ग्रेटर नोएडा की शिक्षिका ने बदली प्राइमरी स्कूल की तस्वीर, बच्चों के भविष्य पर लगाई अपनी कमाई

साल 2017 में नीलम शर्मा ख्वाजपुर सरकारी स्कूल की प्रधानाध्यापिका बनीं. तब स्कूल में महज 18 बच्चे पढ़ने के लिए आते थे, जिनकी संख्या आज बढ़कर 250 हो चुकी है. 

ग्रेटर नोएडा की शिक्षिका ने बदली प्राइमरी स्कूल की तस्वीर, बच्चों के भविष्य पर लगाई अपनी कमाई
ख्वाजपुर स्कूल

ग्रेटर नोएडा: सरकारी स्कूलों को लेकर अक्सर लोगों की सोच बहुत अच्छी नहीं होती, लेकिन ग्रेटर नोएडा के जेवर की एक अध्यापिका ने साबित कर दिया है कि स्कूल अच्छा-बुरा नहीं होता बल्कि उसे शिक्षक अच्छा या बुरा बनाते हैं. जेवर के ख्वाजपुर गांव में महिला प्रधानाध्यापिका नीलम शर्मा के प्रयासों से यहां का प्राइमरी स्कूल इतना खूबसूरत दिखता है कि इसे आप शिक्षा के मंदिर की ही उपाधि देंगे. हालांकि इसके लिए स्कूल की प्रधानाध्यापिका ने अपनी मेहनत और लगन के साथ अपनी कमाई भी लगाई है. 

18 से 250 बच्चों तक का सफर नहीं रहा आसान 

नीलम शर्मा की नियुक्ति साल 2019 में बतौर सहायक अध्यापिका ख्वाजपुर के स्कूल में हुई थी. तब स्कूल की ये दुर्दशा थी कि गांव के लोग स्कूल के कमरों में अपना सामान और बिल्डिंग मटीरियल रख दिया करते थे. ज्यादातर कमरों में ताले पड़े थे और स्कूल में इतनी गंदगी थी कि पूरी बिल्डिंग बदरंग दिखाई देती थी. इसके बाद साल 2017 में नीलम शर्मा स्कूल की प्रधानाध्यापिका बनीं. तब स्कूल में महज 18 बच्चे पढ़ने के लिए आते थे, जिनकी संख्या आज बढ़कर 250 हो चुकी है. 

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शिक्षा के क्षेत्र में पेश की मिसाल 

प्रधानाध्यापिका बनने के बाद नीलम शर्मा ने ठान लिया था कि स्कूल की तस्वीर बदल देनी है. इसके लिए गांव के प्रधान परविंदर चौधरी और नीलम के पति ने भी उनका पूरा सहयोग किया. उन्होंने स्कूल की बिल्डिंग की साफ-सफाई करवाई, यहां पेड़-पौधे लगवाए और स्कूल की दीवारों पर खूबसूरत चित्र सजाए. उनकी लगन देखकर गांववालों ने बच्चों को स्कूल भेजना शुरू किया और संख्या बढ़ने लगी. 

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मॉडल लाइब्रेरी और आधुनिक तकनीक 
इस स्कूल में मॉडल लाइब्रेरी भी है और अब यहां 2000 किताबें भी हैं. इनमें अंग्रेजी, इतिहास, भूगोल, गणित के अलावा अन्य किताबें भी मौजूद हैं. ये किसी अत्याधुनिक स्कूल से कम नहीं दिखाई देता. 

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