शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जवाद ने खत्म किया धरना, योगी सरकार ने मानी सभी मांगें

मौलाना कल्बे जवाद ने मुहर्रम के महीने में मातम, मजलिसें और ताजियों के जुलूस पर सरकार की ओर से रोक लगाए जाने पर नाराजगी जाहिर की थी और लखनऊ के इमामबाड़ा में धरने पर बैठ गए थे. योगी सरकार ने ये पाबंदियां कोरोना महामारी को ध्यान में रखकर जारी की थीं.

शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जवाद ने खत्म किया धरना, योगी सरकार ने मानी सभी मांगें
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जवाद नकवी. (File Photo)

लखनऊ: शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जवाद नकवी ने शनिवार देर रात लखनऊ के इमामबाड़ा में जारी अपना धरना प्रदर्शन खत्म करने का ऐलान किया. उन्होंने कहा कि योगी सरकार ने उनकी सारी मांगें मान ली हैं, इसके बाद वह अपना धरना खत्म कर रहे हैं. मौलाना कल्बे जवाद ने कहा कि योगी सरकार ने घरों में रखे ताजिए रखने की इजाजत दे दी है, जबकि सोशल डिस्टेंसिंग के साथ मजलिसों का आयोजन भी हो सकेगा. मौलाना के एलान के बाद धरना स्थल पर बैठे सभी अजादारी अपने घरों को वापस लौट गए.

योगी सरकार ने गृह सचिव को मुहर्रम की जिम्मेदारी सौंपी
धरने पर बैठे मौलाना कल्बे जव्वाद की मांगें मानते हुए सरकार ने यूपी के सभी जिलों के लिए नया आदेश जारी कर दिया. नए आदेश के मुताबिक घरों में ताजिए रखने और अजादारी पर कोई प्रतिबंध नहीं रहेगा. सरकार ने सभी जिलों के उलेमाओं की लिस्ट फोन नंबर के साथ मांगी है. उलेमाओं को 24x7 कभी भी किसी समस्या के लिए कॉल की जा सकती है. गृह सचिव को विशेष तौर पर मुहर्रम के लिए नियुक्त किया गया है. सवा 2 महीने तक मुहर्रम की व्यवस्था पर गृह सचिव 24 घंटे   नजर रखेंगे. सभी उलेमा अपने जिलों के एसपी और एसएसपी से व्यवस्थाओं को लेकर मुलाकात करेंगे.

मुहर्रम को लेकर योगी सरकार की गाइडलाइंस के खिलाफ धरने पर बैठे मौलाना कल्बे जवाद नकवी

योगी सरकार के फैसले के खिलाफ धरने पर बैठे थे मौलाना कल्बे जवाद
आपको बता दें कि मौलाना कल्बे जवाद ने मुहर्रम के महीने में मातम, मजलिसें और ताजियों के जुलूस पर सरकार की ओर से रोक लगाए जाने पर नाराजगी जाहिर की थी और लखनऊ के इमामबाड़ा में धरने पर बैठ गए थे. योगी सरकार ने ये पाबंदियां कोरोना महामारी को ध्यान में रखकर जारी की थीं. मौलना जवाद की सरकार से मांग थी कि मातम, मजलिस और ताजिया रखने के लिए सरकार इजाजत दे. उन्होंने कहा था कि यदि सरकार उनकी मांगें नहीं मानती है तो वह अपनी गिरफ्तारी देंगे. अब योगी सरकार ने उनकी मांगें मान ली हैं.

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जानें क्यों मनाया जाता है मुहर्रम, क्यों निकालें जाते हैं जुलूस-ताजिए
इस्लामिक कैलेंडर का नया साल यानी मुहर्रम का महीना 21 अगस्त से शुरू हो गया है. हजरत इमाम हुसैन समेत कर्बला के 72 शहीदों की याद में गमजदा होने की वजह से शिया मुसलमान इस्लामिक कैलेंडर के नए साल के पहले महीने कोई खुशियां नहीं मनाते. पूरे महीने गम में डूबे रहते हैं. मुहर्रम के महीने में शिया समुदाय के लोग मातम और मजलिसें करते हैं और ताजियों के साथ जुलूस निकालते हैं. कोरोना महामारी के कारण सरकार ने इस वर्ष मातम, मजलिसें और ताजियों के जुलूस पर रोक लगाई ​थी.

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