चित्रकूट: मुख्तार अंसारी का करीबी था मेराज अली, पहले मुन्ना बजरंगी के साथ करता था काम

मेराज ने दशकों से जुर्म को अपना पेशा बना रखा. उस पर हत्या, लूट और उगाही के दर्जनों केस दर्ज थे.

चित्रकूट: मुख्तार अंसारी का करीबी था मेराज अली, पहले मुन्ना बजरंगी के साथ करता था काम
अपराधी मेराज उर्फ मेराजुद्दीन (फाइल फोटो).

अनुज मिश्रा/चित्रकूट: चित्रकूट जेल शुक्रवार को खूनी अखाड़ा बन गई. जहां तीन बड़े अपराधी आपस में ही लड़कर हमेशा के लिए मौत की नींद सो गए. इसी में एक चेहरा था मेराज उर्फ मेराजुद्दीन. जो बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी का करीबी माना जाता था. 

 

बाहुबली मुख्तार का बताया जाता था खास गुर्गा
मूलरूप से गाजीपुर का रहने वाला मेराज अली बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी का खास गुर्गा बताया जाता था. कहा जाता है कि मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद मेराज, मुख्तार अंसारी के बेहद करीब आ गया था. उसने दशकों से जुर्म को अपना पेशा बना रखा. हत्या, लूट और उगाही के दर्जनों केस मेराज पर दर्ज थे. वह बनारस के जैतपुर थाने का बड़ा अपराधी था. असलहों का इंतजाम करना हो या फर्जी दस्तावेज बनाना हो, वह हर काम में माहिर था. पिछले साल अक्टूबर में जैतपुरा पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया 

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बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय हत्याकांड से जुड़ा था नाम
गाजीपुर के रहने वाले बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय हत्याकांड ने पूरे यूपी को हिला दिया था. दिनदहाड़े हुए इस हत्याकांड को देखकर सभी की रूह कांप गई थी. इस हत्याकांड के बाद मुन्ना बजरंगी और मुख्तार अंसारी के नाम सामने आए थे. कहा जाता है कि मुख्तार के ही इशारे पर मुन्ना ने राय की हत्या की. इस हत्याकांड में मेराज का नाम भी जुड़ा था.

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मुन्ना बजरंगी की मौत के बाद बढ़ा कद
मेराज का कद मुन्ना बजरंगी की मौत के बाद बढ़ गया था. बताते हैं कि बजरंगी की मौत के बाद उसकी अपराध की विरासत को संभालने वालों में मेराज का नाम सबसे आगे चल रहा था. इसी बीच मेराज के मुख्तार से भी नजदीकियों के किस्से सामने आए. लेकिन मेराज का हश्र भी बजरंगी की तरह की हुआ. बता दें कि बजरंगी की भी हत्या बागपत जेल में ही एक कैदी ने कर दी थी.

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वाराणसी से चित्रकूट जेल हुआ था ट्रांसफर
20 मार्च 2021 को वाराणसी जेल से चित्रकूट जेल उसका ट्रांसफर हुआ था. मेराज ने पिछले साल ही बनारस में सरेडर किया था. उसपर आरोप था कि उसने फर्जी दस्तावेजों के सहारे कई हथियार जुटाए थे.  

क्या है पूरा मामला ?
दरअसल, भोपाल से फरारी काट चुके पश्चिमी यूपी के कुख्यात बदमाश अंशु दीक्षित ने शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे मुकीम काला और मेराज अली को मारने के बाद पांच कैदियों को बंधक बना लिया. पुलिस ने अंशु को उन्हें छोड़ने की बात कही. लेकिन वह नहीं माना. आखिरकार वह पुलिस की गोली का शिकार बन गया. हालांकि, ये तीनों कैदी बेहद खतरनाक अपराधी थे. इन्होंने न सिर्फ कई परवारों के चिराग बुझाएं बल्कि दर्जनों मासूमों पर भी जुर्म किए. 

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