दावा: UP, MP, दिल्ली में आ चुकी है कोरोना की पीक, अब केसेस में लगातार आएगी गिरावट

प्रोफेसर्स ने कोरोनावायरस की सेकंड वेव को हर एक दिन के आधार पर 'द सस्पिटेबल इंफेक्टेड रेसिसटेंट' मॉडल बनाया है. इसके जरिए केसेस के घटने और बढ़ने का आकलन कर सकते हैं. इस मॉडल की मदद से दोनों प्रोफेसर्स ने अलग-अलग राज्यों की रिपोर्ट तैयार की है.

दावा: UP, MP, दिल्ली में आ चुकी है कोरोना की पीक, अब केसेस में लगातार आएगी गिरावट

नई दिल्ली: कोरोनावायरस महामारी की वजह से हर ओर त्राहि-त्राहि है. इस बीच एक ऐसी खबर सुनने सामने आ रही है, जिसे सुनकर शायद प्रदेश के लोगों को थोड़ी राहत मिले. बताया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, दिल्ली, गुजरात, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में वायरस का पीक आ चुका है. यानी इसके आगे, अब कोरोना केसेस की संख्या धीरे-धीरे कम होगी. आंकड़ों के अनुसार कोरोना के नए मामलों की संख्या में भी गिरावट देखने को मिल रही है. हालांकि, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे राज्यों में अभी पीक नहीं आई है. इन प्रदेशों में अभी संक्रमण की संख्या बढ़ सकती है. इसलिए सतर्क रहना जरूरी है.

UPPSC Exams: कोरोना की वजह से कई एग्जाम टले, अब पूरे साल के कैलेंडर में हो सकता है बदलाव

इन राज्यों में हो सकता है ज्यादा खतरा
प्रसिद्ध अखबार हिंदुस्तान में छपी रिपोर्ट के अनुसार, सबसे ज्यादा खतरा हरियाणा, बिहार, झारखंड, राजस्थान, केरल और तेलांगना में बताया जा रहा है. जहां संक्रमण फ्लक्चुएट होता दिख रहा है. यानी केसेस कभी ज्यादा तो कभी कम आ रहे हैं. बताया जा रहा है कि यह रिपोर्ट IIT के वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रो. महेंद्र कुमार वर्मा और प्रो. राजेश रंजन की है. यह रिपोर्ट हेल्थ मिनिस्ट्री को भी भेजी गई है.

बेसिक शिक्षकों को सरकार ने दी राहत, जिनका इंटर-डिस्ट्रिक्ट ट्रांसफर रद्द हुआ था, वे फिर कर सकेंगे अप्लाई

जानें किस आधार पर बनाई रिपोर्ट
प्रोफेसर्स ने कोरोनावायरस की सेकंड वेव को हर एक दिन के आधार पर 'द सस्पिटेबल इंफेक्टेड रेसिसटेंट' मॉडल बनाया है. इसके जरिए केसेस के घटने और बढ़ने का आकलन कर सकते हैं. इस मॉडल की मदद से दोनों प्रोफेसर्स ने अलग-अलग राज्यों की रिपोर्ट तैयार की है. प्रो. वर्मा ने अपनी रिपोर्ट में प्रदेश के अनुसार टीपीआर (नंबर ऑफ पाजिटिव केसेस पर 100 टेस्ट) और सीएफआर (द परसेंटेज ऑफ डेथ पर 100 केस) भी निकाला है. बताया जा रहा है कि उनकी रिपोर्ट में पाया गया है कि दिल्ली में टीपीआर और सीएफआर दोनों ही ज्यादा हैं.

WATCH LIVE TV