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SC की उत्तराखंड सरकार को फटकार; पूछा- रोक के बावजूद कैसे बना दी राजाजी पार्क में सड़क

सुप्रीम कोर्ट ने सड़क निर्माण पर रोक लगाते हुए कहा कि केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय से अनुमति लेने के बाद ही निर्माण कार्य करें.

SC की उत्तराखंड सरकार को फटकार; पूछा- रोक के बावजूद कैसे बना दी राजाजी पार्क में सड़क
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड सरकार के निर्माण संबंधी आदेश को भी रद्द कर दिया.

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड सरकार से राज्य में गढ़वाल एवं कुमाऊं मंडलों को सीधे आपस में जोड़ने वाली कंडी रोड के लालढांग-चिलरखाल हिस्से के अपने निर्माण आदेश को वापस लेने को कहा है. कोर्ट ने राज्य सरकार को वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से सड़क निर्माण के लिए मंजूरी लेने का आदेश दिया है. दरअसल, सोमवार को सुनवाई के दौरान सेंट्रल इम्पोवरमेंट कमेटी (CEC) की रिपोर्ट देखने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड सरकार से पूछा कि जब आपने हमसे वादा किया था कि वहां एक इंच भी सड़क नहीं बनेगी, तो वहां सात मीटर ब्रिज कैसे बन गया? 

इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने सड़क निर्माण पर रोक लगाते हुए कहा कि केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय से अनुमति लेने के बाद ही निर्माण कार्य करें. सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड सरकार के निर्माण संबंधी आदेश को भी रद्द कर दिया. पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने CEC की अर्जी पर उत्तराखंड सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था और सड़क निर्माण पर रोक लगा दी थी. 

 

दरअसल, उत्तराखंड के राजाजी नेशनल पार्क एरिया में सड़क का निर्माण कार्य चल रहा था. इससे पहले इस सड़क के निर्माण को लेकर उत्तराखंड वन विभाग की ओर से दिए गए जवाब से नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अॅथोरिटी (एनटीसीए) संतुष्ट नहीं था. अथॉरिटी ने राजाजी टाइगर रिजर्व के बफर जोन से गुजरने वाली इस सड़क के निर्माण में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम और वन अधिनियम में निहित प्रावधानों के अनुरूप कदम उठाने के निर्देश दिए थे.

उत्तराखंड सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल है कंडी रोड
(रामनगर-कालागढ़-कोटद्वार- लालढांग) के राजाजी टाइगर रिजर्व से लगे लैंसडौन वन प्रभाग के अंतर्गत आने वाले 11 किमी लंबे गैर विवादित हिस्से लालढांग-चिलरखाल (कोटद्वार) के निर्माण को सरकार ने पहल की थी. इसके लिए लोनिवि को सवा छह किमी सड़क के लिए वनभूमि हस्तांतरित की गई थी. डामरीकरण के साथ ही तीन पुलों के निर्माण को धनराशि जारी की गई थी. वन विभाग की ओर से 31 मई को एनटीसीए को भेजे गए जवाब में कहा गया था कि लालढांग-चिलरखाल मार्ग के सुदृढ़ीकरण का कार्य पारिस्थितिकीय रूप से पूर्णतया पोषणीय (कंप्लीटली सेस्टेनेबल) है. 

इसी कारण वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत इसके लिए वाइल्डलाइफ क्लीयरेंस लेने की जरूरत नहीं समझी गई. साथ ही इस प्रकरण में वृक्षों का पातन न होने, संबंधित कार्य से भूमि कटाव की रोकथाम होने, कलवर्ट व क्रॉस ड्रेनेज निर्माण से वन्यजीवों का आवागमन सुलभ होने, वनकर्मियों द्वारा वन्यजीवों की सुरक्षा को वर्षाकाल में नियमित गश्त की सुगमता का हवाला दिया गया था.