RSS खोलेगा आर्मी स्‍कूल, कहा- अगर कोई इसको हिंदुत्‍व से जोड़ना चाहता है तो...

उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में अप्रैल से शुरू होने वाले राष्ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ (आरएसएस) द्वारा संचालित पहले 'आर्मी स्कूल' की शिक्षा का 'संस्कार', 'संस्कृति' और 'समरसता' मूल होंगे, जो देश के भावी जवानों को दिए जाएंगे.

RSS खोलेगा आर्मी स्‍कूल, कहा- अगर कोई इसको हिंदुत्‍व से जोड़ना चाहता है तो...
फाइल फोटो

मोहित गोमत, बुलंदशहर: सेवा भारती के तत्वाधान और राष्ट्रीय सेवक संघ के निर्देशन में एक सैनिक स्कूल का निर्माण किया जा रहा है जोकि सीबीएसई पैटर्न पर संचालित होगा. इस स्कूल में बच्चों की ट्रेनिंग अप्रैल माह से शुरू की जाएगी. इस स्कूल के पहले सत्र में कक्षा 6 में करीब 160 छात्रों का ऑनलाइन पंजीकरण किया जाएगा. जिनकी शिक्षा चार खंडों में की जाएगी.

इन छात्रों को कक्षा 6 से 12 तक की शिक्षा दी जायेगी. इसके अलावा स्कूल में देश की सभी सेनाओं के लिए यानी कि आर्मी, नेवी और एयरफोर्स के लिए छात्रों को प्रशिक्षित किया जाएगा. स्कूल पूर्णतः आवसीय होगा. स्कूल का नाम संघ के पूर्व सर संघ संचालक रज्‍जू भैया के नाम पर रखा गया है. पूर्व सरसंघ चालक रज्जू भैया जिला बुलंदशहर के ही मूल निवासी थे. जोकि तहसील शिकारपुर से कुछ दूरी स्थित बनैल गांव के निवासी थे. जब हमने इससे जुड़े पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से बात की तो उन्होंने इसकी बात की पुष्टि की और साथ ही बताया कि किस किस तरीके से इसका विकास और परिदृश्य मस्तिष्क में रख निर्माण किया जा रहा है.

आरएसएस सैनिक स्कूल में पड़ने वाले छात्रों को शिक्षा के साथ साथ आर्म्ड फोर्सेस की ट्रेनिंग देने का उद्देश्य केवल देश की सेवा के लिए होगा, जिनका शिक्षा पूर्ण करने के बाद देश की सैन्य सेवाओं के लिए चयन किया जाएगा. स्कूल के लिए शिकारपुर के गांव खंडवाया के ही एक पूर्व सैनिक राजपाल सिंह ने 32 बीघा जमीन को स्कूल के लिए दान में दिया है.

राष्ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ (आरएसएस) द्वारा संचालित पहले 'आर्मी स्कूल' की शिक्षा का 'संस्कार', 'संस्कृति' और 'समरसता' मूल होंगे, जो देश के भावी जवानों को दिए जाएंगे. इस स्कूल को रज्जू भैया सैनिक विद्या मंदिर (आरबीएसवीएम) के नाम से जाना जाएगा और यह अपनी तरह का पहला स्कूल होगा, जिसे आरएसएस द्वारा संचालित किया जाएगा. रज्जू भैया, आरएएस के पूर्व प्रमुख थे.

आरएसएस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "हम चाहते हैं कि रक्षा बलों में शामिल होने के इच्छुक लोगों को उचित संस्कार, संस्कृति व समरसता की शिक्षा मिले, जिससे हमारे रक्षा बल आने वाले सालों में ज्यादा मजबूत हों." उन्होंने कहा, "विचार शिक्षा के साथ-साथ नैतिक व आध्यात्मिक मार्गदर्शन छात्रों को देना है और यह सिर्फ आवासीय स्कूलों में संभव है."

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संघ कार्यकर्ता छात्रों को नैतिक व आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रदान करेंगे, जो उन्हें सशस्त्र बलों के करियर में डटकर मुकाबला करने में मदद देगा. यह पूछे जाने पर कि नैतिक व आध्यात्मिक मार्गदर्शन हिंदुत्व के सबक में निहित होगा तो कार्यकर्ता ने कहा, "हमारा ध्यान राष्ट्रभक्ति पर केंद्रित है और अगर कोई इसे हिंदुत्व के साथ तुलना करना चाहता है तो यह उसकी मुश्किल है."

(इनपुट: एजेंसी आईएएनएस के साथ)