close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

शिया वक्‍फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी ने AIMPLB पर प्रतिबंध लगाने की मांग की

AIMPLB की हर जिले में शरिया अदालतें खोलने की योजना पर वसीम रिजवी ने साधा निशाना.

शिया वक्‍फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी ने AIMPLB पर प्रतिबंध लगाने की मांग की
वसीम रिजवी ने ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड पर बोला हमला.

लखनऊ : हर जिले में शरिया अदालतें खोलने की योजना पर शिया वक्‍फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी ने ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) पर निशाना साधा है. वसीम रिजवी का कहना है कि AIMPLB पर प्रतिबंध लगा दिया जाए. उन्‍होंने यह भी कहा कि पर्सनल लॉ बोर्ड के सभी सदस्‍यों पर देशद्रोह का केस दर्ज किया जाए. वसीम रिजवी ने कहा कि शरई अदालतें संविधान को चुनौती देती हैं. उन्‍होंने कहा कि पर्सनल लॉ बोर्ड को ऐसी अदालतें खोलने और मौलवी की नियुक्ति करने का कोई अधिकार नहीं है.

इससे पहले भी वसीम रिजवी ने ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) को आतंकी संगठन बताया था. उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान और सऊदी अरब के आंतकी संगठन भारत के मुस्लिमों से संबंधित फैसले करते हैं. उन्होंने कहा था कि AIMPLB उन्हीं आतंकी सगंठनों की ब्रांच है. बता दें कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्‍य जफरयार जिलानी ने रविवार को मीडिया से बातचीत में कहा था कि बोर्ड मुस्लिमों की समस्‍याओं को दूर करने के लिए हर जिले में शरिया अदालतें खोलने की योजना बना रहा है. उनके इस बयान के बाद सियासी गलियारों में हलचल बढ़ गई थी.

AIMPLB के इस बयान पर बीजेपी ने भी हमला बोला था. बीजेपी प्रवक्‍ता मीनाक्षी लेखी ने कहा था कि 'आप धार्मिक मामलों पर चर्चा कर सकते हैं लेकिन इस देश में न्‍यायपालिका का महत्‍व है. देश के गांवों और जिलों में शरिया अदालतों का कोई स्‍थान नहीं है. देश की अदालतें कानून के अंतर्गत कार्य करती हैं. हमारा देश इस्‍लामिक रिपब्लिक ऑफ इंडिया नहीं है'.

वहीं इस मामले में ऑल इंडिया मुस्लिम लॉ बोर्ड के सदस्‍य जफरयाब जिलानी ने सफाई दी थी. उनका कहना है 'हम इन्‍हें शरिया अदालत नहीं कहते. ये दारुल कजा हैं. इनमें काजी लोगों के वैवाहिक मतभेद और झगड़े सुलझाता है और अगर मामले का निपटारा नहीं हो पाता तो अलग होने के रास्‍ते सुझाता है'. जफरयाब जिलानी ने यह भी कहा कि ऑल इंडिया पर्सनल लॉ बोर्ड ने इस तरह की व्‍यवस्‍था 1993 में शुरू की थी. यह कोई नई बात नहीं है. केंद्र सरकार का इससे कोई लेना देना नहीं है'. उनका कहना है 'इसे सुप्रीम कोर्ट ने भी जारी रखने की अनुमति दी थी. सुप्रीम कोर्ट ने पाया था कि यह को समानांतर कोर्ट नहीं है'.