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पैर से कलम चला पूरी की पढ़ाई, अब गरीब बच्चों को मुफ्त शिक्षा दे रही दिव्यांग साजिदा

छोटी सी उम्र में दोनों हाथ की अंगुलियां कटने के बाबजूद साजिदा ने अपना हौसला नहीं खोया. बल्कि चारा मशीन में कटने से बचे सिर्फ एक अंगूठे और पैर की अंगुलियों की मदद से लिखाई-पढ़ाई कर ग्रेजुएशन किया.  

पैर से कलम चला पूरी की पढ़ाई, अब गरीब बच्चों को मुफ्त शिक्षा दे रही दिव्यांग साजिदा
साजिदा पैर की अंगुलियों के सहारे सारे काम करती है.

संभल: यूपी के संभल की दिव्यांग साजिदा अपने बुलंद हौसले और जुनून से दिव्यांगो के लिए प्रेरणा बन गई हैं. संभल जिले के चंदौसी तहसील के एक गांव के किसान की बेटी साजिदा जिसके दोनों हाथ की अंगुलियां 8 साल की उम्र में चारा काटने की मशीन से कट गए थे. इतनी छोटी सी उम्र में दोनों हाथ की अंगुलियां कटने के बाबजूद साजिदा ने अपना हौसला नहीं खोया. बल्कि चारा मशीन में कटने से बचे सिर्फ एक अंगूठे और पैर की अंगुलियों की मदद से लिखाई-पढ़ाई कर ग्रेजुएशन किया.  

साजिदा ने सिर्फ पढ़ाई ही नहीं की बल्कि टेलरिंग-क्राफ्टिंग जैसे तमाम कामों में भी महारत हासिल की. दिव्यांग साजिदा आज अपने हुनर की बदौलत अपनी शिक्षा को जारी रखते हुए परिवार की आर्थिक मदद भी कर रही है. वह गांव के गरीब बच्चों को अपने घर नि: शुल्क पढ़ाती है.

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संभल जनपद के चंदौसी तहसील के छोटे से गांव जनेटा के किसान मोहम्मद हनीफ ने बताया कि उनकी लाडली बेटी साजिदा जब 8 साल की थी, उस दौरान पशुओं के लिए चारा काटने में मां की मदद के दौरान उसके दोनों हाथ मशीन में फंस गए. दोनों हाथों की अंगुलियां कट गईं सिर्फ एक अंगूठा ही बचा रहा. उन्होंने बताया कि मासूम बच्ची ने अपना हौसला नहीं खोया, बल्कि अपने सपनों को पूरा करने के लिए अपने हाथ की कटी हथेलियों के बचे अंगूठे को अपना मददगार बना लिया. 

साजिदा ने अपने एक अंगूठे और पैर की अंगुलियों की मदद से लिखने की प्रैक्टिस शुरू कर दी. दिन-रात मेहनत ग्रेजुएशन कम्प्लीट किया. पढाई के साथ-साथ उसने टेलरिंग और क्राफ्टिंग का हुनर भी सीखा. अपने हुनर से साजिदा अपने परिवार की आर्थिक मदद तो करती ही है साथ ही गांव के गरीब बच्चों को मुफ्त में पढ़ाकर परोपकार का काम भी कर रही है.

जी मीडिया से बातचीत में साजिदा ने बताया कि वह उसका सपना शिक्षक बनने का है. शिक्षिका बनकर ग्रामीण क्षेत्रों के उन गरीब बच्चों खासकर दिव्यांग बच्चों को शिक्षा उपलब्ध कराना है जो कि गरीबी और दिव्यांगता के चलते शिक्षा से महरूम हैं.

दिव्यांग साजिदा ने सरकार से भी अपील की है कि सरकार  दिव्यांग बच्चों की शिक्षा पर विशेष ध्यान दे. साजिदा के पिता  मोहम्मद हनीफ अपनी दिव्यांग बेटी साजिदा पर गर्व करते हुए कहते हैं कि उनकी बेटी अपने हौसले की बदौलत गांव के बच्चों खासकर दिव्यांग बच्चों और बेटियों के लिए प्रेरणा बन गई है. महिला हेल्प लाइन 1090 की जिला कोआर्डिनेटर और समाज सेवी संगीता भार्गव साजिदा की तारीफ करते हुए कहती हैं कि उसकी सकरात्मक सोच और बुलंद हौसला दिव्यांगों और बेटियों के लिए एक नजीर है.