कोरोना टीका लगाते समय पीएम मोदी के गले में था असमिया गमछा, जानें इसकी खासियत

PM मोदी ने  गले में असम का गमछा डाला हुआ था तो उनकी वेशभूषा पश्चिम बंगाल जैसी लग रही थी. पीएम मोदी ने लंबी ढाढ़ी रख रखी थी जो रवीन्द्र नाथ टैगोर की याद दिलाती है. प्रधानमंत्री बनने के बाद से ही नरेन्द्र मोदी को अक्सर असमिया गमछा पहने हुए देखा गया. 

कोरोना टीका लगाते समय पीएम मोदी के गले में था असमिया गमछा, जानें इसकी खासियत

नई दिल्ली: आज यानी एक मार्च से देश में आम लोगों के लिए कोरोना टीकाकरण अभियान शुरू हो गया. इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कोरोना का टीका लगवाया. PM मोदी सोमवार सुबह करीब 6.25 बजे बिना किसी सुरक्षा और तामझाम के दिल्ली के AIIMS पहुंचे और भारत बायोटेक की कोवैक्सीन का टीका लगवाया. पीएम मोदी को पुदुचेरी की नर्स पी. निवेदा ने टीका लगाया. टीका लगवाने के दौरान पीएम मोदी ने गले में एक गमछा पहन रखा था. पीएम मोदी की ये तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं.

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पश्चिम बंगाल की वेशभूषा, असम का गमछा
उन्होंने गले में असम का गमछा डाला हुआ था तो उनकी वेशभूषा पश्चिम बंगाल जैसी लग रही थी. पीएम मोदी ने लंबी ढाढ़ी रख रखी थी जो रवीन्द्र नाथ टैगोर की याद दिलाती है. पीएम मोदी के कोरोना वैक्सीन लगाने की तो चर्चा है साथ ही इस गमछे की भी चर्चा जोरों पर है. प्रधानमंत्री बनने के बाद से ही नरेन्द्र मोदी को अक्सर असमिया गमछा पहने हुए देखा गया. जिसकी वजह से असमिया फूलाम गमछे को विश्वस्तर पर पहचान मिल रही है.

चर्चा में क्यों?
असम में परम्परागत रूप से प्रचलित एक विशेष प्रकार के सूती गमछे (Assamese Gamosa) को कोविड-19 के प्रसार में रोकथाम हेतु मॉस्क के रूप प्रयोग किया जा रहा है. आज पीएम मोदी ने वैक्सीनेशन के दौरान इसको गले में डाल रखा था जिसकी वजह से ये गमछा चर्चा में आ गया.

कई मौकों पर पीएम ने पहना असमिया गमछा
इस गमछे का भारत के पूर्वोत्तर राज्य असम से खास क्नेक्शन है. दरअसल यह असमी गमछा है, जिसे गले में लट काए हुए प्रधानमंत्री को कई अवसरों पर देखा गया है. पिछले तीन वर्ष से मोदी योग दिवस पर यही गमछा पहन रहे हैं. इससे पहले वह तिरंगे और और त्रिभुजाकार डिजाइन वाले गमछे में नजर आए थे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी योगी के अलावा भी कई खास मौकों पर इस गमछे को पहने हुए नजर आ चुके हैं. 
 
गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज है असमी गमछा
असमी गमछे को गमुसा कहा जाता है जो पूरे देश में काफी ज्यादा लोकप्रिय है. बता दें कि इस गमछे का फैब्रिक का सॉफ्ट होता है. इससे न सिर्फ पसीना अच्छे से साफ होता है, बल्कि यह शरीर को गर्मी से भी बचाता है. आपको जानकर हैरानी होगी कि असमी गमछा गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज है. यह दुनिया का सबसे लंबा गमछा है जिसकी लंबाई करीब 1,455.3 मीटर लंबा है. प्योर कॉटन से बने इस खास गमछे के दोनों सिरों पर लाल रंग की कढ़ाई होती है. उल्लेखनीय है कि यह गमछे, इनके खुद के घरों में महिलाओं द्वारा तैयार किया जाते है. 

दो तरह का होता है असमी गमछा
असम में परंपरागत रूप से दो प्रकार के गमछे बुने जाते हैं. इन्हें 'उका' (Uka) और 'फूलम' (Phulam) कहते हैं। उका समान्यतया सादे रंग के टुकड़े होते हैं, जिनका प्रयोग प्राय: गर्मियों में और नहाने के बाद किया जाता है. 

फूलम का प्रयोग विशेष अवसरों पर होता है. बिहू (रंगोली बिहू) जैसे त्यौहार के समय, स्मृति चिन्ह व अन्य भेंट पर फूलम को उपहार स्वरूप प्रदान किया जाता है. इस पर स्थानीय फूल और फसलों की कलाकृतियां बने रहने के कारण इसे फूलम कहते हैं, परंतु वर्तमान में इसमें अन्य प्रकार की कलाकृतियां भी बनाई जाने लगी हैं. फूलम की अपेक्षा उका का प्रयोग अधिक किया जाता है.

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