हजार साल सुरक्षित रहे राम मंदिर वैज्ञानिक कर रहे रिसर्च, नींव के लिए IIT और CBRI की ली जा रही मदद

राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महामंत्री चम्पत राय के अनुसार, लार्सन एंड टूब्रो कंपनी राम मंदिर निर्माण के लिए आईआईटी चेन्नई और CBRI रुड़की के सहयोग से नींव की ड्राइंग तैयार कर रही है.

हजार साल सुरक्षित रहे राम मंदिर वैज्ञानिक कर रहे रिसर्च, नींव के लिए IIT और CBRI की ली जा रही मदद
IIT चेन्नई में इस पर भी रिसर्च हो रहा है कि राम मंदिर निर्माण में कौन से सीमेंट, पत्थर, गिट्टी और किस नदी के मौरंग का इस्तेमाल किया जाएगा.

अयोध्या: रामनगरी अयोध्या में भगवान राम का मंदिर दिव्य और भव्य के साथ-साथ मजबूत बने इसके लिए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट कोई कसर नहीं छोड़ रहा है. यही वजह है कि राम मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट IIT चेन्नई और सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च रुड़की का सहयोग ले रहा है. भव्य राम मंदिर की नींव को लेकर IIT चेन्नई और CBRI(Central Building Research Institute) रुड़की के वैज्ञानिक, प्रोफेसर रिसर्च कर रहे हैं, जिसकी रिपोर्ट आने के बाद ही राम मंदिर निर्माण की नींव रखने का काम शुरू किया जाएगा.

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राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महामंत्री चम्पत राय के अनुसार, लार्सन एंड टूब्रो कंपनी राम मंदिर निर्माण के लिए आईआईटी चेन्नई और CBRI रुड़की के सहयोग से नींव की ड्राइंग तैयार कर रही है. राम मंदिर 1000 वर्ष तक सुरक्षित रहे इसके लिए वैज्ञानिक कार्य कर रहे हैं. आईआईटी चेन्नई ने 60 मीटर गहराई से मिट्टी के सैंपल लिए हैं. मिट्टी के सैंपल से मिट्टी की ताकत को मापने का काम किया गया है. साथ ही भूकंप में भी राम मंदिर सुरक्षित रहे इसे लेकर CBRI स्टडी कर रहा है. जिसकी रिपोर्ट जल्द ही राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंपी जाएगी.

जितने हिस्से में राम मंदिर का निर्माण होना है उसमें 1200 स्थानों को चिन्हित किया गया है. इन 1200 स्थानों पर 35 मीटर की कंक्रीट पाइलिंग की जाएगी. प्रति खम्भे के लिए 1 मीटर का डायमीटर बनाया जाएगा. साथ ही धरती के नीचे 100 फिट तक गिट्टी को गलाया जाएगा, जिससे वह चट्टान बन जाए. मंदिर निर्माण में लोहे का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा क्योंकि लोहे की आयु 100 वर्ष के करीब होती है और मंदिर की आयु 1000 वर्ष हो ऐसी निर्माण सामग्री का प्रयोग किया जाएगा.

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IIT चेन्नई में इस पर भी रिसर्च हो रहा है कि राम मंदिर निर्माण में कौन से सीमेंट, पत्थर, गिट्टी और किस नदी के मौरंग का इस्तेमाल किया जाएगा. यह माना जा रहा है कि रॉबर्ट्सगंज, डाला और बुंदेलखंड की गिट्टी, बेतवा-केन नदी की मौरंग राम मंदिर निर्माण में प्रयोग के लिए अच्छी है. साथ ही मंदिर निर्माण में स्टैंडर्ड कंपनी के सीमेंट का इस्तेमाल किया जाएगा.

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