शाहजहांपुर में रंगों के त्यौहार पर 'लाट साहब' को पड़ते हैं जूते, जानिए क्यों खेली जाती है ये अनोखी होली

शख्स को अंग्रेज मानकर उसे भैंसा गाड़ी पर बैठाया जाता है और फिर जूते-झाड़ू से पिटाई की जाती है. साथ ही शहर भर में घुमाया जाता है.

शाहजहांपुर में रंगों के त्यौहार पर 'लाट साहब' को पड़ते हैं जूते, जानिए क्यों खेली जाती है ये अनोखी होली

शिव कुमार/शाहजहांपुर: होली को भले ही रंगों का त्यौहार कहा जाता हो लेकिन भारत में इसे अलग-अलग तरीकों से खेलने की अनोखी परंपरा रही है. कहीं लड्डू, तो कहीं लट्ठ बरसाए जाते हैं तो वहीं उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में सालों से होली के मौके पर जूता मार होली खेली जाती है. ये होली अंग्रेजों के लिए अपना गुस्सा जाहिर करने के लिए खेली जाती है. एक शख्स को अंग्रेज मानकर उसे भैंसा गाड़ी पर बैठाया जाता है और फिर जूते-झाड़ू से पिटाई की जाती है. साथ ही शहर भर में घुमाया जाता है. इसे 'लाट साहब' के जुलूस के नाम से जाना जाता है.

यहां के लोगों का मानना है कि अंग्रेजों ने जो जुल्म हिंदुस्तानियों पर किए थे उसका गुस्सा आज भी हर किसी के दिल में है. जिस वजह से यहां के लोग इस तरह से होली मनाते हैं.

'लाट साहब' के जुलूस में हजारों लोग होते हैं शामिल
'लाट साहब' के जुलूस में भारी संख्या में लोग शामिल होते हैं. इलाके के लोग 'लाट साहब' को जूते फेंककर भी मारते हैं. इस दौरान 'लाट साहब' के बदन पर एक भी कपड़ा नहीं होता. लेकिन जब जुलूस मेन रोड पर आता है तो लाट साहब को एक पन्नी की चादर से ढक दिया जाता है. जुलूस में हजारों की संख्या में हुड़दंगी जमकर हुड़दंग मचाते हैं. 'लाट साहब' का जुलूस शहर में दो जगहों से निकाला जाता है. पहला बड़े चौक से और दूसरा सराय काईया से, जिसमें हुड़दंगी हर साल कोई न कोई बलवा जरूर खड़ा कर देते हैं.

'लाट साहब' के जुलूस में होते हैं सुरक्षा के कड़े इंतजाम
वैसे तो किसी को सरेआम पीटना गैर कानूनी होता है लेकिन यहां जूतों और झाड़ू से पीटने का ये पूरा खेल पुलिस की निगरानी में होता है. सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए जाते हैं. पैरामिलिट्री फोर्स भी तैनात रहती है. शहर में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस अधिकारियों समेत लगभग 3 हजार पुलिस कर्मियों को तैनात किया जाता है. ताकि कार्यक्रम को शान्तिपूर्ण ढंग से कराया जा सके. ड्रोन से भी 'लाट साहब' की निगरानी की जाती है.

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