5वीं सदी के इस प्राचीन मंदिर में है अलौकिक शिवलिंग, सिर्फ इन भक्तों को है आलिंगन का अधिकार
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5वीं सदी के इस प्राचीन मंदिर में है अलौकिक शिवलिंग, सिर्फ इन भक्तों को है आलिंगन का अधिकार

पुरातत्व विभाग के अनुसार इस शिव मंदिर का निर्माण 5वीं सदी में राजा बेन ने कराया था. चंदौसी तहसील के इस क्षेत्र को राजा बेन की नगरी बताया जाता है. राजा बेन के नाम पर ही इस गांव का नाम बेरनी पड़ा. विशाल टीले पर बसे इस गांव में टीलों की खुदाई के दौरान आज भी पांचवी सदी की मूर्तियां और सिक्के निकलते रहते हैं. 

5वीं सदी के इस प्राचीन मंदिर में है अलौकिक शिवलिंग, सिर्फ इन भक्तों को है आलिंगन का अधिकार

सुनील सिंह/संभल: यूपी के संभल जनपद की चन्दौसी तहसील के गांव बेरनी के प्राचीन शिव मंदिर में एक अनोखा शिवलिंग मौजूद है. इसके बारे में मान्यता है कि इस मंदिर में अहंकारी व्यक्ति की न तो पूजा सफल होती है और न ही वो शिवलिंग का आलिंगन कर पाता है. भक्ति-भाव वाला व्यक्ति सहज ही शिवलिंग का आलिंगन कर सकता है. श्रावण माह में इस अलौकिक शिवलिंग के दर्शन और पूजा अर्चना करने के लिए बड़ी संख्या शिव भक्त इस प्राचीन शिव मन्दिर में पहुंचते हैं. 

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इस मंदिर में है भगवान भोले शंकर का अलोकिक शिवलिंग 

भोले शंकर का यह अलौकिक शिवलिंग संभल जिले के चन्दौसी तहसील के गांव बेरनी में स्थित प्राचीन शिव मंदिर में स्थापित है. श्रावण मास के दिनों में इस अलौकिक शिवलिंग के दर्शन करने के लिए भारी संख्या में श्रद्धालुओ की भीड़ उमड़ती है. पूरे साल मंदिर में साधू संतों का आवागमन रहता है. मन्दिर भोले बाबा के जयकारों से गूंजता रहता है. 1700 साल से अधिक इस प्राचीन शिव मंदिर में स्थापित शिवलिंग के संदर्भ में मान्यता है कि भगवान भोले शंकर का यह शिवलिंग अलोकिक है. 

ऐसा कहा जाता है इस अलौकिक शिवलिंग को यदि अहंकार में मद होकर आलिंगन में लेने का प्रयास किया जाए तो यह अलौकिक शिवलिंग श्रद्धालु के आलिंगन में नहीं आता. लेकिन यदि भक्ति-भाव से शिवलिंग का आलिंगन किया जाए तो शिवलिंग सहज ही आलिंगन में आ जाता है.

5वीं सदी का है यह प्राचीन शिव मंदिर 
भगवान शिव का यह प्राचीन शिव मंदिर 5वीं सदी का बताया जाता है. पुरातत्व विभाग के अनुसार इस शिव मंदिर का निर्माण 5वीं सदी में राजा बेन ने कराया था. चंदौसी तहसील के इस क्षेत्र को राजा बेन की नगरी बताया जाता है. राजा बेन के नाम पर ही इस गांव का नाम बेरनी पड़ा. विशाल टीले पर बसे इस गांव में टीलों की खुदाई के दौरान आज भी पांचवी सदी की मूर्तियां और सिक्के निकलते रहते हैं. 

खुदाई के दौरान भगवान शिव के चतुर्भुज रूप की एक मूर्ति मिली
वर्ष 2010 में एक टीले की खुदाई के दौरान एक किसान को भगवान शिव के चतुर्भुज रूप की एक मूर्ति मिली थी. भारतीय पुरातत्व विभाग ने जांच के बाद इस मूर्ति को पांचवी सदी का बताया. यह भव्य मूर्ति आज भी मन्दिर में रखी हुई है. इस मूर्ति के मिलने के बाद पुरातत्व विभाग ने गांव के सभी टीलों की खुदाई पर रोक लगा कर प्राचीन शिव मन्दिर को सौन्दर्यकरण के लिए पर्यटन विभाग को सौप दिया.

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इस प्राचीन मंदिर का 3 बार जीर्णोद्वार 
इस प्राचीन शिव मंदिर का 3 बार जीर्णोद्वार हो चुका है. ग्रामीण बताते हैं की पहली बार राजा बेन ने इस मन्दिर का जीर्णोद्वार कराया. साल 2010 में बहुत ज्यादा बरसात से मंदिर ढह कर पूरी तरह ध्वस्त हो गया लेकिन मन्दिर में स्थापित शिवलिंग को कोई नुक्सान नहीं पहुंचा. 

किया गया मंदिर का सौंदर्यीकरण
यूपी के सीएम रहे मुलायम सिंह यादव ने भी इस मन्दिर के जीर्णोद्वार के लिए 10 लाख रूपये दिए थे. पर्यटन विभाग ने भी 10 लाख रूपये इस मन्दिर के सौन्दर्यीकरण के लिए आवंटित किए.  श्रावण मास के दिनों में इस अलौकिक शिव लिंग की पूजा अर्चना करने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ इस प्राचीन मंदिर उमड़ती है. प्रत्येक सोमवार को विशाल मेला भी लगता है. शिव भक्त भगवान शंकर के इस अलौकिक शिवलिंग पूजा अर्चना के बाद भंडारे का आयोजन कर प्रसाद वितरण करते हैं.

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