पुलवामा हमला: पंकज की शहादत पर परिवार को है गर्व, नक्शेकदम पर चलने को तैयार छोटा भाई

पिछले वर्ष पुलवामा हमले में शहीद हुए पंकज त्रिपाठी के बारे में जिसके परिजन आज भी अपने बेटे के जान का बदला पाकिस्तान से लेने के लिए तैयार बैठे हैं. शहीद पंकज के पिता का कहना है कि उनका एक बेटा तो देश के लिए शहीद हो गया लेकिन वह दूसरे बेटे को भी सेना में भेजेने के लिए तैयार हैं.

पुलवामा हमला: पंकज की शहादत पर परिवार को है गर्व, नक्शेकदम पर चलने को तैयार छोटा भाई
शहीद पंकज त्रिपाठी

महराजगंज: जब एक वीर जवान अपने देश की अस्मिता की रक्षा करते हुए अपनी जान की आहुति दे देता है तो मरता नहीं अमर हो जाता है और हमेशा के लिए लोगों के दिल मे बस जाता है. उसकी शौर्य गाथाएं इतिहास के पन्नों में दर्ज हो जाती हैं. 

हम बात कर रहे है पिछले वर्ष पुलवामा हमले में शहीद हुए पंकज त्रिपाठी के बारे में जिसके परिजन आज भी अपने बेटे के जान का बदला पाकिस्तान से लेने के लिए तैयार बैठे हैं. शहीद पंकज के पिता का कहना है कि उनका एक बेटा तो देश के लिए शहीद हो गया लेकिन वह दूसरे बेटे को भी सेना में भेजेने के लिए तैयार हैं. वहीं शहीद पंकज का छोटा भाई अपने भाई की मौत का बदला पाकिस्तान से लेने के लिए सेना में जाने की तैयारी कर रहा है.

यूपी के महराजगंज जिले के फरेंदा क्षेत्र के हरपुर बेलहिया निवासी पंकज त्रिपाठी पुलवामा हमले में शहीद हो गए थे. वह सीआरपीएफ में चालक के पद पर तैनात थे. वर्ष 2016 में पंकज को पुत्र की प्राप्ति हुई थी. पंकज अपने पीछे प्रतीक के रूप में एक बेटा और पत्नी छोड़ गए. पकंज के शहादत के समय पत्नी रोहिणी गर्भवती थी. कुछ समय बाद शहीद के घर किलकारी गूंजी और शहीद की पत्नी ने बेटी को जन्म दिया.

 

 

पत्नी द्वारा शहीद के बारे में बताते हुए उनकी आंखे नम हो जाती हैं. शहीद की पत्नी ने बताया कि पुलवामा हमले के बाद देर रात सीआरपीएफ कमांडेंट ने पहले फोन कर पिता ओमप्रकाश त्रिपाठी को पंकज के लापता होने की सूचना दी, फिर अगले दिन सुबह उनके शहादत की खबर घर पहुंची. एक साल बीत जाने के बाद भी शहीद की पत्नी चाहती है कि पाकिस्तान को मुंह तोड़ जवाब दिया जाए, जिससे फिर कभी इस तरह की घटना न हो सके.

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शहीद पंकज त्रिपाठी की पत्नी रोहिणी को राज्य सरकार ने सरकारी नौकरी देने का वादा किया था. जिसके तहत रोहणी ने पहले लक्ष्मीपुर ब्लाक में कनिष्ठ सहायक पद पर कार्यभार ग्रहण किया. फिर कार्यस्थल घर से दूर होने के कारण रोहिणी ने शासन को पत्र लिखकर अपना स्थानांतरण फरेंदा ब्लाक में करवा लिया. अभी वो फरेंदा ब्लाक में सेवा दे रही हैं.

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शहीद पंकज के पिता ओमप्रकाश त्रिपाठी के अंदर पाकिस्तान के खिलाफ गुस्सा साफ दिखाई देता है. बात करते-करते उनके आंखों में आंसू आ जाते हैं. उन्होंने कहा कि अगर देश को उसके दूसरे बेटे की जरूरत पड़ेगी तो वो उसको भी सेना में भेजने के लिए हमेशा तैयार रहेंगे. साथ ही उन्होंने शहीद पंकज त्रिपाठी के बेटे को भी सेना में भेजने की बात कही. 

 

पंकज त्रिपाठी के शहीद होने के बाद शासन ने वादा किया था कि गांव के स्कूल का नाम शहीद के नाम पर होगा. जिसके बाद स्कूल का नाम पूर्व माध्यमिक विद्यालय से अमर शहीद पंकज त्रिपाठी विद्यालय बेलहिया रखा गया. शहीद पंकज त्रिपाठी के नाम पर गांव में ही शहीद स्मारक बनाया जा रहा है, जिसका काम युद्ध स्तर पर चल रहा है. स्मारक बनाने का काम पहले ग्राम सभा को मिला था लेकिन कोई बजट न होने के कारण प्रधान आनाकानी करने लगे, फिर शासन ने इसका कार्यभार जिला पंचायत को सौप दिया.

 

 अभी जिला पंचायत द्वारा शहीद स्मारक बनाया जा रहा है. शहीद पंकज त्रिपाठी के घर तक जाने का सही रास्ता नहीं था, लेकिन शासन ने शहीद के घर तक जाने के लिए सीसी रोड़ बनाकर रास्ते को सही किया. ऐसे ही गांव में इंट्री के पहले एक गेट लगाया गया है जिसपर शहीद की प्रतिमा भी स्थापित की गई है.

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