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सोनभद्र मामला Exclusive : पिछली सरकार में शासन को सौंपी गई थी वन क्षेत्र की रिपोर्ट, अब तक दबी पड़ी है

ये रिपोर्ट तत्कालीन वन संरक्षक एके जैन ने ओबरा और रेनुकूट इलाके में करीब 25 हजार हेक्टेयर वन जमीन को धोखे से निजी लोगों के हवाले कर दिए जाने के घोटाले से जुड़ी थी. 

सोनभद्र मामला Exclusive : पिछली सरकार में शासन को सौंपी गई थी वन क्षेत्र की रिपोर्ट, अब तक दबी पड़ी है
सोनभद्र की घटना पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि वहां 1952 से लेकर अब तक के जमीन के रिकॉर्ड जांचे जाएंगे.

लखनऊ: सोनभद्र में हुए नरसंहार के बाद योगी सरकार बेहद गंभीर है. सोनभद्र मामले में जी न्यूज के हाथ एक्सक्लूसिव जानकारी हाथ लगी है. सोनभद्र की घटना पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि वहां 1952 से लेकर अब तक के जमीन के रिकॉर्ड जांचे जाएंगे. इसके बावजूद हैरानी की बात ये है कि वहां वन जमीन की हेराफेरी कर राज्य को करीब 10 हजार करोड़ की चपत लगाने के मामले में पांच साल पुरानी एक रिपोर्ट को प्रशासन अभी तक दबाए बैठा है.

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ये रिपोर्ट तत्कालीन वन संरक्षक एके जैन ने ओबरा और रेनुकूट इलाके में करीब 25 हजार हेक्टेयर वन जमीन को धोखे से निजी लोगों के हवाले कर दिए जाने के घोटाले से जुड़ी थी.

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रिपोर्ट में आरोप लगाया था कि 1987 में वन बंदोबस्त अधिकारी के जरिए सरकारी जमीन पर कब्जा किए हुए लोगों ने खुद को कानूनन जमीन का मालिक घोषित करा लिया. भारतीय वन अधिनियम-1927 की धारा-4 के तहत जो जमीन वन भूमि घोषित की गई थी उसे सुप्रीम कोर्ट की इजाजत के बिना किसी को नहीं दिया जा सकता.

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रिपोर्ट में दावा किया गया कि वन बंदोबस्त अधिकारी से मिलीभगत कर इस जमीन को कुछ नियमों की आड़ लेकर रसूखदार लोगों ने अपने नाम करा ली,  जिससे करीब 10 हजार करोड़ रुपये की कीमत की 25 हजार हेक्टेयर की सरकारी जमीन पर कब्जा हो गया है.