काशी में बोले स्वामी, अगली बार बीएचयू आऊंगा, तब तक राम मंदिर निर्माण शुरू हो जाएगा

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में “श्री राम जन्मभूमि मंदिर–स्थिति एवं संभावनाएं” विषय पर आयोजित व्याख्यान कार्यक्रम हिस्सा लेने पहुंचे सुब्रह्मण्यम स्वामी ने ये तमाम बातें कहीं.

काशी में बोले स्वामी, अगली बार बीएचयू आऊंगा, तब तक राम मंदिर निर्माण शुरू हो जाएगा

उत्कर्ष चतुर्वेदी, वाराणसी : राज्यसभा सांसद और बीजेपी नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी ने कहा कि अगर कोई सरकार राम मंदिर के मामले में ठोस पहल कर सकती है और राम मंदिर का मार्ग प्रशस्त कर सकती है तो वो सिर्फ वर्तमान में केंद्र की बीजेपी सरकार है. चुनाव के वक्त लोगों को राम मंदिर पर काफी कुछ कहकर बहकाया जाएगा, लेकिन लोगों को राम मंदिर के साथ साथ मोदी सरकार पर भी अपना विश्वास बरकरार रखना चाहिए. शनिवार को बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में “श्री राम जन्मभूमि मंदिर–स्थिति एवं संभावनाएं” विषय पर आयोजित व्याख्यान कार्यक्रम हिस्सा लेने पहुंचे सुब्रह्मण्यम स्वामी ने ये तमाम बातें कहीं.

स्वामी के भाषण के केंद्र में राम मंदिर ही था. स्वामी ने विश्वास भी जताया कि उनके अगली बार बीएचयू में किसी कार्यक्रम में आने से पहले मंदिर का निर्माण शुरू हो जाएगा. सुब्रह्मण्यम स्वामी ने यहां तक कहा कि सुप्रीम कोर्ट में लगी उनकी पीटिशन पर सुनवाई शुरू होने के एक सप्ताह में ही वह राम मंदिर के पक्ष में फैसला ला देंगे. तमाम उन तर्कों को जो कि कोर्ट में हिंदू पक्ष की ओर से दिए गए हैं, स्वामी ने लोगों के सामने रखा. सुब्रह्मण्यम स्वामी से पहले कार्यक्रम में बोलते हुए विश्व हिंदू परिषद के उपाध्यक्ष चंपत राय ने कहा कि राम मंदिर केवल आस्था का नहीं बल्कि स्वाभिमान का प्रश्न है. चंपत राय ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर भारत की मूंछों का सवाल है.

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माना जा रहा है कि इन दोनों वक्ताओं ने अपने भाषण संघ के उस रोडमैप को ध्यान में रखते हुए दिए गए हैं जो कि पिछले दिनों संघ की बैठक में तय हुआ था. संघ ने साफतौर पर कहा था कि अब राम मंदिर के सवाल को टाला नहीं जा सकता है. लोगों के बीच ये विषय इस तरीके से ना पहुंच जाए कि विपक्षी पार्टियां इसे आधार बना कर बीजेपी को ही अगले चुनाव से पहले घेर लें. ऐसे में संघ ने मंदिर के मामले पर रणनीति बनाई है कि अब लोगों के बीच खुद ही इस विषय पर खुलकर बात की जाएगी, ताकि आम लोगों में ये मैसेज भी जाए कि इस विषय को अभी भी छोड़ा नहीं गया है वहीं ये बात भी साफ हो जाए कि मामला सरकार से ज्यादा अदालत के पास होने के चलते फंसा हुआ है.

सुब्रह्मण्यम स्वामी और चंपत राय दोनों ने ही इलाहाबद हाईकोर्ट के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट में लगातार कांग्रेस की ओर से देरी की वजह से इस मामले में कोई फैसला जल्द नहीं हो पा रहा है. स्वामी ने तो यहां तक दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट से आधा रास्ता साफ हो चुका है अब आधा रास्ता पार करना ही बाकि है. वहीं चंपत राय ने अयोध्या में राम मंदिर को आस्था से उपर गुलामी की निशानी से पार पाना तक बता दिया. उन्होंने कहा कि मुगलों का इतिहास पढ़ने की जगह हमें अपना इतिहास पढ़ने की जरूरत है.

इतना तो साफ है कि दोनों वक्ताओं की तर्ज पर आने वाले दिनों में राम मंदिर को लेकर कई और बयान सामने आ सकते हैं. राम मंदिर पर संघ के बने रोडमैप पर तमाम हिंदूवादी संगठनों और बीजेपी के नेताओं ने चलना शुरू कर दिया है. ऐसे में राम मंदिर मामले से जुड़े दो बड़े चेहरों का सरकार का बचाव करना और मामले में देरी की वजह मामले का कोर्ट में होना बताता है कि संघ जिस राम मंदिर के मुद्दे को हाथ से फिसलने नहीं देना चाहता है उस राह पर अब उनके नेताओं ने भी चलना शुरू कर दिया है.