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शाही अंदाज में निकली तीन वैष्णव अखाड़ों की पेशवाई, साधुओं ने दिखाई कलाबाजी

कुंभ नगरी में लगने जा रहे दुनिया के सबसे बड़े आध्यात्मिक और सांस्कृतिक समागम के लिए अखिल भारतीय श्री वैष्णव तीनों अनी अखाड़ों की पेशवाई हाथी-घोड़े और बाजे-गाजे के साथ निकली.

शाही अंदाज में निकली तीन वैष्णव अखाड़ों की पेशवाई, साधुओं ने दिखाई कलाबाजी
पेशवाई में रथ के क्रम में सबसे आगे जगद्गुरू रामानंदाचार्य स्वामी हंसदेवाचार्य का रथ था.

प्रयागराज: आगामी 15 जनवरी से कुम्भ नगरी में लगने जा रहे दुनिया के सबसे बड़े आध्यात्मिक और सांस्कृतिक समागम के लिए सोमवार को अखिल भारतीय श्री वैष्णव तीनों अनी अखाड़ों की पेशवाई हाथी-घोड़े और बाजे-गाजे के साथ निकली.

केपी ग्राउंड से निकली इस पेशवाई में श्री पंच निर्मोही अखाड़ा, श्री पंच दिगंबर अखाड़ा और श्री पंच निर्वाणी अखाड़ा के साधु संत हाथी-घोड़े और बघ्घी पर सवार थे. सबसे आगे सात हाथी, कई घोड़े और हाथ में ध्वजा लिए साधुओं का समूह था. इस समूह के पीछे साधु तलवार से कलाबाजी दिखा रहे थे.

पेशवाई में रथ के क्रम में सबसे आगे जगद्गुरू रामानंदाचार्य स्वामी हंसदेवाचार्य का रथ था. इसके पीछे दादू पंथी निर्मोही अखाड़ा, उज्जैन के महामंडलेश्वर महंत ज्ञान दास जी महाराज, श्री महंत माधवाचार्य जी महाराज, रामसुंदरदेवाचार्य जी महाराज और महामंडलेश्वर स्वामी रामदास जी महाराज का रथ था.

इस शोभायात्रा की भव्यता और साधु-संतों का दर्शन करने के लिए सैकड़ों की संख्या में लोग मौजूद थे. पेशवाई को देखने के लिए सड़क के दोनों ओर श्रद्धालुओं का हुजूम खड़ा था. लोग पेशवाई पर फूल वर्षा कर साधु-संतों का स्वागत कर रहे थे.

पेशवाई एक धार्मिक शोभा यात्रा है जिसमें अखाड़ों के आचार्य, पीठाधीश्वर, महामंडलेश्वर, साधु-संत और नागा सन्यासियों का कारवां हाथी, घोड़े और ऊंट पर सवार होकर गंगा के किनारे बनी छावनी में पहुंचता है और पूरे मेले के दौरान वहां प्रवास करता है.

(इनपुट-भाषा)