जब इलाहाबाद के एक मकान विवाद के लिए इंदिरा गांधी को खुद भिजवाना पड़ा था डीएम को संदेश

साहित्यकार उपेंद्रनाथ 'अश्क' खुसरोबाग के एक मकान में सालों से किराए पर रहते आए थे. जब उस मकान को खरीदने की बारी आई तो करवरिया विवाद से तंग आकर वह दिल्ली जाकर प्रधानमंत्री के काफिले के आगे लेट गए थे.

जब इलाहाबाद के एक मकान विवाद के लिए इंदिरा गांधी को खुद भिजवाना पड़ा था डीएम को संदेश

प्रयागराज: संगम नगरी में यूं तो गांधी परिवार से जुड़े कई किस्से प्रसिद्ध हैं, लेकिन एक ऐसा किस्सा है जिसको आज भी प्रयागराज के रहने वाले नहीं भुला पाते. ये किस्सा है एक मकान के विवाद का, जिसको लेकर खुद प्रधानमंत्री रहते हुए इंदिरा गांधी ने इलाहाबाद के डीएम को संदेश भिजवाकर फटकार लगाई थी. ये मकान विवाद किसी और का नहीं, बल्कि उम्दा लेखक, जीवंत रिश्तों के पर्याय उपेंद्रनाथ 'अश्क' का था, जिनकी पहचान उनकी बेबाकी थी और वो बिना संकोच अपनी बात कह देते थे.

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करवरिया परिवार से जुड़ा है विवाद 
विशिष्ट नारायण करवरिया उर्फ भुक्खल महाराज 1970 के दशक में इलाहाबाद में रियल स्टेट के धंधे के बेताज बादशाह बनकर उभरे. शहर में घर खाली करवाने के मामले में करवरिया परिवार का कोई तोड़ नहीं था. लेकिन कहते हैं कि भुक्खल महाराज इलाहाबाद में सिर्फ एक ही आदमी से मकान खाली नहीं करवा पाए थे और वो थे उपेंद्रनाथ अश्क. उपेंद्रनाथ जिस मकान में किराए पर रहते थे, उस मकान के मालिक को अपना मकान बेचना था और अश्क उस मकान को खरीदना चाहते थे. लेकिन बीच में विशिष्ट नारायण करवरिया आ गए और वह उस मकान को खरीदने के लिए कभी मालिक तो कभी अश्क को धमकी देने लगे. लेकिन अश्क शब्दों का युद्व करते-करते इतने बेबाक हो चुके थे कि उन्होंने न डरते हुए इसकी शिकायत तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से कर दी. इसके बाद करवरिया ने कभी अश्क को न तो धमकी दी और न ही उस मकान की तरफ आंख उठा कर देखा.

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प्रधानमंत्री की गाड़ी के आगे लेट गए थे अश्क
साहित्यकार उपेंद्रनाथ 'अश्क' खुसरोबाग के एक मकान में सालों से किराए पर रहते आए थे. जब उस मकान को खरीदने की बारी आई तो करवरिया विवाद से तंग आकर वह दिल्ली जाकर प्रधानमंत्री के काफिले के आगे लेट गए थे. उनके ऐसा करते ही  इंदिरा गांधी ने उनकी सारी बात सुनी और तत्काल उस वक्त के डीएम को संदेश भिजवाया कि 24 घंटे के अंदर इनकी मदद होनी चाहिए. एक मकान विवाद को लेकर प्रधानमंत्री का खुद संदेश आना और वह भी इंदिरा गांधी जैसी महिला का, ये पर्याप्त था. अश्क की मदद के लिए और हुआ भी वही. भुक्खल महाराज को जिले के डीएम सोनकर के सामने हाजिर होना पड़ा और डीएम की कार्यवाही की बात कहने पर करवरिया ने उस विवाद को खत्म कर दिया.

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