मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी का गेट टूटने का रास्ता साफ, कोर्ट ने खारिज की आजम खान की याचिका

जौहर यूनिवर्सिटी के कर्ताधर्ताओं पर आरोप था कि उन्होंने लोक निर्माण विभाग सड़क पर कब्जा कर गेट बनाकर रास्ता बंद कर दिया गया. इसके साथ ही जुर्माने के आदेश भी दिए गए थे.

मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी का गेट टूटने का रास्ता साफ, कोर्ट ने खारिज की आजम खान की याचिका
मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी रामपुर.

रामपुर: जौहर यूनिवर्सिटी के गेट प्रकरण में सपा सांसद मोहम्मद आजम खान को अदालत से बड़ा झटका लगा है. सोमवार को डिस्ट्रिक्‍ट कोर्ट ने जौहर यूनिवर्सिटी और आजम खान पक्ष की अपील खारिज करते हुए एसडीएम कोर्ट का फैसला बरकरार रखा. इसके बाद रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी का गेट टूटने रास्‍ता साफ हो गया है.

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साल 2019 में एसडीएम सदर की कोर्ट ने 15 दिनों के अंदर जौहर यूनिवर्सिटी का मुख्य गेट तोड़ने का आदेश दिया था. जौहर यूनिवर्सिटी के कर्ताधर्ताओं पर आरोप था कि उन्होंने लोक निर्माण विभाग सड़क पर कब्जा कर गेट बनाकर रास्ता बंद कर दिया गया. इसके साथ ही जुर्माने के आदेश भी दिए गए थे.

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मोहम्मद आजम खान और मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी पक्ष ने एसडीएम कोर्ट के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई थी. हाई कोर्ट ने आजम खान की याचिका खारिज करते हुए उन्हें जिला जज की कोर्ट में अपील दायर करने को कहा था. सोमवार को जिला जज की कोर्ट ने भी उनकी अपील खारिज करते हुए एसडीएम सदर कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा.

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एसडीएम कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए रामपुर जिला प्रशासन मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी का गेट तोड़कर पीडब्ल्यूडी की सड़क को कब्जा मुक्त कराएगा. जिला शासकीय अधिवक्ता सिविल राजीव अग्रवाल ने बताया कि इस मामले में कोर्ट ने 2 अपील खारिज की हैं, एक जौहर यूनिवर्सिटी पक्ष की थी और एक आजम खान की ओर से.

भाजपा नेता आकाश सक्सेना ने 2019 में की थी शिकायत
बीजेपी नेता आकाश सक्सेना ने 2019 में जौहर यूनिवर्सिटी गेट मामले में शिकायत की थी. जी मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि जौहर यूनिवर्सिटी का गेट सरकारी जमीन पर बना है. करीब 13 करोड़ की लागत से सड़क बनी थी, उस पर गेट बना दिया. एसडीएम सदर कोर्ट ने गेट तोड़ने के आदेश दिए. आजम खान इस फैसले के खिलाफ जिला कोर्ट गए. उनकी अपील खारिज हो गई है. मेरी मांग है कि सरकारी जमीन पर बने गेट को तोड़ा जाए, सड़क को खाली किया जाए.

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