Prayagraj Mahakumbh 2025: प्रयागराज में भव्य महाकुंभ मेले का होगा आयोजन, चार हजार हेक्टेयर जमीन तक दायरा बढ़ा
Advertisement
trendingNow0/india/up-uttarakhand/uputtarakhand2289883

Prayagraj Mahakumbh 2025: प्रयागराज में भव्य महाकुंभ मेले का होगा आयोजन, चार हजार हेक्टेयर जमीन तक दायरा बढ़ा

Prayagraj Mahakumbh 2025: महाकुंभ मेला हिंदूओं का सबसे बड़ा सांस्कृतिक और धार्मिक मेला होता हैं जो हर 12 साल बाद, 2025 में लगने वाला है. जानिए कब से शुरू होंगे महाकुंभ मेले के शाही स्नान........

 

Mahakumbh Mela

Prayagraj Mahakumbh 2025: हिंदू धर्म में कुंभ के मेले की बहुत मानयता होती है. 2025 में महाकुंभ उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के त्रिवेणी तट पर आयोजित किया जाएगा. इस महाकुंभ का आयोजन 13 जनवरी से लेकर 26 फरवरी 2025 तक होगा जो पूरे 45 दिनों तक चलेगा. इस बार का यह महाकुंभ पिछले सभी महाकुंभ मेलों से बड़ा होगा. यह मेला चार हजार हेक्टेयर जमीन पर लगेगा. 

मेला प्रयागराज में होगा
भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में सबसे बड़ा मेला महाकुंभ मेला माना जाता है. जिस प्रदेश में मेला लगता है उस प्रदेश की सरकार ही पूरे महाकुंभ का आयोजन करती है. वहीं 2025 का महाकुंभ मेला प्रयागराज में होगा. इसी कारण इस मेले की पूरी व्यवस्था उत्तर प्रदेश की सरकार करेगी. जब भी प्रयागराज में महाकुंभ मेला होता था तो वह 3200 हेक्टेयर क्षेत्रफल में लगता था लेकिन इस बार उत्तर प्रदेश सरकार ने महाकुंभ मेले का दायरा बढ़ाते हुए उसे 4000 हेक्टेयर कर दिया. जिसकी वजह से इस बार का महाकुंभ मेला बाकी सभी बार के मेलों से बड़ा होने वाला हैं. 

आयोजन 13 जनवरी से होगा शुरू
2025 के महाकुंभ मेले के पूरे कार्यक्रम की घोषणा की जा चुकी है. यह तो सभी को पता है कि महाकुंभ के मेले का आयोजन हर 12 साल में किया जाता है, वहीं 2025 के मेले का आयोजन 13 जनवरी से होगा. इससे पहले यह आयोजन 2013 में हुआ था. 

ज्योतिषियों के अनुसार
अगर हम ज्योतिषीय मान्यताओं का कहा देखे तो वृष राशि में बृहस्पति होने पर ही कुंभ मेले का आयोजन होता है और 2025 में बृहस्पति वृष राशि में होगा जिस वजह से 2025 में महाकुंभ का आयोजन किया जाएगा. सूर्य और चन्द्रमा के मकर राशि में प्रवेश करने पर महाकुंभ मेले का आयोजन होता है. साल 2025 में यह संयोग बनेगा और तब 13 जनवरी से लेकर 26 फरवरी तक यह मेला चलेगा. 

पहला स्नान कब
महाकुंभ के दौरान हरिद्वार में गंगा, उज्जैन में शिप्रा, नासिक में गोदावरी और इलाहबाद में त्रिवेणी संगम पर स्नान किया जाता है, मान्यता है इससे अमृत की प्राप्ति होती है. महाकुंभ का पहला स्नान 14 जनवरी को मकर संक्राति के दिन होगा, दूसरा स्नान 29 जनवरी को मौनी अमावस्या और तीसरा शाही स्नान 3 फरवरी बसंत पंचमी को होगा. कुंभ मेले का आयोजन कब और कहां किया जाएगा, इसका निर्धारण ग्रहों और राशियों की स्थिति देखकर किया जाता है. 
 

Trending news