जानिए पुलवामा आतंकी हमले के एक वर्ष बाद कैसे हैं उत्तर प्रदेश के 12 शहीदों के परिवार

आइए जानते हैं कि उत्तर प्रदेश के उन 12 जवानों का परिवार कैसा है जिन्होंने पुलवामा आतंकी हमले में अपनी शहादत दी थी. उस घटना के वर्ष बीतने पर क्या सरकार ने शहीदों के परिजनों से जो वादे किए थे वे पूरे भी किए गए या नहीं...?

जानिए पुलवामा आतंकी हमले के एक वर्ष बाद कैसे हैं उत्तर प्रदेश के 12 शहीदों के परिवार
14 फरवरी 2019 को पुलवामा में हुए आतंकी हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे.

आज से ठीक एक वर्ष पहले जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ दस्ते पर आत्मघाती आतंकी हमला हुआ था. इस आतंकी हमले में देश के 40 वीर सपूतों ने अपनी शहादत दी थी. पुलवामा आतंकी हमले में उत्तर प्रदेश के 12 जवान शहीद हुए थे. शहीद जवानों में विजय कुमार मौर्या, प्रदीप  कुमार, अमित कोरी, रमेश यादव, पंकज त्रिपाठी, अजीत कुमार आजाद, अवधेश यादव, रामवकील, प्रदीप यादव, श्याम बाबू , कौशल रावत और महेश कुमार शामिल हैं. आइए जानते हैं इन जवानों की शहादत के एक वर्ष बीतने पर उनका परिवार किस हालत में है. क्या सरकार ने शहीदों के परिजनों से जो वादे किए थे वे पूरे भी किए गए या नहीं...?

विजय कुमार मौर्या की पत्नी लक्ष्मी मौर्या को मिल गई है सरकारी नौकरी
पुलवामा में हुए आतंकी हमले में देवरिया के लाल विजय कुमार मौर्य भी शहीद हो गए थे. विजय की शहादत पर 16 फरवरी, 2019 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उनके पैतृक गांव भटनी के छपिया जयदेव पहुंचे थे. उस समय प्रदेश सरकार की तरफ से शहीद के पिता को पांच लाख रुपए और पत्नी को 20 लाख का चेक मिला था. मुख्यमंत्री ने शहीद के परिवार को ढांढ़स बंधाने के साथ ही हर संभव मदद का भरोसा दिया था. इसके बाद शहीद की पत्नी विजय लक्ष्मी को कलेक्ट्रेट में कनिष्ठ लिपिक के पद पर तैनाती दी गई. 

​शहीद विजय की पत्नी लक्ष्मी कहती हैं, ''मुझे मेरे पति की शहादत पर गर्व है. जब कोई मुझे विजय मौर्य की पत्नी के रूप में बुलाता है तो सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है. बेटी को भी अच्छे से पढ़ा कर सेना में भेजूंगी. प्रशासन ने भी गांव में शहीद विजय के नाम पर गेट और सड़क बनवाने के अलावा कई काम कराए हैं. गांव का विद्यालय शहीद के नाम पर करने का अनुरोध किया था. अभी तक इस बारे में कोई पहल नहीं हुआ है.''

शामली के शहीद प्रदीप और अमित के परिजन सरकार की मदद से संतुष्ट
जम्मू कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर आतंकी हमले में जनपद शामली के दो जवान प्रदीप कुमार और अमित कोरी शहीद हुए थे. इनके परिजनों में अपने लाडलों को खोने का गम तो है, लेकिन देश के लिए बलिदान होने का गर्व उनके चेहरों पर झलकता है. शहीद के परिजनों का कहना है कि सरकार की तरफ से दी मदद से वे संतुष्ट हैं.

कुडाना रोड शामली निवासी शहीद अमित कोरी के पिता सोहनपाल सिंह का कहना है कि सरकार ने मदद के लिए जो घोषणाएं की थीं, वे सब पूरी हुई हैं. आर्थिक मदद और शहीद के एक भाई सुनील को सरकारी नौकरी मिल गई है. शहीद के नाम पर मार्ग का नाम रखने की प्रक्रिया चल रही है. स्मारक का भी निर्माण कार्य चल रहा है. अगले महीने 23 मार्च को शहीद स्मारक का लोकार्पण होगा.

कस्बा बनत निवासी शहीद प्रदीप कुमार के पिता जगदीश प्रजापति ने कहा कि शासन-प्रशासन की तरफ से मिली मदद से वह संतुष्ट हैं. लेकिन अन्य संस्थाओं या समाज के लोगों ने जो सहायता राशि दी है, उस पर सरकार टैक्स ले रही है. जवान की शहादत पर टैक्स कहां का सम्मान है. मां सुलेनता ने प्रदीप को याद करते हुए कहा कि उन्हें बेटे को खोने का गम तो ताउम्र रहेगा, लेकिन गर्व की बात ये है कि बेटे ने देश के लिए बलिदान दिया है.

शहीद रमेश यादव के परिजनों का आरोप, सरकार ने पूरे नहीं किए हैं वादे
पुलवामा आंतकी हमले में वाराणसी के रमेश यादव भी शहीद हुए थे. रमेश यादव के परिजनों से सरकार ने जो वादे किए थे उनमें से कई एक साल बाद भी पूरे नहीं हुए हैं. शहीद की पत्नी रेनू को शहीद पति के नाम पर इलाके की सड़क नहीं बनने का मलाल है. उनका कहना है कि शहीद रमेश यादव के नाम से उनके गांव में प्रवेश द्वार नहीं बनाया गया. कई मंत्रियों ने शहीद के नाम से स्टेडियम बनवाने का भी आश्वासन दिया था.

गौरा बाजार से तोफापुर गांव तक पक्की सड़क शहीद के नाम से बनावाने की बात कही गई थी. लेकिन अब तक नहीं बनीं. शहीद के पिता श्याम नारायण और माता राजमति का कहना है कि पेट के लिए काम जरूरी है इस लिए आज भी दूध बांटने दूर तक जाना पड़ता है. उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से किए गए वादे अबतक पूरे नहीं हुए हैं.

बदल रही है शहीद पंकज के गांव की सूरत, प्रशासन वादों पर ले रहा संज्ञान 
पुलवामा हमले में महराजगंज के पंकज त्रिपाठी भी वीरगति को प्राप्त हो गए थे. बीते एक साल से परिजन पंकज की सुनहरी यादों व स्मृतियों को संजोकर जीवन काट रहे हैं. जवान पंकज कुमार त्रिपाठी के शहीद होने के बाद यूपी के महाराजगंज जिले में स्थित उनके गांव में काफी लंबे समय से लंबित पड़े विकास कार्य दोबारा से शुरू हो गए हैं. शहीद पंकज त्रिपाठी का गांव भारत-नेपाल सीमा के नजदीक है.

गांव का प्राथमिक स्कूल जो काफी समय से जर्जर हालत में था, अब उसका नवीकरण किया जा रहा है. स्कूल का नाम भी शहीद के नाम पर रख दिया गया है. पंकज कुमार त्रिपाठी के घर तक जाने वाले रास्ते को दोबारा बनाया जा रहा है. सीएम योगी आदित्यनाथ शहीद के परिवार से मिले थे. उसके बाद यह कदम उठाए गए हैं. मुख्यमंत्री ने शहीद पंकज के परिवार से कुछ सुविधाएं मुहैया करवाने का वादा किया था, जिन पर प्रशासन की ओर से संज्ञान लिया गया है.

शहीद अवधेश की पत्नी को नौकरी तो मिली, पर पूरे नहीं किए गए सभी वादे
पुलवामा आतंकी हमले में चंदौली के शहीद अवधेश यादव ने अपने प्राणों की आहुति दी थी. इस घटना के एक वर्ष बाद भी शहीद अवधेश का परिवार आज भी शासन-प्रशासन के वादाखिलाफी से काफी दु:खी है. शहीद की पत्नी शिल्पी यादव को नौकरी देने के अलावा अन्य वादों के पूरा होने का इंतजार है. अवधेश यादव सीआरपीएफ के 45वीं बटालियन मे हवलदार आरो के पद पर कार्यरत थे.

सत्ता पक्ष के जनप्रतिनिधियों के अलावा मंत्रियों का भी अवधेश के यहां कई बार दौरा हुआ. उस वक्त शहीद की पत्नी शिल्पी यादव और भाई बृजेश यादव को सरकारी नौकरी, शहीद के नाम पर पड़ाव चौराहे का नाम, पड़ाव चौराहे से लेकर बहादुरपुर गांव तक पक्की सड़क, मिनी स्टेडियम, राजकीय इंटर कॉलेज और गांव में मुख्यद्वार का निर्माण जैसे वादे किए गए थे. प्रशासन की ओर से एकमात्र शहीद की पत्नी शिल्पी यादव को सरकारी नौकरी दी गई. इसके अलावा आज तक एक भी वादा पूरा नहीं किया गया है.

शहीद रामवकील की पत्नी को सरकारी नौकरी मिली, पर घर का वादा है अधूरा
पुलवामा में एक साल पहले हुए आतंकी हमले में मैनपुरी के सीआरपीएफ जवान रामवकील शहीद हो गए थे. रामवकील केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की 176 बटालियन में हवलदार के पद पर तैनात थे. रामवकील की शहादत के एक साल बाद भी स्मारक का निर्माण तक नहीं हो सका है. सरकार द्वारा इसके लिए पांच बीघा का पट्टा तो आवंटित किया जा चुका है, लेकिन इसके लिए अब तक रास्ता नहीं मिल पा रहा है.

शहीद की मां अमितश्री ने बताया कि बेटे को खोने का गम है, तो गर्व इस बात का है कि मेरे बेटे ने भारत मां की रक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर किए हैं. सरकार ने मकान देने का वादा किया था, लेकिन मकान नहीं मिली है. हालांकि, सरकार की तरफ से जो मुआवजा मिलना था मिल गया. बच्चों की पढ़ाई का जिम्मा सरकार ने उठाया है. शहीद रामवकील की पत्नी गीता को सरकारी नौकरी मिली है. वही इटावा विकास भवन में बाबू पद पर काम करती हैं.

शहीद प्रदीप यादव की पत्नी नेताओं और प्रशासन की वादा खिलाफी से हैं आहत
जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में 14 फरवरी 2019 को हुए आतंकी हमले में यूपी के कन्नौज जिले के इंदरगढ़ थाना क्षेत्र के अजान सुखसेनपुर निवासी प्रदीप सिंह यादव शहीद हो गए थे. प्रदीप सिंह यादव श्रीनगर में 115 सीआरपीएफ बटालियन में सिपाही पद पर तैनात थे. उनके परिवार में पत्नी नीरज देवी और दो बेटियां 10 वर्षीय सुप्रिया यादव और ढाई साल की सोना यादव हैं.

सरकार ने शहीद के परिवार की हर तरह की मदद का ऐलान भी किया था. शहीद प्रदीप यादव की पत्नी से किये वादे अधिकारी और नेता पूरी तरह भूल चुके हैं. प्रशासनिक अफसरों और नेताओं ने उनके नाम पर पार्क, गांव की सड़क और एक मूर्ती लगवाने का वादा किया था. इतना ही नहीं शासन ने शहीद की पत्नी को 5 बीघा जमीन देने का ऐलान भी किया था. लेकिन ये सभी वादे पूरे नहीं किए गए हैं. शहीद प्रदीप की पत्नी नीरज देवी ने बताया कि वह अफसरों के पास सैकड़ों चक्कर लगा चुकी हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई है.

शहीद श्याम बाबू की पत्नी को सरकारी नौकरी मिली, लेकिन स्मारक नहीं बनाया
डेरापुर तहसील के रैंगवा निवासी राम प्रसाद के बड़े बेटे श्याम बाबू 14 फरवरी 2019 को पुलवामा में हुए आतंकी हमले में शहीद हो गए थे. केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी शहीद श्याम बाबू के पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित करने पहुंची थीं. सत्ता पक्ष, विपक्ष सहित कई नेताओं ने श्याम बाबू के घर पहुंचकर बहुत से वायदे किए थे. इस घटना के एक साल बाद भी उनमें से कई वादे पूरे नहीं किए गए हैं. शहीद की पत्नी रूबी को कलेक्ट्रेट कानपुर देहात में क्लर्क की नौकरी मिली है.

सरकार की ओर घोषित धनराशि भी शहीद श्याम बाबू की पत्नी रूबी को दे दी गई है. लेकिन शहीद के स्मारक बनाने का काम पूरा नहीं ​हुआ है. घटना के एक वर्ष पूरा होने पर शहीद के परिवार ने खुद ही अंतिम संस्कार वाले स्थान पर समाधि बना रहा है. इस समाधि स्थल तक आने वाली सड़क जिसे पीडब्ल्यूडी ने बनाया था, वह महज डेढ़ माह के भीतर ही उखड़ने लगी. 

शहीद कौशल रावत के बेटे को सरकार ने किया है नौकरी देने का वादा
पुलवामा आतंकी हमले में आगरा के गांव कहरई निवासी कौशल कुमार रावत भी शहीद हुए थे. मां सुधा रावत आज भी अपने बेटे के जाने के गम से उबर नहीं पाई हैं. बेटे के गम के साथ-साथ अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों का उनके वादों से मुकरना भी उन्हें बहुत कष्ट दे रहा है. शहीद कौशल के अंतिम संस्कार के समय अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने जो वादे किए थे, वह एक साल बीतने के बाद भी पूरे नहीं हुए हैं. एक साल बीतने पर भी शहीद का स्मारक नहीं बना सका है. परिजनों ने अपनी जमीन पर ही ग्रामसभा के माध्यम से स्मारक का निर्माण शुरू कराया है.

शहीद के अंतिम संस्कार के समय उनका स्मारक बनवाने, गांव तक पक्की सड़क बनवाने, गांव के स्कूल का नाम शहीद के नाम पर रखने, शहीद के परिवार को जमीन देने के वादे में से एक भी वादा पूरा न होने पर परिजनों में निराशा है. शहीद कौशल की पत्नी ममता रावत का कहना है कि सरकार ने परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की बात कही थी. वह मांग जरूर पूरी हुई है. परंतु छोटा बेटा अभी पढ़ाई कर रहा है. अत: उनके आग्रह पर सरकार ने बेटे की पढ़ाई पूरी होने पर नौकरी देने की हामी भरी है.

शहीद महेश कुमार के भाई को अब तक नहीं मिली नौकरी, अन्य वादे भी अधूरे
पुलवामा आतंकी हमलने में मेजा के टूड़ीहार बदल का पुरवा निवासी महेश कुमार यादव शहीद हो गए थे. इस घटना के एक साल बीत गए हैं पर शहीद महेश कुमार यादव के घर परिवार को अब तक सुविधाएं नहीं मिलीं हैं. शहीद की पत्नी संजू देवी का कहना है कि शासन-प्रशासन की ओर से परिवार की कोई सुधि नहीं ली गई. उन्होंने बताया कि राजनेताओं, शासन तथा प्रशासन द्वारा किए गए वादे अब तक पूरे नहीं हुए हैं. नेताओं, शासन तथा स्थानीय प्रशासन द्वारा डेढ़ एकड़ जमीन देने का वादा किया गया था, लेकिन करीब 11 माह गुजरने के बाद भी जमीन का कोई कागज नहीं मिला है.

घर तक पहुंचने के लिए सड़क तो मिली, लेकिन बड़ी-बड़ी गिट्टियां बिछाकर मार्ग अधूरा छोड़ दिया गया. जनप्रतिनिधियों ने शौचालय, सोलर लाइट और शहीद गेट तथा बच्चों की पढ़ाई कराने का वादा किया था, लेकिन अब तक किसी भी वादे के पूरे होने की उम्मीद नहीं दिख रही है. शहीद का परिवार स्वयं के खर्च पर दोनों बेटों को पढ़ा रहा है. प्रशासन के नुमाइंदों ने शहीद महेश कुमार छोटे भाई अमरेश कुमार की नौकरी के लिए कागजात तो कई बार लिए, लेकिन उस पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है.

शहीद अजीत कुमार आजाद के पिता ने कहा, सरकार ने पूरे किए सारे वादे
जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में एक वर्ष पहले 14 फरवरी 2019 को सीआरपीएफ के जवानों पर हुए आतंकी हमले में उन्नाव के रहने वाले अजीत कुमार आजाद भी शहीद हुए थे. अजीत के पिता प्यारेलाल कहते हैं कि बाकी सारे वादे तो लगभग पूरे हो गए हैं लेकिन शहीद बेटे के स्मारक तक जाने वाली सड़क खस्ताहाल है, बस उसे सही करा दिया जाए तो सब ठीक है. अजीत की पत्नी मीना ने कहा कि आज उस घटना को पूरा एक साल हो गया. अजीत के जाने के बाद मैंने हर रोज उनकी बातों को महसूस किया है. बस अब तो यही चाहती हूं कि बेटी ईशा (9) और श्रेया (7) अच्छे से पढ़ाई पूरी करें. अजीत का ख्वाब था कि बेटियां डॉक्टर बनें.

बड़ी बेटी ईशा डॉक्टर बनना चाहती है और छोटी बेटी श्रेया तो कहती है कि मुझे पापा वाली बंदूक चलानी है. वह अपने पिता की तरह देश की सेवा करना चाहती है. शहीद अजीत कुमार आजाद के पिता प्यारेलाल कहते हैं कि मेरे पांच बेटे थे. एक देश की सेवा में शहीद हो गया. बढ़ती उम्र के साथ हर रोज उसकी याद आती है. हम आज भी उस पर गर्व महसूस करते हैं. मेरी पत्नी राजवंती अजीत की याद में अकसर उसकी तस्वीर निहारती रहती है. बड़ी किस्मत से देश की सेवा करने का मौका मिलता है. प्यारेलाल कहते हैं कि उनके परिवार को प्रशासन और सरकार का बहुत सहयोग मिला है. बस बेटे के स्मारक तक जाने वाली सड़क को जरा मरम्मत की जरूरत है.