महाराजगंज: सरकार ने नहीं सुनी गुहार, ग्रामीणों ने बांस-बल्ली से खुद ही बना लिया पुल

पुल बनाकर महाराजगंज जिले के निचलौल तहसील के बकुलडीहा गांव के लोगों ने संपर्क से कटे करीब दर्जन भर गांव के लोगों की राह आसान कर दी. 

महाराजगंज: सरकार ने नहीं सुनी गुहार, ग्रामीणों ने बांस-बल्ली से खुद ही बना लिया पुल
ग्रामीणों का कहना है कि किसी मरीज की तबियत खराब होने पर जिला अस्पताल जाने के लिए कई किलोमीटर घूम कर जाना पड़ता था.

अमित त्रिपाठी/महाराजगंज: जब गुहार लगाकर थक गए, मिन्नतों से भी बात नहीं बनी तो, लोगों ने अपने बाहुबल पर भरोसा जताया और बना लिया अपनी उम्मीदों का पुल. उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले के निचलौल तहसील के बकुलडीहा गांव के ग्रामीणों ने चंदन नदी पर पक्के पुल निर्माण के लिए नेताओं और अधिकारियों से कई बार मुलाकात कर मदद की अपील की. जब कोई नतीजा नहीं निकला तो, जल सत्याग्रह तक कर दिया. इसके बावजूद प्रशासन से केवल तारीख मिलती रही. जिसके बाद उन्होंने खुद चंदन नदी पर लकड़ी-बांस का पुल बना लिया. 

अब इस पुल का फायदा दर्जनों गांव के लोगों को मिल रहा है और जिला मुख्यालय जाने के लिए कई किलोमीटर लंबा चक्कर काटने से भी छुटकारा मिल गया है. वहीं, ग्रामीणों द्वारा बनाये गए इस पुल का अधिकारियों और लोगों द्वारा प्रशंसा भी की जा रही है. वहीं, अब ग्रामीणों की योगी सरकार से यही मांग है कि पक्का पुल का निर्माण हो जाए, जिससे उनकी समस्या हमेशा के लिए खत्म हो. 

दरअसल, महाराजगंज जिले के निचलौल तहसील के बकुलडीहा गांव के लोगों ने संपर्क से कटे करीब दर्जन भर गांव के लोगों की राह आसान कर दी. इन्होंने वह काम पूरा कर दिखाया, जिसकी मांग वे आजादी के बाद से करते आ रहे थे. जब मांग, प्रदर्शन, जल सत्याग्रह आदि के बाद भी उनकी आवाज अनसुनी रही तो, ग्रामीणों ने खुद बीड़ा उठाया. बांस, बल्ली के सहारे चंदन नदी के पुल पर अस्थाई पुल बना दिया. बिना किसी सरकारी मदद से पुल बना कर दूसरों के लिए एक मिसाल पेश की है. 

ग्रामीणों का कहना है कि किसी मरीज की तबियत खराब होने पर जिला अस्पताल जाने के लिए कई किलोमीटर घूम कर जाना पड़ता था. नदी पर पुल न होने कारण लोगों को तमाम जरूरतों के लिए लंबा चक्कर काटना पड़ता था. बच्चों को अच्छे स्कूल में भेजने की ख्वाहिश भी पूरी नहीं हो पा रही थी. ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के बाद नेताओं का यहां आना नहीं होता है. जिसके बाद गांवो के ग्रामीणों ने आपस में मीटिंग कर चंदा जुटाया और बना दिया नदी पर अपनी उम्मीदों का पुल. 

इन ग्रामीणों की अब सरकार से यही आशा है कि योगी सरकार इस लकड़ी के पुल को पक्का पुल बनवा दे. जिससे बरसात में जब काठ का पुल बह जाएगा तो, एक बार फिर नाव से जान जोखिम में उठाकर आना पड़ेगा. ग्रामीणों की इस पहल की सराहना अब खुद डीएम कर रहे हैं. उनका कहना है कि लोग अपनी समस्याओं के समाधान के लिए खुद जागरूक हो गए हैं. इससे लगता है कि हम विकास के ओर बढ़ रहे हैं. उन्होंने ग्रामीणों को आश्वासन भी दिया है कि जल्द ही चंदन नदी पर पुल निर्माण के लिए शासन में प्रस्ताव भेजेंगे.