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एक गांव में फैली अफवाह ने बदल दी इस बच्चे की जिंदगी, अंधविश्वास में छीन रहा मासूम का बचपन

बाल संरक्षण समिति कौशाम्बी (सीडब्लूसी) के सदस्य मोहम्मद रेहान के मुताबिक उनकी जानकारी में यह मामला आया है वह वहां सोमवार को जाएंगे और पूरे मामले की जानकारी लेंगे

एक गांव में फैली अफवाह ने बदल दी इस बच्चे की जिंदगी, अंधविश्वास में छीन रहा मासूम का बचपन
कौशांबी के बेरुई गांव का यह मासूम एक अफवाह की वजह से हो रहा परेशान

अजय कुमार, कौशांबी: कौशांबी के बेरुई गांव में एक छह साल के मासूम बच्चे की बचपन की आजादी छिन गई है. वजह एक अफवाह है. इलाके में अफवाह फैली है कि बेरुई गांव के गोलू नाम के बच्चे के पास एक ऐसी अलौकिक शक्ति है कि जिसके छूने मात्र से असाध्य रोग पल भर में ठीक हो जाता है. बच्चे के हाथों का स्पर्श पाने के लिए कौशांबी समेत आस-पास के जनपदों के हजारों लोग भीड़ की शक्ल में उसके घर पहुंच रहे हैं. पिछले पंद्रह दिनों से जारी इस घटनाक्रम में बच्चा न तो स्कूल जा पा रहा है और न ही भर पेट भोजन कर पा रहा है. लोग रोग से छुटकारा पाने की चाह में उस बच्चे को सोने तक नहीं दे रहे हैं. जिसके बाद बच्चे के मौलिक अधिकार के हनन के मामले में बाल संरक्षण समिति ने मौके पर जाकर बच्चे को जेजे एक्ट के प्राविधानों के तहत कार्यवाही का भरोसा दिया है.

बच्चे की मां गोमती देवी का कहना है कि भीड़ बच्चे को न तो खाना खाने देती है और ना ही पानी पीने देती है. यही भीड़ उस बच्चे को नहीं सोने भी नहीं देती है. गोमती देवी कहती हैं, "हम कहते हैं कि मेरे बच्चे को 1 घंटे का समय दे दो ताकि वह सो ले लेकिन भीड़ मानती नहीं है. मेरे बच्चे को मास्टर ने स्कूल में पढ़ाने के लिए जवाब दे दिया. उन्होंने कहा कि जब तक भीड़ कम ना हो जाए तब तक स्कूल पढ़ने के लिए मत भेजना. क्योंकि जब वह स्कूल आता है तो भीड़ यहां भी उसको घेर लेती है. ऐसी स्थिति में अगर बच्चे को कुछ हो जाएगा तो हमारी जिम्मेदारी नहीं है." गोमती देवी यह भी बताती हैं कि उनका बच्चा गांव के कुछ बच्चों के साथ खेल-खेल में किसी बच्चे का हाथ छू कर ठीक कर दिया जिसके बाद से गांव के ही बच्चों और कुछ लोगों ने उसका वीडियो बना कर वायरल कर दिया. उसी घटना के बाद से लोगों की भीड़ थमने का नाम नहीं ले रही है. 

गांव के स्कूल की रसोईया सपना देवी बताती हैं, "जो बच्चा गांव में लोगो को छूकर इलाज करता है वह यहीं पर पढ़ता है. लेकिन, अब पढ़ने स्कूल में नहीं आता है. क्योंकि एक दिन मास्टर साहब ने उसे स्कूल आने से मना कर दिया है. क्योंकि वह जब स्कूल आता है तो उसके साथ 50 लोग आकर उसे घेर लेते हैं. ऐसी स्थिति में बच्चे को अगर कुछ हो गया तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा."

इलाज कराने आई महिला रीता देवी के मुताबिक वह यहां एक वृद्ध के साथ दो दिन पहले आई थीं. जिसका हाथ नहीं उठता था बाबा ने उसे छू लिया उसके बाद उसका हाथ ठीक हो गया और उठने लगा. जिसके बाद रविवार को वह फिर आई हैं इलाज कराने के लिए. यह बाबा कोई और नहीं महज 6 साल का वही बच्चा है. जिसके बारे में अफवाह फैली हुई है कि उसके छूने मात्र से कई तरह के रोग ठीक हो जाते हैं. बच्चे के पास सुपर नेचुरल पावर होने के अंधविश्वास से ग्रसित मरीज संतलाल के मुताबिक उस बच्चे के पास ऐसी शक्तियां हैं कि वह पढ़ भी सकता है. विद्वान भी हो सकता है. उसको स्कूल जाने की क्या जरूरत है.

बाल संरक्षण समिति कौशाम्बी (सीडब्लूसी) के सदस्य मोहम्मद रेहान के मुताबिक उनकी जानकारी में यह मामला आया है वह वहां सोमवार को जाएंगे और पूरे मामले की जानकारी लेंगे. घटना के अनुसार बच्चे को जेजे एक्ट के तहत सारे अधिकार दिलाने की कोशिश की जाएगी. आपको बता दें कि जेजे एक्ट में बच्चे के जीवन खान-पान एवं सुरक्षा के साथ बेहतर परवरिश का अधिकार मिलता है.

कौशांबी के बेरुई गांव में गोलू नाम के बच्चे के असाधारण होने की बात महज एक कोरी अफवाह ही है. लेकिन, इसके बाद भी दिन-प्रति-दिन दूर-दराज के लोगों का मजमा अव्यवस्थित रूप से बढ़ता ही जा रहा है. लोग दावा करते हैं कि बच्चे के पास कुछ दैविक शक्ति है जिससे उनके शरीर की व्याधि दूर हो रही है. अंधविश्वास के मकड़जाल में उलझे हजारों लोग बिना किसी रोकटोक के गांव में मासूम बच्चे को दिन-रात घेरे रहते हैं. उनकी चाहत होती है कि किसी तरह से बच्चा उन्हें स्पर्श कर ले और उनके शरीर की वह व्याधि या रोग ठीक हो जाए जिसे मेडिकल साइंस ठीक नहीं कर रही है.