अयोध्या: 'रघुवीरा' ने अवध में खेली होली, वृंदावन से 'बांके बिहारी' ने भेजा रंग

राम जन्मभूमि में रामलला ने वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर से आये विशेष रंग गुलाल से होली खेली. अयोध्या के संतों का कहना है कि रामलला ने 500 साल बाद स्वतंत्र होली खेली है.

अयोध्या: 'रघुवीरा' ने अवध में खेली होली, वृंदावन से 'बांके बिहारी' ने भेजा रंग

मनमीत गुप्ता, अयोध्या। राम जन्मभूमि में रामलला ने वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर से आये विशेष रंग गुलाल से होली खेली.  होली के दिन सुबह करीब सात बजे रामलला के पुजारी ने उन्हें बांके बिहारी मंदिर से आया 

रंग गुलाल लगाया. इस बार की होली से रामलला और बांके बिहारी का खास रिश्ता जुड़ गया है. अयोध्या के संतों का कहना है कि रामलला ने 500 साल बाद स्वतंत्र होली खेली है. श्री रामलला के मुख्य पुजारी आचार्य 

सतेंद्र दास ने कहा, "इस बार की होली 800 वर्षों बाद विशेष होली है. पहली बात ये है कि ये होली भगवान राम के दिये की होली है, दूसरी बात ये कि बिहारी मंदिर के जो सेवादार हैं उन्होंने रंग भेजा है और मिष्ठान 

भेजा है और बहुत सा सामान भेजा है रामलला के लिए". रामलला के दरबार मे सुबह 7 बजे से शुरू हुई होली दोपहर 12 बजे तक चली. 

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बांके बिहारी मंदिर से आया ऑर्गेनिक रंग गुलाल
अयोध्या में रामलला ने जिस रंग गुलाल से होली खेली उसे वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर के सेवादार अशोक कुमार गोस्वामी, गोपी गोस्वामी ने भेजा था. अयोध्या में होली की शुरूआत एकादशी से ही हो जाती है जो कई 

दिन तक चलती है. इस बार खास ये है कि बांके बिहारी मंदिर के वृंदावन से उन्हें ऑर्गेनिक रंग भेजा गया यानी रामलला के लिए जो रंग भेजा गया उन्हें गुलाब की पंखुड़ी से बने गुलाल से बनाया गया था। इसे खास 

रामलला के लिए बनाया गया। बांके बिहारी मंदिर से भेजे गए गुलाल में गुलाब से बने पीले , गुलाबी , लाल , नीले , हरे , केसरिया रंग शामिल थे. यही नहीं क्योंकि रामलला अपने भाइयों के साथ ही होली खेलते थे 

इसलिए उनके भाई लक्ष्मण , भरत और शत्रुघ्न के लिए भी बांके बिहारी ने रंग गुलाल भेजा. इसी रंग के साथ रामलला और उनके भाइयों ने आज की होली खेली. 

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बांके बिहारी ने रामलला को मिठाई भी भेजी
अयोध्या में भगवान राम बाल रूप में स्थापित हैं, इसलिए रामलला के लिए बांके बिहारी मंदिर से मिष्ठान भी भेजा गया जो उन्हें बहुत पसंद है. रामलला को होली के उपलक्ष्य में विशेष पकवान का भी भोग लगाया गया. 

दोपहर को करीब 12 बजे रामलला को बाल भोग में बाके बिहारी मंदिर से आये विशेष मिष्ठान व कचौड़ी का भोग लगाया गया. विशेष पकवान के तौर पर उन्हें पूड़ी, सब्जी, खस्ता, पेड़ा, लड्डू, पंचमेवा और विशेष खीर का भोग लगाया गया.

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