाकर्ता फैसले की जगह पूरे केस में उन मुद्दों या विषयों पर कोर्ट का ध्यान आकर्षित करना चाहता है, जिसमें उसे लगता है कि कोर्ट को ध्यान देने की जरूरत है.

क्यूरेटिव पिटीशन पर भी सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर सकता है या उसे खारिज कर सकता है. अगर सुप्रीम कोर्ट क्यूरेटिव पिटीशन खारिज कर देता है तो केस खत्म हो जाता है और निर्णय सर्वमान्य हो जाता है.