आप भी सोचते हैं 'नाम में क्या रखा है'? तो 9 मेडिकल कॉलेजों के सहारे BJP का प्लान समझिए

देवरिया, एटा, फतेहपुर, हरदोई, प्रतापगढ़, सिद्धार्थनगर, गाजीपुर, मिर्जापुर और जौनपुर में नए मेडिकल कॉलेज बनकर तैयार हैं. आने वाले दिनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इनका लोकार्पण करेंगे.

आप भी सोचते हैं 'नाम में क्या रखा है'? तो 9 मेडिकल कॉलेजों के सहारे BJP का प्लान समझिए
सांकेतिक तस्वीर.

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए योगी सरकार 'वन डिस्ट्रिक्ट वन मेडिकल कॉलेज' की नीति पर बेहद तेज गति से कार्य कर रही है. देवरिया, एटा, फतेहपुर, हरदोई, प्रतापगढ़, सिद्धार्थनगर, गाजीपुर, मिर्जापुर और जौनपुर में नए मेडिकल कॉलेज बनकर तैयार हैं. आने वाले दिनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इनका लोकार्पण करेंगे.

इन मेडिकल कॉलेजों के बनने से संबंधित जिलों में चिकित्सा के क्षेत्र में जरूरी सुविधाएं तो मिलेंगी ही, भाजपा इनके सहारे अपनी चुनावी रणनीति भी साध रही है. भाजपा एक रणनीति के तहत इन मेडिकल कॉलेजों का लोकार्पण कर रही है. कहीं बाबा का आर्शीवाद तो कहीं जातीय अस्मिता का सहारा लिया गया है. 

इन 9 मेडिकल कॉलेजों में 7 का नामकरण हो चुका है, सिर्फ फतेहपुर और हरदोई में बन रहे मेडिकल कॉलेजों का नामकरण होना बाकी है. कुछ के नाम प्रसिद्ध बाबाओं या संतों पर रखें गए हैं, तो कुछ का नामकरण इलाके के जातीय समीकरण को ध्यान में रखकर उनके नेताओं के नाम पर रखा गया है. आइए समझते हैं यूपी में लोकार्पण के लिए तैयार मेडिकल कॉलेजों के नामकरण के पीछे भाजपा की रणनीति...

सोनेलाल पटेल मेडिकल कॉलेज प्रतापगढ़ 
'अपना दल' के संस्थापक सोनेलाल पटेल उत्तर प्रदेश में कुर्मी जाति के सबसे बड़े नेता माने जाते हैं. इस नाम से जाति का सम्मान जुड़ा है. यूपी के 16 जिलों में कुर्मी-पटेल मतदाता 12 फीसदी के करीब हैं. इसमें प्रतापगढ़ जिला भी आता है. अपना दल फिलहाल भाजपा के साथ गठबंधन में है. प्रतापगढ़ मेडिकल कॉलेज का नाम सोनेलाल पटेल के नाम पर रखने से माना जा रहा है कि कुर्मी मतदाताओं में इसका असर होगा.

माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज सिद्धार्थनगर
माधव प्रसाद त्रिपाठी भाजपर के पहले प्रदेश अध्यक्ष थे. साथ ही पूर्वांचल में ब्राह्मणों के सबसे बड़े नेता के तौर पर उनकी पहचान थी. आज भी माधव त्रिपाठी के नाम के साथ ब्राह्मणों का सम्मान जु़ड़ा है. यूपी में करीब 13% ब्राह्मण मतदाता हैं. इनका प्रभाव पूर्वांचल में ज्यादा है. साल 2017 में करीब 80 फीसदी ब्राह्मणों ने भाजपा को वोट किया था. सिद्धार्थनगर मेडिकल कॉलेज का नामकरण माधव प्रसाद त्रिपाठी के नाम पर करने को चुनाव से पहले इस वोट बैंक को मजबूत करने की भाजपा की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है.

वीरांगना अवंती बाई लोधी मेडिकल कॉलेज एटा
देश की प्रथम महिला स्वतंत्रता सेनानी और शहीद वीरांगना अवंती बाई उत्तर प्रदेश में लोधी समाज के लिए सम्मान का नाम है. लोधी समाज का एटा, आगरा और आस-पास के जिलों में काफी ज्यादा प्रभाव है. पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह भी लोधी समाज से आते हैं. यह समाज फिलहाल भाजपा के साथ है. राजनीतिक पंडितों का मानना है कि एटा, आगरा और आस-पास के जिलों में अपने इस वोट बैंक को मजबूत करने के लिए ही भाजपा ने एटा मेडिकल कॉलेज का नाम वीरांगना अवंती बाई लोधी के नाम पर रखने का फैसला किया है.

उमानाथ सिंह मेडिकल कॉलेज जौनपुर
उमानाथ सिंह दो बार भाजपा विधायक रहे और भाजपा सरकार में कारागार मंत्री रहे. इनको जनपद जौनपुर में शहीद का दर्जा दिया जाता है. जौनपुर का जिला अस्पताल भी उमानाथ सिंह के नाम से जाना जाता है और अब मेडिकल कॉलेज का नामकरण भी इनके नाम पर किया गया है. उमानाथ सिंह का नाम पूर्वांचल के कई जिलों में मायने रखता है. इसका असर ठाकुर वोट बैंक पर भी पड़ेगा.

महर्षि विश्वामित्र मेडिकल कॉलेज गाजीपुर
प्राचीन काल में महर्षि विश्वामित्र के पिता राजा गाधि की राजधानी गाधिपुरी था. गाधिपुरी का अपना वैभवशाली अतीत रहा है. गाजीपुर का प्राचीन नाम गाधिपुरी बताया जाता है. भाजपा सरकार में गाजीपुर का नाम बदलने की मांग उठती रही है. ऐसे में जिले का नाम न बदलकर मेडिकल कॉलेज का नाम विश्वामित्र के नाम करके भाजपा यहां चुनावी रणनीति साधना चाहती है.

महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज देवरिया
देवरहा बाबा उत्तर प्रदेश के देवरिया जनपद में एक सिद्ध संत थे. उन्होंने 19 जून 1990 को वृन्दावन में अपने प्राण त्यागे थे. मान्यता है कि वह 900 वर्षों तक जिंदा रहे और पानी पर चल सकते थे. डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, मदन मोहन मालवीय, पुरुषोत्तमदास टंडन जैसी विभूतियां देवरहा बाबा को पूजनीय मानती थीं. देवरहा बाबा अष्टांग योग में पारंगत थे. पूर्वी उत्तर प्रदेश के लोगों में उनकी काफी मान्यता है और उनकी पूजा होती है. इस सिद्ध संत के नाम पर मेडिकल कॉलेज का नामकरण कर भाजपा ने पूर्वांचल में अपनी पैठ मजबूत करने की कोशिश की है.

मां विंध्यवासिनी मेडिकल कॉलेज मिर्जापुर
इसके साथ ही सरकार ने मिर्जापुर में बने नए मेडिकल कॉलेज नाम ‘मां विंध्यवासिनी’ के नाम पर रखने का फैसला किया है. यह एक शक्ति पीठ है. यूपी के लाखों लोगों की आस्था का बड़ा केंद्र है. मिर्जापुर मेडिकल कॉलेज का नाम मां विध्यवासिनी के नाम पर रखकर भाजपा ने हिंदू मतदाताओं के ​बीच धर्म रक्षक होने की छवि को मजबूत किया है. इसका असर विधानसभा चुनाव में देखने को मिल सकता है.

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