तीसरी बार झांसी पहुंचे टिड्डी दल की एक न चली, अब भी टला नहीं है खतरा

झांसी में निगरानी समिति ने कृषि विभाग की टीमों और सरकार की ओर से आई केंद्रीय टीमों के साथ मिलकर रात के वक्त इन पर केमिकल छिड़काव कर मारने की योजना बनाई. योजना के तहत उन्होंने टहरौली तहसील के ताई और सिलौरी गांव के आसपास रैन बसेरा कर रहे टिड्डी दल पर दवाइयां डालीं. इस छिड़काव से करीब 30 लाख से ज्यादा टिड्डियों को मारा जा सका. 

तीसरी बार झांसी पहुंचे टिड्डी दल की एक न चली, अब भी टला नहीं है खतरा
झांसी में 30 लाख टिड्डियो को मारा गया (File Photo)

झांसी: तीसरी बार झांसी पहु्ंचे विशाल टिड्डी दल को एक बार फिर झांसी के किसानों और प्रशासनिक तैयारियों से हार माननी पड़ी. पाकिस्तान से राजस्थान होते हुए मध्य प्रदेश के रास्ते झांसी पहुंचे तीसरे विशाल टिड्डी दल में करीब 30 लाख टिड्डियों को मार गिराने का दावा झांसी के जिला प्रशासन ने किया है.

काम आई टिड्डी नियंत्रण की रणनीति 
माना जा रहा है कि झांसी पहुंचे टिड्डियों के दल में टिड्डियों की संख्या 2 से 3 करोड़ के लगभग है. जिले के अलग-अलग हिस्सों में करीब हफ्ते भर से टिड्डियां उत्पात मचा रही हैं. झांसी जिला प्रशासन इन्हें नियंत्रित करने के लिए रणनीति बनाकर काम कर रहा है. टिड्डियों की सक्रियता दिन में होती है, जबकि रात में वे किसी एक जगह जमीन पर उतरकर विश्राम करती हैं. झांसी में निगरानी समिति ने कृषि विभाग की टीमों और सरकार की ओर से आई केंद्रीय टीमों के साथ मिलकर रात के वक्त इन पर केमिकल छिड़काव कर मारने की योजना बनाई. योजना के तहत उन्होंने टहरौली तहसील के ताई और सिलौरी गांव के आसपास रैन बसेरा कर रहे टिड्डी दल पर दवाइयां डालीं. इस छिड़काव से करीब 30 लाख से ज्यादा टिड्डियों को मारा जा सका. 

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मध्य प्रदेश की ओर रवाना हुआ टिड्डी दल 
करोड़ों की संख्या में चल रहे टिड्डी दल में से 30 लाख की मौत के बाद बची हुई टिड्डियां सुबह बरुआसागर होते हुए मध्य प्रदेश की ओर रवाना हो गईं. हालांकि हवाओं का रुख देखते हुए माना जा रहा है कि जिले में ये दल एक बार फिर लौटेगा, जिससे निपटने की तैयारी कृषि विभाग ने किसानों के साथ मिलकर की है.

सब्जियों की फसल कर चुके हैं तबाह 
टिड्डियों का दल तीन हिस्से में बंटकर झांसी में एक-एक कर पहुंच रहा है. पहली बार हुए टिड्डियों के हमले में उन्होंने सब्जियों की फसल को नुकसान पहुंचाया था. हालांकि आगे के दो हमलों में वे फसलों को इतना नुकसान नहीं पहुंचा पाए, क्योंकि गांववालों की मुस्तैदी और प्रशासन की तैयारी काम आ रही है. 

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